देशभक्तिराजनीति

भारत के वो शेर जिनकी वजह से जम्मू कश्मीर में 370 को हटाना संभव हो पाया है

5 अगस्त को केंद्र सरदार द्वारा एक शानदार जीत हासिल की गई। यह वह दिन था जब जम्मू -कश्मीर के इतिहास और भूगोल दोनों को फिर से लिखा गया था।

प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए पुरे देश ने खूब बधाई दी और इस कार्य को जिसे सब असंभव कहते थे उसे संभव करने के लिए धन्यवाद दिया|

1947 के बाद से अब तक भारत के लिए ये सबसे बड़ा क्षण है| और इस क्षण को वास्तविक बनाने के लिए न जाने कितनी कुर्बानियां देनी पड़ी है| हर मासूम जो मारा गया,हर सैनिक जो शहीद हुआ,हर वो जवान जिसका अपमान किया गया,हर वो विधवा जिसने आंसू बहाए,और हर वो घर जिसमें बेटा आज सिर्फ एक तस्वीर के रूप में है उन सब के साथ इस ऐतिहासिक निर्णय से न्याय हुआ है

ऐसे कई अन्य नेता भी हैं जिन्हें इस समय याद किया जाना चाहिए और उन्हें सम्मान दिया जाना चाहिए। उनमें से कुछ ने जम्मू कश्मीर पर इस अभिशाप को खत्म करने के लिए अपना जीवन लगा दिया।

बी आर अम्बेडकर :

धारा 370 जो जम्मू और कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा देती है, उसका हमारे “संविधान शिल्पी” द्वारा  कड़ा विरोध किया गया। जब पंडित नेहरू ने अनुच्छेद 370 का मसौदा तैयार करने के लिए डॉ। अम्बेडकर से संपर्क किया, तो उन्होंने ऐसे कृत्य की निंदा की जो भारत की एकजुटता पर सवाल उठाता है।

सोचिये अगर उस समय डॉ। अंबेडकर ने संविधान में अनुच्छेद 370 को शामिल करने पर सहमति जताई  होती तो आज क्या होता? न केवल ‘अस्थायी’ मसौदा एक स्थायी स्थिति बन जाता बल्कि उसे हटाना न मुमकिन बन जाता| इसलिए हमें डॉ अंबेडकर जी का आभारी होना चाहिए।

श्री श्याम प्रसाद मुखर्जी

“जहां हुए बलिदान मुखर्जी

वह कश्मीर हमारा है ”

डॉ श्याम प्रसाद मुखर्जी ने नेहरू सरकार की नीतियों का विरोध किया और पूर्वी बंगाल में हिंदू पर हो रहे अत्याचारों का विरोध किया।

1953 में, भारत की संप्रभुता को बचाने के लिए एक विरोध प्रदर्शन के दौरान, सरकार ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया, उन्हें इस तरह की क्रूर यातना दी गई कि 23 जून 1953 को उनकी जेल में ही मृत्यु हो गई।

उन्होंने कश्मीर की खातिर बलिदान दिया। उनका ‘बालिदान’ वह चिंगारी थी जिसने राष्ट्रवाद की आग को और भड़का दिया था। यह जीत उन्हें समर्पित होनी चाहिए।

अटल जी और आडवाणी जी

धारा 370 लागू करना एक राजनीतिक मकसद से चलाया गया था और ये दोनों नेता इस साजिश के बारे में अच्छी तरह से जानते थे।

पूरे भारत में कांग्रेस पार्टी की पकड़ थी, पर इन दोनों नेताओं ने कांग्रेस के विशाल राजवंश के खिलाफ खड़े होने के लिए अपने खून पसीने से भाजपा को सींच कर कांग्रेस के विरुद्ध खड़ा किया|

वे अनुच्छेद 370 को हटाने के लिए दृढ़ थे पर गठबंधन सरकार के चलते और राज्य सभा में भी पुर्ण बहुमत न होने के कारण वे ऐसा न कर पाए  लेकिन इन दोनों नेताओं ने हमारे सशस्त्र बलों को पूरा समर्थन दिया और आज मोदी जी और अमित शाह जी ने इन दोनों  गुरुओं के आधार पर दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी का निर्माण किया है।

