राजनीति

साउदी में ‘पैंगबर’ से जुड़ीं सभी ‘निशानियों’ के ऊपर बुल्डॊज़र चला दिया गया है लेकिन मुसल्मान चूँ तक नहीं कर रहे हैं।

इस्लाम को खतरा सिर्फ़ भारत में ही क्यों नज़र आता है?

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राम की भूमी में ‘बाब्री की इमारत’ क्या गिरादी सारी दुनिया के मुसल्मान छाती पीठने लगे। देश की धर्मनिरपेक्षता और इस्लाम खतरे में आ गया। दंगे भड़क गये और कई जानें भी चली गयीं। लेकिन क्या अपको पता है कि पैंगबर की भूमी में उनके घर पर ही बुल्डॊज़र चलाये जाने की बात की गयी है और किसी भी देश के मुसल्मानों ने चूँ तक नहीं की है!! बस इनकी कट्टरपन्ती भारत में चलती है। इनके ‘अपने ही देशों’ में इनकी एक मनमानी नहीं चलती। वहां इनकी औकात दो कौड़ी की नहीं है लेकिन भारत में राजनेताओं के ‘कृपा’ से इनकी शानो शौकत और मनमानी चलती है।

साऊदी में तो सिर्फ़ सुल्तान की ही चलती है। बादशाह सलमान बिन अब्दुल अजीज ने साऊदी में कई ऐतिहासिक जगहों पर बुल्डॊज़र चलवाया हैं जो पैगम्बर मुहम्मद की जीवन काल से जुड़ी हुई थी। साऊदी में जहां पैगम्बर की शुरूआती साथियों की कब्रें थीं उसे भी तोड़ दिया गया है। कई ऐतिहासिक मस्जिदें जिन्हें मुसल्मान पवित्र मानते थे वहां अब बिजनेस सेंटर या शाही परिवार का महल नजर आता है। और तो और इन प्राचीन इमारतों को तोड़ कर भव्य पार्किंग लोट भी बना दी गई है। और एक हमारा भारत है जहां मंदिरों के ऊपर इस्लामी आतंकियों की कब्र और मस्जिदें बनाई जाती हैं और अकल के अंधे हिन्दू उसी पर माथा टेक कर आते हैं।

भारत में मस्जिदों या कब्र पर खरॊंच भी आती है तो दुनिया भर के मुसल्मान गला फाड़ने लगते हैं। भारत जैसे धर्मनिरपेक्ष देश में ‘इस्लाम’ खतरे में आ जाता है। राजनेताओं का वॊट बैंक डगमगाने लगता है। और उधर चीन और साउदी में मस्जिद तोड़कर पार्किंग के लिए जगह बनाया जाता है, फिर भी दुनिया का एक भी मुसल्मान आवाज़ तक नहीं उठाता। अजी वह भारत थोड़ा है जहां पर आप जो मरज़ी बकते रहेंगे और सरकार कान बंद कर के बैठी रहेंगी।

साऊदी में पैगम्बर की पहली बेगम खदीजा का घर भी तोड़ दिया गया है जहां सार्वजनिक पुस्तकालय बनाया गया है। इस्लाम के पहले खलीफा अबू बकर का घर तोड़ कर वहां आज होटल हिलटन बनाया गया है। जिस ऊंची पहाड़ी की चोटी “फारान” से हजरत मोहम्मद साहब ने अपने पैगम्बर होने की घोषणा की थी, आज वहां सऊदी शाह ने अपना आलीशान महल बनवा दिया है!! वाह रे अरब सुल्तान क्या हिम्मत है आप के अंदर। भारत में अगर ऐसा कुछ करने की सॊच भी लें, तो दंगे भड़क जायेंगे। यहां पर मंदिरों को तो एक झटके में तोड़ा जा सकता है लेकिन मजाल है कि कोई इस्लामी आतंकियों की कब्र को हाथ भी लगाये।

