संस्कृति

भारत के दस लुप्त खज़ाने जिसकी खॊज आज तक कॊई नहीं कर पाया।

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भारत सनातन काल से ही सोने की चिड़िया रही है। सॊना ,चांदी, हीरे ,मोती-जवाहरातों से लदे हुई अनगिनत खज़ाने आज भी भारत में कहीं छुपे हुए है। देश की आधे से ज्यादा संपत्ती तो मुघलॊं और अंग्रेज़ों ने लूटा था। उसके बावजूद भी भारत में ऐसे कई खज़ाने के लुप्त हॊने का आशंका है जो की बेशकीमती है।

दसवें नंबर पर है कोल्लुरु मूकांबिका मंदिर: कर्नाटक के उडुपी जिले में स्थित यह मंदिर बहुत ही प्रसिद्ध है। पश्चिमी घाट में स्थित इस मंदिर का वार्शिक आय है 17 करोड़ रूपए और वार्शिक व्यय 35 करोड़ रूपए हैं। यहाँ के पुजारी जी का मानना है की जो नाग का चिन्ह है वह छुपे हुए खज़ाने की ऒर इशारा कर रहा है जो मंदिर के नीचे छुपा हुआ है। नाग का चिन्ह हॊने का अर्थ है की वह खजाने की रखवाली कर रहा है। माँ का मुख जो की संपूर्ण स्वर्ण से बनाया गया है उसे विजयनगर साम्राज्य ने देवि को अर्पण किया था।

नंबर नौ पर है आंध्र प्रदेश की कृष्णा नदी का खज़ाना। कृष्णा नदी विश्व प्रसिद्ध हीरॊं के लिए जाना जाता है। भारत का बेशकीमती कोहीनूर हीरा यहीं से पाया गया था। गोल्कोंडा सामराज्य इसी नदी के समीप स्थित था। माना जाता है की आज भी इस नदी तल में अनगिनत और बेशकीमती हीरे छुपे हुए हैं। लेकिन आज तक कॊई उसे डूंढ़ने का साहस नहीं करपाया।

आठवे नंबर पर है हैदराबाद का चारमिनार सुरंग। यह सुरंग चारमिनार को गोल्कोंडा से जोड़ता है। सुल्तान मुहम्मद क्वाली कुतुब शाह ने यह सुरंग बनावाया था। माना जाता है की इस सुरंग में बेशुमार खजाने छुपाए गये हैं यह सुरंग आपात्कालीन परिस्थिती में राज परिवार के सुरक्षित प्रस्थान के लिए बनाया गया था। 1936 मे निज़ाम ओस्मान अली ने इस सुरंग का सर्वॆ करवाया था लेकिन उसके बाद कॊई प्रगती नहीं दिखाई दी है। अनुमान है की सुरंग के कक्षों मे खज़ाने छुपाए गये हैं।

बहु चर्चित खज़ाना है नादिर शाह का जो सात्वें नंबर पर आता है। 1739 में पर्शियन आक्रमणकार नादिर शह ने भारत पर आक्रमण किया और लूट पाट मचाया। उसके सैन्य में पचास हज़ार सैनिक थे जिन्होंने दिल्ली के तीस हज़ार लॊगॊं का नरसंहार किया था। उसके द्वारा की गयी लूट इतनी ज्यादा थी की उसका अराबा पूरे 150 मील लंबा था और सॊने जवाहरों से लदा हुआ था। कुछ लोगों का मानना है की नादिर शाह को बीच रस्तें मे ही मार दिया गया था। लेकिन इतिहासकार बताते हैं की उसका हत्यारा अहमद शाह ने नादिर शाह को उसके म्रुत्यू से पहले खज़ाने के एक बड़े हिस्से को हिन्दु कुश पहाड़ों के सुरंग में छुपाने को मना लिया था। हिन्दु कुश आज का कंदहार है जहां पर खज़ाना छुपाया गया है।

छठे नंबर पर है सॊनभद्र की गुफा जो की बिहार राज्य में है। सॊनभद्र की गुफाओं को एक बड़े चट्टान को खॊखला कर बनाया गया है। इस गुफा में मिले शिलालेखों से यह पता चलता है की यह गुफा करीब 2-3 AD में बनाया गया था। ये शिलालेख शंकलिपी में लिखे गये हैं और जानकार मानते हैं की इन लिपियों में खज़ाने का राज़ छुपा है। यह खज़ाना राजा बिंबसार का है। इस गुफा के प्रवेश द्वार जो पश्चिम की ऒर है उसे अंग्रेज़ॊं ने तॊपॊं से उड़ाने की कोशिश की थी लेकिन वे असफल हुए थे। आज भी तोपों के निशान प्रवेश द्वार पर देखी जा सकती है।

