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स्तंभेश्वर महादेव मंदिर, दुनिया का एकमात्र ऐसा मंदिर जहां भगवान शिव आपके साथ छुपन छुपाई खेलते हैं

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भारतीय संस्कृति में अनेकों ऐसे पहलु है जिनका रहस्य आज तक कोई नही समझ पाया है|यहाँ तक की कुछ चमत्कारों से वैज्ञानिक भी इतने हैरान है कि वो भी उनका तोड़ नही निकाल पाए|हिन्दुत्व और हिन्दू मंदिरों से जुड़े ऐसे अनेकों किस्से है|

ऐसा ही है एक किस्सा है भारत में एक असामान्य भगवान शिव के मंदिर का – स्तंभेश्वर महादेव मंदिर का| एकमात्र ऐसा मंदिर जहां भगवान शिव आपके साथ छुपन छुपाई खेलते हैं ।

इस मंदिर को  “सबमर्जिंग मंदिर” के रूप में भी जाना जाता है|गुजरात के भरुच जिले की जम्बूसर तहसील में एक गाँव है कावी में स्थित, यह 150 वर्षीय पुराना शिव मंदिर एक तरफ अरब सागर और दूसरी तरफ खम्भात की खाड़ी से घिरा हुआ है।

ऐसा माना जाता है कि इस अलौकिक मंदिर में शिवशंभु का जलाभिषेक करने खुद दरिया आता है|ज्वार के समय समुद्र का पानी मंदिर के अंदर आता है और शिवलिंग का अभिषेक दो बार कर वापस लौट जाता है। लोगों का मानना है कि स्तंभेश्वर मंदिर में स्वयं शिवशंभु विराजे हैं, इसलिए समुद्र देवता खुद उनका जलाभिषेक करते हैं। ज्वार के समय शिवलिंग पूरी तरह से जलमग्न हो जाता है। मंदिर से जुड़े लोगों का कहना है कि यह प्रक्रिया सदियों से सतत चल रही है और उन्होंने इस नियम को टूटते कभी नहीं देखा है।

स्कंद पुराण में कुमारिका खण्ड के अनुसार

शिवशंभु के पुत्र कार्तिकेय स्वामी छह दिन की आयु में ही देवसेना के सेनापति नियुक्त कर दिए गए थे। इस समय ताड़कासुर नामक दानव ने देवसेना को आतंकित कर रखा था। देव-ऋषि-मुनि, आमजन सभी बेहद परेशान थे। कार्तिकेय स्वामी ने अपने बाहुबल से ताड़कासुर का वध कर दिया। वध के उपरांत कार्तिकेय स्वामी को ज्ञात हुआ कि ताड़कासुर भोलेनाथ का परम भक्त था। यह जानने के बाद व्यथित कार्तिकेय स्वामी को प्रभु विष्णु ने कहा कि आप वधस्थल पर शिवालय बनवाएँ। इससे आपका मन शांत होगा। कार्तिकेय स्वामी ने ऐसा ही किया।

समस्त देवगणों ने एकत्र होकर महिसागर संगम तीर्थ पर विश्वनंदक स्तंभ की स्थापना की। पश्चिम भाग में स्थापित स्तंभ में भगवान शंकर स्वयं विराजमान हुए। तब से ही इस तीर्थ को स्तंभेश्वर कहते हैं। यहाँ पर महिसागर नदी का सागर से संगम होता है।

इस मंदिर में अनूठा ये भी है कि ज्वार के वक्त मंदिर पूरी तरह से समुद्र में डूब जाता है और जब ज्वार कम हो जाता है तो धीरे धीरे समुद्र से शिवलिंग बाहर निकलने लगता है| इस वजह से इसे ‘महादेव का गायब होने वाला  मंदिर’ भी कहा जाता है।

ऐसा कहा जाता है कि समुद्र की गहराई में मंदिर का डूबना और उभारना  पुनरुत्थान भक्तों के दिमाग में सकारात्मक ऊर्जा को पुनर्स्थापित करता है। किनारे पर दुर्घटनाग्रस्त लहरों की आवाज सद्भाव की भावना पैदा करती है और प्रकृति और भगवान शिव के करीब होने का एहसास दिलाती है।

हम सब को शिव के इस चमत्कारी मंदिर की यात्रा अवश्य करनी चाहिए और यहाँ हो रहे नजारों का सुखद अनुभव लेना चाहिए| शिव की महिमा अपरम्पार है|

 

 

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