राजनीति

रिलायंस समूह ने कांग्रेस प्रमुख राहुल गांधी को लगाई फटकार, कहा “काँग्रेस सरकार ने हमें दिए थे 1 लाख करोड़ रुपये के ठेके तो क्या तब काँग्रेस सरकार बेईमानों का साथ दे रही थी”?

अक्सर बहुत शोर मचाया जाता है और अफवाहें फैलाई जाती हैं कि पीएम मोदी की सरकार आम लोगों की नहीं बल्कि शीर्ष बिजनेस टायकून की सरकार है। यह अंबानी और अदानी की सरकार है। यह भी कहा जाता है कि पीएम मोदी सरकार की देखरेख में बड़े व्यापारियों और डिफॉल्टरों को ऋण पर छूट दी जाती है जबकि भारत के सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (PSB) एनपीए से जूझ रहे हैं।

कांग्रेस पार्टी और पूरे विपक्ष ने इसे लेकर हमेशा पीएम मोदी पर हमला किया है। एक साल से अधिक समय हो गया है कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी उसी झूठ को रट रहे हैं कि मोदी सरकार ने राफेल सौदे में अनिल अंबानी को 30,000 करोड़ रु दिए| इतनी बार फटकार लगने के बाद भी वह बार-बार इसे दोहरा रहें है।

हाल ही में उन्होंने फिर से “क्रोनी कैपिटलिस्ट्स” की सरकार का हवाला देकर पीएम मोदी सरकार पर हमला किया और कहा कि कांग्रेस द्वारा प्रस्तावित “न्याय” योजना के लिए पैसा “क्रोनी कैपिटलिस्ट” से आएगा। इस बार अपने बेबुनियाद आरोपों के लिए अनिल अंबानी के “रिलायंस ग्रुप” के ने उन्हें कड़ी फटकार लगाई है|

रिलायंस समूह ने कांग्रेस प्रमुख राहुल गांधी के अनिल अम्बानी जी पर “क्रोनी कैपिटलिज्म और बेईमान व्यापारी” का आरोप लगाने की कड़ी आलोचना की है, उन्होंने कहा की यूपीए की सरकार के समय उन्हें एक लाख करोड़ रूपये के कॉन्ट्रैक्ट दिए गये थे| तो फिर राहुल गाँधी के कहे अनुसार यूपीए क्रोनी कैपिटलिज्ट्स और बेईमान व्यवसायी का समर्थन कर रही थी।

“हम राहुल गांधी को याद दिलाना चाहेंगे, कि 2004 और 2014 के बीच कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के दौरान अनिल अंबानी की अगुवाई वाले रिलायंस समूह को विभिन्न प्रमुख राष्ट्र-निर्माण बुनियादी ढांचे में 1,00,000 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं के ठेके दिए गये थे।

बयान में आगे कहा गया “कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष राहुल गांधी लगातार झूठ बोल रहे है| उनके इन दावों का कोई आधार नहीं है, और न ही उनके पास कोई विश्वसनीय सबूत है।कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस अध्यक्ष के इन आधारहीन आरोपों का उन पर कोई असर नहीं होने वाला है

“हमने रिलायंस समूह में राहुल गांधी की टिप्पणियों को धैर्य और संयम के साथ अनदेखा करने के लिए चुना है। हम उनकी नवीनतम टिप्पणी को खारिज करते हैं क्योंकि चुनावी अभियान की ऊष्मा और धूल में ये उनकी एक और असत्य बात है, जिसके लिए उन्हें हाल ही में माननीय सर्वोच्च न्यायालय में अवमानना ​​कार्यवाही का सामना भी करना पड़ रहा है।


Kashish

 

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