पांचवे नंबर पर है हैदराबाद के सुल्तान मीर उस्मान अली का खज़ाना। उस्मान अली हैदराबाद के आखरी सुल्तान थे और उनका राज्य इंग्लेंड जितना बड़ा था। 2008 में फोर्ब्स मेगज़ीन ने सार्वकालिक आगर्भ श्रीमंत व्यक्ति के सूची में उस्मान अली को 5 वा स्थान दिया था। खज़ाने की कीमत कुल 210.8 बिलियन अमरीकी डॉलर है। जब उस्मान अली ने सत्ता संभाली तो उनके राज्य का खज़ाना खाली हो चुका था। लेकिन अपने 37 साल के राज काज में उन्होनें अपने खज़ाने को पुनः भर दिया था। माना जाता है की वह खज़ाना आज भी उनके किंग कॊठी पेलेस के नीचे छुपा हुआ है।

चौथे नंबर पर है अलवर राजस्थान में छुपायी गये मुघलों के काल के खज़ाने। राजस्थान का अलवार जिला दिल्ली से 150 किलोमीटर की दूरी पर है। मुघल बाद्शाह जहांगीर को जब देश से निकाला गया था तब वह यहीं पर छुपा था और यहां से भागते वक्त अपने खज़ाने को उसने यहीं पर छुपाया था। लोग कहते हैं की अलवर के किले में अब भी वे खज़ाने छुपे हुए हैं। मुघलों के उत्थान से पहले से ही अलवर का साम्राज्य अत्यंत समुद्ध था। उनके खज़ाने में एमराल्ड से बनाई गयी एक चाय का प्याला हुआ करता था। आकलन कीजिए की वह साम्राज्य कितना समृद्ध था।

जयगड़ के राजा मानसिंग का खज़ाना तीसरे नंबर पर है। अकबर के नव रत्नों में से एक, राजा मान सिंग जयपुर के राजा थे। जानकार मानते हैं 1580 में अफघन पर विजय प्राप्त कर उन्होंने वहां से जो कुछ भी लूट लिया था उसे अकबर को नहीं दिया था और जयगड़  के अपने किले में छुपा दिया था। इंदिरागांधी ने आपातकाल के समय में जयगड़  के किले में शोध करवाया था। 6 माह के शोध के बाद लोगों को यह बताया गया था की वहाँ पर कॊई खज़ाना नहीं मिला।संसद में इस विषय पर जमकर हंगामा हुआ था और इंदिराजी पर यह आरॊप लगाया था की किले से लुटे गये खज़ाने को ट्रकों में भरकर प्रधानमंत्री के आवास स्थल पर ले जाया गया था। क्योंकि किले से दिल्ली आनेवाली राज मार्ग को जनता के आवागमन के लिए बंद करवाया गया था तांकि खज़ाने से लदे ट्रक बिना किसी रुकावट के प्रस्थान कर सके।

भारत के लुप्त खज़ाने की सूची में दूसरे नंबर पर है ग्रॊस्वेनर जहाज का मल्बा जो की दक्षिण आफ्रीका के समीप डूब गया था। ग्रॊस्वेनर जहाज अंग्रेजों का सबसे बड़ा और सबसे अमीर जहाज था जो की समुंदर में खॊ गया था। 1782 में यह जहाज मद्रास से लंदन के लिए सिलॊन होते हुए निकल पड़ा था। चार अगस्त को यह जहाज दक्षिण अफ्रीका के केप टाऊन में एक चट्टान से टकरा गया और डूब गया। पूरा जहाज सॊने के सिक्के, चांदी, अनगिनत हीरे जवाहरातों से लदा हुआ था। जहाज के साथ साथ खज़ाना भी डूब गया था। खॊज करने पर एक छोटा सा हिस्सा ही मिल पाया। बाकी खज़ाने को अब तक कॊई खोज नहीं पाया।

पहले नंबर पर आता है केरल का पद्मनाभ स्वामी मंदिर का खज़ाना। श्री पद्मनाभ स्वामी मंदिर एक दम से अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में आ गया जब मंदिर के भूमीगत गुंबदों में बेशुमार खज़ाने का उजागर हुआ था। अंदर के खज़ाने को देख कर अधिकारियों के हॊश ही उड़ गये थे। पूरा विश्व अचंबित हो गया था मंदिर के खज़ाने को देख कर।अब तक खोले गये गुंबदों की खज़ाने की कीमत 22 बिलियन है। कक्ष B को अब तक खॊला नहीं गया है। सर्वॊच्छ न्यायालय का आदेश है की पहले दूसरे कक्षों के संपत्ति का आकलन संपूर्ण हो जाए उसके बाद ही B कक्ष को खोला जाएगा। ऐसा मानना है की B कक्ष की रखवाली एक भयंकर सर्प कर रहा है और कक्ष को खोला गया तो देश पर विपदा आ सकता है। कुछ लोग कहते हैं की कक्ष A से भी अधिक संपत्ती कक्ष B में हो सकती है।

झूठ नहीं है की हमारे पूर्वज भारत को सॊने की चिड़िया कहते थे। भारत में ऐसे कई लुप्त खज़ाने और भी हो सकते है जिसका हमें अंदाज़ा ही न हो। हो सकता है यह खज़ाने कभी न कभी हमें मिल जाए या फिर ऐसा भी हो सकता है की वे खज़ाने हमारे समक्ष कभी न आए क्यों की लुप्त रहना ही उनके भाग्य में लिखा हुआ हो…

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