पिछले चार साल में महमद पैगम्बर की अपनी ही भूमी में उनसे ही जुड़ी सारी ऐतिहासिक इमारतों को तोड़ दिया गया है। Islamic Heritage Research Foundation in London के अनुसार 1985 से लेकर अब तक साऊदी सल्तनत ने लगभग 98% ऐतिहासिक महत्व के इमारतों को तोड़ दिया है जो कभी इस्लाम के प्रवादी महम्मद से जुड़ा हुआ था। Institute for Gulf Affairs in Washington, D.C. में रहनेवाले अली अल-अहमद का कहना है कि मानो सल्तनत इतिहास से जुड़ी सारी निशानियों को मिटा देना चाहता है। भारत के दॊगले सेक्यूलरो को यह नहीं दिखता कि साउदी अपने ही पैगम्बर का निशान मिटा रहा है। तब इनको इस्लाम खतरे में नज़र नहीं आता। इस्लाम को तो केवल भारत में ही खतरा है भाई।

साऊदी की कवित्री और सामजिक कार्यकर्ता निमाह इस्माइल नवाब कहती है की सभी ऐतिहासिक इमारतों पर नीला निशान लागाया जाता है जिनपर रातॊरात बुल्डोज़र चलाया जाता है। TIME पर फॊन पे बात करते हुए उन्होंने कहा की जो इमारत रात को जगह पर मौजूद हॊती है, वह सुबह उठकर देखने पर वहां नहीं दिखाई देती है। रातोरात ऐतिहासिक स्मारकों को ध्वस्त किया जाता है। ठीक इसी प्रकार चीन में भी मुसल्मानों की कब्रॊं और मस्जिदों को धवस्त किया जाता है। इस्लाम को उसकी सही जगह बस साऊदी और चीन ही दिखा रहे हैं बाकियों में इतना दम कहां?

सुनने में तो यह भी आया है कि सुल्तनत मक्का में ‘महमद पैगम्बर के घर’ पर भी बुल्डोज़र चलवाना चाहता है!! साऊदी अरब Royal Presidency के तरफ़ से छपनेवाली जर्नल के 61 पेज की रिपॊर्ट के अनुसार यह सुझाव दिया गया था कि मदीना में स्थित पैगम्बर के कब्र को और उनके जन्म स्थान में बनी उनके घर को भी तोड़ दिया जाये तांकि मदीना आनेवाले तीर्थयात्रियों के सुविधा के लिए पार्किंग लॊट और अन्य इमारत बनावाई जाये। मव्लिद का घर जहां 570 वर्ष पूर्व मुहमद का जन्म हुआ था उसे भी तोड़  कर वहां इमारत बना दिया गया है। इतना सब कुछ हॊ रहा है साउदी में लेकिन दुनिया के किसी भी कॊने से कॊई मुसल्मान छाती नहीं पीठ रहा ना सुल्तान के खिलाफ आवाज़ उठा रहा है। दुनिया के किस मुसलमान में इतनी हिम्मत है कि वह अरब के शाह के खिलाफ आवाज उठाए? क्यों की जो अरब शाह के खिलाफ आवाज़ उठाएगा वह दोजख में जाएगा, वह तो क्या उसकी आनेवाली पीढ़ी तक का हज में जाना बंद किया जायेगा।

भारत में छॊटी छॊटी चीजों के लिए छाती कूट रुदाली विलाप करनेवाले सेक्यूलर-बुद्दिजीवी और इस्लाम के ठेकेदार इस पर क्यों मौन धारण करके बैंठे हैं? हिम्मत नहीं है क्या अरब सुल्तान के निर्णय के विरुद्द जाये? मर्दानगी और गुंडागर्दी केवल भारत में ही चलती है इन लोगों की क्योंकि साऊदी और चीन में सरकार के खिलाफ बोलेंगे तो इनकी जीभ तो क्या सर ही काट दिया जायेगा। देश में बैठकर देश का नमक खाकर ‘नमक हरामी’ करने की ‘आज़ादी’ केवल भारत में ही है दुनिया के किसी भी देश में नहीं।

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Source
Destruction of early Islamic heritage sites in Saudi ArabiaTIME
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