आध्यात्मिकसंस्कृति

श्री श्री श्री शिवाकुमार स्वामीजी, महंत जो आध्यात्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक क्रांति के अग्रणी प्रकाश थे

‘नादेदादुवा देवारू’ या ‘वॉकिंग गॉड’, शिवाकुमार स्वामी, कर्नाटक के तुमकुरु में सिद्धगंगा मठ के मुखिया आज हमारे जीवन में एक ऐसा खालीपन कर गये जो कभी नहीं भरा जा सकता। स्वामीजी पूर्णावत का अवतार थे और भारत के सबसे महान शिव ज्ञानियों में से एक थे। वह आध्यात्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक क्रांति के अग्रणी प्रकाश थे|

1 अप्रैल, 1907 को कर्नाटक के वर्तमान रामनगर जिले में मगदी में जन्मे, शिवाकुमार स्वामी जी ने 1930 में लिंगायत महंत बने और 1941 में उन्होंने मठ की जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने 76 वर्षों तपस्या की।

लगभग 50 साल पहले, उन्होंने मठ में गरीब बच्चों के लिए एक मुफ्त बोर्डिंग स्कूल खोला था। गुरुकुल, जैसा कि ज्ञात था, 5-15 आयु वर्ग के 9,000 से अधिक बच्चों का घर हैं और वे छात्रों को जाति, पंथ और धर्म के बावजूद स्वीकार करते हैं। मठ मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेज भी चलाता है।

स्वामीजी सिद्दागंगा एजुकेशनल सोसायटी का नेतृत्व करते था, जो राज्य में इंजीनियरिंग से लेकर बिजनेस स्कूलों / कॉलेजों तक लगभग 125 शैक्षणिक संस्थानों को चलाता है। एजुकेशनल सोसायटी लगभग 20 संस्थाएँ और चलाती है जहाँ संस्कृत भाषा और वेदों को पढ़ाया जाता है, और छात्रों को मुफ्त आवास दिए जाते हैं।

स्वामी जी के मानवतावादी कार्य के लिए 2006 में भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने उनके लिए प्रशंसा अर्जित की थी जब वह महंत के 100 वें जन्मदिन के उत्सव के दौरान 2006 में तुमकुरु आए थे।

स्वामीजी 1965 में कर्नाटक विश्वविद्यालय से साहित्य के डॉक्टरेट के प्राप्तकर्ता थे, उन्हें 2007 में कर्नाटक रत्न – राज्य के सर्वोच्च नागरिक सम्मान और 2015 में केंद्र सरकार द्वारा पद्म भूषण से नवाज़ा गया था। कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने हाल ही में केंद्र सरकार से स्वामी जी को भारत रत्न से सम्मानित करने का प्रस्ताव रखा है।

स्वामीजी के सैकड़ों अनुयायी प्रतिदिन उनके पास आते थे। राष्ट्र भर के राजनीतिक नेता स्वामीजी के अनुयायी हैं और अक्सर कर्नाटक के दौरे पर उनकी यात्रा को प्राथमिकता देते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी सहित लगभग सभी राजनीतिक हस्तियों ने इस साल के शुरू में कर्नाटक चुनावों की अगुवाई में शिवाकुमार स्वामी जी का दौरा कर उनसे आशीर्वाद प्राप्त किया था।

स्वामीजी ने अपना पूरा जीवन लोगों को समर्पित किया है। वह अपने अंतिम समय तक सिद्धगंगा मठ के अंदर ‘हले माता’ या पुराने मठ में भक्तों से मिलते रहें है। स्वामीजी का निधन राष्ट्र के लिए बहुत बड़ी क्षति है।

ॐ शांति

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