अजीत डोभाल

इनके बारे में तो क्या कहें, भारत के जेम्स बांड हैं ये तो! मोदी जी के प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद से वह ‘राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार’ हैं। उसके पास कश्मीर के हालात का एक एक पल का ब्योरा था। मोदी सरकार 2.0 में इन्हें कैबिनेट स्तर पर पदोन्नत किया गया था

जिस तरह से यह पूरी घटना घाटी में बिना किसी गड़बड़ी, कानून- व्यवस्था नियंत्रण के अंतर्गत पूरी हो सकी उनका श्रेय इन्हें ही जाता है। सर्जिकल स्ट्राइक की उनकी योजना ने पकिस्तान को इस तरह हिला दिया कि पकिशन कुछ भी करने से पहले लाख बार सोचेगा|

श्री अमित शाह

‘आधुनिक चाणक्य’ कहे जाने वाले अमित शाह जी ने गृह मंत्री का पद संभालने के तुरंत बाद कश्मीर का मामला उठाया। धारा 370 का उन्मूलन आज तक भाजपा के हर घोषणापत्र में था। लेकिन अमित शाह को पता था कि कब इसे अमली जामा पहनाना है। उन्होंने घाटी को नियंत्रण में लाया, पीडीपी के साथ गठबंधन तोड़ा, और जब लोहा गर्म था, तो उन्होंने राष्ट्रपति के आदेश को तस्वीर में लाकर वार कर दिया|यह कदम भी सर्जिकल स्ट्राइक से कम नहीं है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी

1992 का वक़्त था, घाटी जल रही थी। पर फिर भी मोदी जी ने आतंकवादियों की धमकियों की बिना परवाह करते हुए लाल चौक में हमारा ‘तिरंगा’ फहराया। एक कार्यकर्ता के तौर पे, उन्होंने धारा 370 का विरोध किया और एक प्रधान मंत्री के रूप में, उन्होंने इसका हल कर दिया

प्रधानमंत्री मोदी की सोच दूरदर्शी हैं। वह जानते है कि राष्ट्रीय अखंडता के पक्ष में कार्रवाई कब और कैसे करनी है।

जिस तरह से उन्होंने उरी और पुलवामा हमले के बाद सशस्त्र बलों को खुला हाथ दिया और सर्जिकल स्ट्राइक की करवाई की यह राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है|

प्रधान मंत्री के रूप में अपने पहले कार्यकाल में, मोदीजी ने विधेयक को पेश करने की कोशिश नहीं की, क्योंकि सरकार के पास राज्यसभा में बहुमत नहीं था। हमारा विपक्ष, जरुर इस बिल को पास नहीं होने देता|

इसलिए, मोदीजी ने सही समय का इंतजार किया। उन्होंने अलगाववादियों को दी गई सुरक्षा को छीन लिया और उनकी संपत्तियों को जब्त कर लिया गया। घाटी को नियंत्रण में लाया गया। जैसे ही उन्होंने अपनी दूसरी पारी शुरू की, उन्होंने इतिहास रच दिया।

ध्यान देने वाली बात यह है कि राम मंदिर के मामले में भी इसी तरह की कार्रवाई होने की संभावना है। शिया मुसलमानों ने पहले ही अपना समर्थन दे दिया है, और उच्चतम न्यायालय इस मामले की सुनवाई अब दैनिक आधार पर करेगा। बीएस कुछ समय की बात है |मंदिर वहीं बनेगा

और हाँ, हम जनता को कैसे भूल सकते हैं, उनका भी इस निर्णय में उतना ही सहयोग है|लोगों ने प्रधान मंत्री मोदी के लिए वोट किया|अपने निर्वाचन क्षेत्र के उम्मीदवार से नाखुश होने के बाद भी, भारत के लोगों ने उन्हें वोट दिया। शराब या पैसा लोगों के वोट को नहीं खरीद सका। इसने एनडीए को 300 से अधिक सीटों के साथ पूर्ण बहुमत से शक्तिशाली जनादेश दिया। इसलिए हम भी इस इतिहास को रचने में भागीदार है।

एक बात सुनिश्चित है, मां भारती अपनी समृद्धि को फिर से हासिल करेगी, उनके बेटे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसे सुनिश्चित करेंगे। भारत विश्व गुरु बनने की ओर कदम बढ़ा रहा है। आइए, इन नेताओं के समर्थन में हम भी इनके साथ कदम से कदम मिलाकर चलें

वन्दे मातरम्


Kashish

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