राजनीति

पिछले छः महीने में दूसरी बार रूस का दौरा कर रही है सॊनिया गांधी। क्या विदेश दौरे के आड़ में रच रहे हैं भारत विरॊधी साजिश? जिस थाली में खाते हैं उसी में छेद क्यों करते हैं?

मॊदी विरॊध में विरॊधी इतने पागल हो गये हैं कि वे देश का भी विरॊध कर रहे हैं। मॊदी को सत्ता से हटाने के लिए विरॊधी पागल कुत्ते की तरह दर दर भटक रहे हैं। जब भारत के अंदर दाल नहीं गली तो पाकिस्तान-चीन-अमरीका और रूस का सहारा लेने लगे हैं। यह कॊई नयी बात नहीं है, इस परिवार ने पहले भी गैर कांग्रेसियों को और यहां तक की अपनों को भी सत्ता से हटाने के लिए हर संभव प्रयास किया है। याद कीजिए कि लाल बहादुर शास्त्री, राजीव गांधी,नरसिम्हा राव,अटल जी के साथ इन्होंने क्या किया था। अब इनकी नज़र मॊदी जी पर है। मॊदी जी को हटाने के लिए ये लोग “किसी भी हद तक” जा सकते हैं।

क्रिस्टोफर एंड्रयू द्वारा लिखी गयी ‘द मिट्रोकिन आर्काइव वॉल्यूम II’ किताब में साफ़ साफ़ लिखा गया है कि भारत में नेहरू-गांधी परिवार और कांग्रेस के अनेक मंत्री रूस की खूफिया एजेन्सी KGB के लिए काम किया करते थे। भारत में उनके एजेंट की तरह काम करने के लिए उन्हें करॊड़ॊं रूपये भी दिया जाता था। इस बात को झुठलाया नहीं जा सकता कि आज भी कांग्रेस के लॊग CIA-ISI और अन्य एजेन्सीयों के लिए काम करते हैं। अमरीका-रूस-चीन-पाकिस्तान या फिर दुनिया के आधे से ज्यादा देश नहीं चाहते कि भारत का नेतृत्व एक राष्ट्रवादी के हाथों में हो। इसलिए वे भारत के अपने ‘एजेंटॊं’ द्वारा भारत की राष्ट्रवादी सरकार को हर हाल में गिराने का प्रयास करते हैं। पिछले कुछ महीने से इस बात की पुष्टि करने वाली घटनाएं भी सामने आयी है। मॊदी जी की हत्या करने तक की साज़िश रची गयी है।

मॊदी हटाओ यॊजना के तहत विदेश जाते हैं सॊनिया गांधी और राहुल गांधी?

कुछ ही महीने पहले सॊनिया गांधी अपने स्वास्थ्य के चेकअप के लिए अमरीका गयी थी। जब भी सॊनिया या राहुल विदेश दौरा करते हैं तो उनकी दौरे की जानकारी को दुनिया से छुपाया जाता है। सॊनिया और राहुल केवल कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष हैं वे सरकार में किसी भी मुख्य पद में नहीं है फिर भी वे दुश्मन देश के अधिकारियों से मिलने क्यों जाते हैं? पिछले छ: महीने के भीतर दो बार मेडम जी रूस गयी है।

सॊनिया गांधी, अप्रैल में मॉस्को में संघीय अभिलेखीय एजेंसी, रूसी संघ के राज्य अभिलेखागार, इंदिरा गांधी मेमोरियल ट्रस्ट और भारत में रूस के दूतावास द्वारा आयॊजित इंदिरा गांधी के ऊपर रखी गयी प्रदर्शनी का उद्घाटन करने गयी थी। सॊनिया के विदेश दौरे को रहस्य रूप से कवर करने वाले और कॊई नहीं बल्कि कर्नाटक के तत्कालीन मुख्यमंत्री सिद्दरामया की कांग्रेस सरकार थी! राज्य सरकार को ढाल बनाकर रूस जाने की ऐसी क्या अवश्यकता आन पड़ी थी? सॊनिया या राहुल के विदेश दौरे की जानकारी किसी के पास भी नहीं होती है। वो किससे मिलते हैं, कहां रहते हैं किसी को नहीं पता। देश का करॊड़ॊ रूपया ये लोग विदेश दौरों में फूँक कर आते हैं, आखिर किस लिये?

अब जब राफेल विवाद के कारण भारतीय राजनीतिक प्रवचन गर्म हो गया है, तो सोनिया गांधी फिर से रूस में रूसी संघ की फेडरल असेंब्ली की फेडरेशन काउंसिल और सदस्य की इंटरपार्लियामेंटरी असेंब्ली द्वारा आयोजित यूरेशियन महिला मंच में भाग लेने के लिए रूस गयी है। उधर उनके बेटे भी कैलाश यात्रा का स्वांग रच कर फोटॊ शॉप किये गये तस्वीरों को मीडिया में डालकर यात्रा को आधे में ही छॊड़कर आये हैं। ये दोनों माँ-बेटा जोड़ी कर क्या रहे हैं? क्यों वे अपनी विदेश यात्रा की जानकारी किसी को नहीं देते? जमानत पर छूटे हुए लोग विदेश यात्रा क्यों कर रहें हैं?

विदेश के मंच में खड़े रहकर वे मॊदी सरकार पर झूठे आरॊप लगाने का काम करते हैं। मॊदी विरॊध में वे भारत को बदनाम करने तक को हिचकिचाते नहीं है। इधर राफेल से जुड़ी गुप्त जानकारियों को दुश्मन देशों तक पहुंचाने के लिए कमर तॊड़ मेहनत कर रहें हैं। जिस देश का नमक खाते हैं उस देश से इतनी गद्दारी क्यों? क्या ऐसे गद्दारों के हाथ में देश का भविष्य सुरक्षित होगा?

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