संस्कृति

दुनिया का सबसे पहला जहाजघाट भारत के गुजरात के लॊथल में बना था। 3900 साल पुरानी लोथल जहाजघाट भारत में आधुनिक सभ्यता की जीती जागती निशानी है।

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पिछले सत्तर वर्षों से हमें पढ़ाया गया है कि भारत के लॊग अनपढ़ और गंवार थे, वे जंगलों में रहने वाले असभ्य लोग थे, उनके पास विज्ञान का ज्ञान नहीं था। भारत सपेरों का देश था, मुघलों और अंग्रेज़ों के आने के बाद ही भारत सभ्य समाज बना। अंग्रेज़ों ने हमॆं पढ़ना लिखना सिखाया वगैरा वगैरा। लेकिन सच तो यह है कि दुनिया की सभ्यताओं के आखें खोलने से हज़ारॊं वर्ष पूर्व से ही भारतीयॊं ने अंतरिक्ष पर भी अपना परछम लहराया था।

आज से पांच हज़ार वर्ष पूर्व की मानी जा रही हड़प्पा सभ्यता में मिल रही वस्तुएं पूरी दुनिया को चौंका रही है कि इतने वर्ष पूर्व भारत में इतना विकसित सभ्य समाज कैसे हुआ करता था। ऐसे ही एक चौंका देने वाली खोज गुजरात के तट पर बसे लोथल शहर से प्राप्त हुई  है। लोथल दुनिया का सबसे पहला आधुनिक जहाजघाट है जो कि करीब 3900 साल पुराना है! किसी भी आधुनिक तकनीक के सहायता के बिना बनाया गया इतना बड़ा और व्यवस्थित जहाजघाट दुनिया के किसी भी देश में देखने को नहीं मिलता। केवल जहाजघाट ही नहीं, यहां पर माल भंडारण और यात्री निवासी भी हुआ करते थे जिनमें उस समय में ही शौचालय हुआ करते थे!

आप को जानकर हैरानी होगी कि चार हज़ार साल पूर्व से ही भारत का मेसपटॊमिया, मिस्र और पूरे खाड़ी देशों के लोगों से व्यापार के संबंध थे! समुंदर के मार्ग से किये जाने वाले इस व्यापार में भारत की हड़प्पा संस्कृती की बुद्धीमत्ता झलकती है। हज़ारों वर्ष पूर्व से ही बड़ी बड़ी जहाजें समुंदर की मार्ग से खाड़ी देशों में आवागमन किया करती थी। लोथल जैसा ही जहाजघाट द्वारका शहर में भी मिला है जो कि अब समुंदर के नीचे है। आश्चर्य करने वाली बात यह है कि उन दिनों दिशा सूचक यंत्रों का प्रयॊग नहीं किया जाता था। और ऐसे जहाजघाटों को बनाने के लिए आज के जैसे आधुनिक तकनीक भी नहीं हुआ करते थे।

लोथल के जहाजघाट को कुछ इस तरह बनाया गया था कि समुंदर के ज्वार का पानी नदी में बहकर प्राकृतिक रूप से गॊदी में एकत्रित हुआ करता था! लोथल प्राचीन काल में एक महत्वपूर्ण और संपन्न व्यापार केंद्र था, जिसमें पश्चिम एशिया और अफ्रीका के सुदूर कोनों तक पहुंचने वाले मोतियों, रत्नों और मूल्यवान आभूषणों का व्यापार होता था। वे लोग धातू विज्ञान के अग्राणी थे और आभूषणॊं को बनाने की तकनीक में माहिर थे। पुरातत्ववेत्ताओं का मानना है कि हड़प्पा संस्कृती बहुत विकसित थी जिसका साक्ष मध्य पूर्व देशों में मिल रही वस्तुओं से झलकता है।

मिस्र से लेकर संपूर्ण मध्य पूर्व के देशों में हड़प्पा सभ्यता से जुड़ी वस्तुएं जैसे, रत्न आभूषण, धातू और मिट्टि के बरतन मिले हैं। भारत की सभ्याता केवल मध्य पूर्व में ही नहीं अपितु अमरीका में भी फैली हुयी थी। इसका साक्ष्य कोलराड़ॊ की ग्रांड कानयन के गुफाओं से मिल रहा है। अंग्रेज़ों ने हमारे इतिहास को तॊड़-मरॊड़ कर दुनिया के सामने रखा है। अंग्रेज़ों और वामपंथियों द्वारा बुने गये झूठ के जंजाल से भारत के भविष्य को छुड़ाने का और हमारे इतिहास को नये सिरे से लिखने का वक्त आ गया है। अपने बच्चों को भारत के सही इतिहास से परिचय करवाइये।

Source:epicon.epicchannel.com

Video courtesy: youtube

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