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मोदीनोमिक्स की बड़ी जीत! पिछले 5 वर्षों में एक ही दिन में सबसे बड़ा लाभ प्राप्त करके रूपये ने सब को किया आश्चर्यचकित

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कुछ दिन पहले कांग्रेस पार्टी और विपक्ष लगातार प्रधान मंत्री मोदी और उनकी सरकार पर रुपये के गिरते मूल्य के लिए हमला कर रहे थे| प्रधान मंत्री मोदी की छवि को खराब करने के प्रयास में कांग्रेस इतना नीचे गिर गई कि उन्होंने विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी गिरते मूल्य के मुद्दे को बार बार उठाया।

लेकिन अब जब रुपया मजबूत हो रहा है और निरंतर पुनरुत्थान दिखा रहा है तो कांग्रेस और विपक्ष के पास कहने के लिए एक शब्द भी नहीं है और वो झूठे मुद्दों पे लोगों का ध्यान भटका रहे हैं।

हाँ!! अपने बिलकुल सही पड़ा रुपये का मूल्य अब सकरात्मक दिशा की ओर बड़ रहा है।यह मजबूत हो रहा है और पिछले 5 वर्षों में एक ही दिन में सबसे बड़ा लाभ प्राप्त करके इसने सभी को आश्चर्यचकित कर दिया है।

मंगलवार को, कच्चे तेल की कीमतों के नरम होने और भारत के चालू खाता घाटे के विस्तार पर चिंताओं के कम होने के कारण भारतीय रुपया 112 पैसे की बढ़ोतरी के साथ अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 70.44 पर पहुंच गया।

निर्यातकों और बैंकों द्वारा अमेरिकी मुद्रा की निरंतर बिक्री के साथ-साथ दिसंबर में अमेरिकी फेड नीति के फैसले से पहले वैश्विक स्तर पर अपने प्रमुख प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ ग्रीनबैक की कमजोरी के कारण भी रुपये में भारी वृद्धि देखी गई।

इंटरबैंक विदेशी बाजार में, रुपये 71.34 पर एक फर्म नोट पर खोला गया और 70.44 के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया जो की 19 सितंबर, 2013 के बाद से पिछले पांच वर्षों में सबसे ज्यादा बड़त है, जब यह डॉलर के मुकाबले 161 पैसे बढ़ गया था

कुछ दिनों पहले घरेलू मुद्रा ने तीन महीने में पहली बार 70/$ अंक की बढ़ोतरी दर्ज की थी। इंटरबैंक विदेशी मुद्रा में, रुपया 70.15 पर एक उच्च नोट पर खोला गया और फिर आगे की गति इकट्ठा हुई और अंततः 69.88 के अंतर को छुआ, जो पिछले तीन महीने में पहली बार देखा गया था|

यह सब घरेलू मुद्रा को पुनर्जीवित करने के मोदी सरकार के प्रयासों के कारण है। सरकार सभी प्रमुख तेल उत्पादक देशों को डॉलर की बजाय स्थानीय मुद्राओं में व्यापार करने के लिए सहमत होने की कोशिश कर रही है जो डॉलर की तुलना में उनकी मुद्राओं की विनिमय दर को मजबूत करेगी। अब तक भारत ने स्थानीय मुद्रा में व्यापार करने के लिए जापान, रूस, संयुक्त अरब अमीरात और ईरान के साथ मुद्रा स्वैप समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह विदेशी मुद्रा भंडार पर डॉलर के प्रभाव को कम करने के लिए स्थानीय मुद्राओं में को बल देता है|

इसके साथ ही सरकार कई तेल उत्पादक देशों के साथ बार्टर एक्सचेंज व्यापार के लिए बातचीत कर रही है। बार्टर एक्सचेंज सिस्टम के तहत भारत उस देश से आयात किए जा रहे उत्पाद के बदले में विशेष आइटम निर्यात करेगा। प्रधान मंत्री मोदी सरकार भी निर्यात में वृद्धि के विकल्पों पर विचार कर रही है और रुपए को स्थिर करने के लिए टैरिफ में वृद्धि के जरिए आयात को कम कर रही है

इसके अलावा मोदी सरकार के प्रयासों के कारण हाल के महीनों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेश और विदेशी संस्थागत निवेश में भी वृद्धि हुई है और इससे देश के प्रवेश के बाद विदेशी निवेशकों से घरेलू मुद्रा की मांग के चलते रुपए के मूल्य में भी वृद्धि होगी।
बाजार अब लगातार सुधार दिखा रहा है लेकिन कांग्रेस और विपक्ष अब भी प्रधान मंत्री मोदी सरकार को अन्य चीजों पर घेरने में व्यस्त हैं और उनको ये सुधार नज़र नहीं आ रहा|

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