सैन्य सुरक्षा

अगर सऊदी अरब भारत के साथ युद्ध करता है तो भारतीय मुसलमान किस पक्ष का समर्थन करेंगे?

2K Shares

 

जिस देश में मक्का और मदीना हैं,हाँ उस देश के प्रति मुसलमानों के अंदर वफादारी जरूरी है पर वो केवल वैसी ही है जैसे बौद्ध को नेपाल  या किसी ईसाई को जरूशलम के लिए है। धर्म और राष्ट्रीयता स्वतंत्र हैं, और देशभक्ति एक की राष्ट्रीयता का प्रत्यक्ष कार्य है।अगर सऊदी और भारत के बीच युद्ध की स्थिति आती है तो भारतीय मुस्लिम भारत की संप्रभुता के प्रति निष्ठा की शपथ लेंगे।

इस को जानने और समझने के लिए हमे पहले इससे जुड़े इतिहास को समझना होगा क्योंकि यह परिदृश्य पूरी तरह काल्पनिक नहीं है।

इतिहास में सऊदी अरब और ईरान ने सक्रिय रूप से भारत के खिलाफ युद्धों में पाकिस्तान की ही मदद की है।यहाँ तक की 1971 के युद्ध में सऊदी अरब ने पाकिस्तान की तरफ को अधिक मजबूत करते हुए उन्हें लड़ाकू विमानों, पैसा और आपूर्ति भी प्रदान की थी।

भारत के खिलाफ सुन्नी और शिया शक्तियों दोनों होने के बावजूद भी  भारतीय मुसलमानों ने केवल भारत का समर्थन किया| उन युद्धों के दौरान मुसलमानों से कोई बड़ा विद्रोह नहीं किया गया था| वास्तव में, हर भारत-पाकिस्तान युद्ध के पहले, पाकिस्तानी सेना कश्मीर में घुसने की उम्मीद करती है और सोचती है कि कश्मीरी उनका स्वागत करेंगे लेकिन हर बार कश्मीरी मुसलमान उन की उम्मीदों पर पानी फेर देते है और भारतीय सेना को सचेत कर देते है और पाकिस्तान द्वारा सजाये जा रहे सपनों का वहीं अंत हो जाता है।1947,1965,1971 और 1999 के युद्ध में पाकिस्तान के साथ ऐसा ही हुआ। उनकी मदद घड़ी के काल की तरह थी उचित समय पर  बिलकुल उम्मीद के मुताबिक थी|

पर अफसोस की बात है कि बहुत से भारतीय कश्मीरी मुसलमानों और अन्य जगहों पर मुस्लिमों के योगदान को यकीन नहीं करते हैं और उन्हें समझते नही है कि भारत को युद्ध में जिताने में उन्होंने अहम भूमिका निभायी है|   इसी तरह, अगर जरूरत पड़ी तो हिंदु भी नेपाल के खिलाफ किसी भी संघर्ष में भारत का समर्थन करेंगे हालांकि हम आशा करते है की ऐसी किसी स्थिति हमारा तात्पर्य है की युद्ध जैसी स्थिति को वहां कभी उजागर न होना पड़े| सिर्फ इसलिए कि हम पशुपतिनाथ और मुक्तिनाथ  तीर्थ यात्रा के लिए जाते है इसका मतलब यह नहीं है कि हमारी देशभक्ति को बदल दिया जाएगा।

वैसे तो मौजूदा हालत को देखते हुए ऐसी कोई स्थिति के पनपने की उम्मीद बहुत कम है क्यूंकि सऊदी एक दुश्मन नहीं बल्कि एक दोस्त है, हाँ हम सऊदी के साथ दुसरे देशों की तरह करीब नही है, लेकिन फिर भी सऊदी एक मूल्यवान सहयोगी है जो अपने प्रवासियों के माध्यम से तेल (उनकी कमाई) और बहुत सारी विदेशी मुद्रा हमारे लाभ के लिए प्रदान करते हैं| कुल द्विपक्षीय व्यापार 50 बिलियन डॉलर के करीब है और अब और बढ़ता जा रहा है|

दूसरा ये की सऊदी दुनिया भर के सभी मुसलमानों के लिए पवित्र स्थान हैं। भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है ऐसे देश के खिलाफ युद्ध होने की अनुमति नहीं देगा। हम एक नागरिक समाज के रूप में हमारे मुस्लिम आबादी के प्रति बहुत संवेदनशील हैं। हम कोशिश करेंगे ऐसे किसी भी स्थिति को उजागर न होना पड़ा।

पर हाँ एक बात साफ़ है की अगर कभी फिर भी स्थिति उजागर होती है तो भारतीय मुस्लिम भारत का ही साथ देंगे|

2K Shares
Tags

Related Articles

FOR DAILY ALERTS
 
FOR DAILY ALERTS
 
Close