अर्थव्यवस्थाराजनीति

भारतीय रूपये के सामने डॉलर हुआ कमज़ोर! मोदी सरकार के तहत सिर्फ एक महीने में रुपये ने दिखाई शानदार बड़त

2K Shares

कुछ दिन पहले कांग्रेस पार्टी और विपक्ष लगातार प्रधान मंत्री मोदी और उनकी सरकार पर रुपये के गिरते मूल्य के लिए हमला कर रहे थे| प्रधान मंत्री मोदी की छवि को खराब करने के प्रयास में कांग्रेस इतना नीचे गिर गई कि उन्होंने विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी गिरते मूल्य के मुद्दे को बार बार उठाया।

लेकिन अब जब रुपया मजबूत हो रहा है और निरंतर पुनरुत्थान दिखा रहा है तो कांग्रेस और विपक्षी अपने घरों में छिप कर बैठ गये है और उनके पास कहने के लिए एक शब्द भी नहीं है। हाँ!! बिलकुल सही रुपये का मूल्य अब सकरात्मक दिशा की और बड़ रहा है। यह तीन महीने में पहली बार 70 के नीचे पहुंच गया है|

शुरुआती कारोबार में डॉलर के मुकाबले रुपया 50 पैसे की तेजी के साथ 70 के नीचे पहुंचा गया|गुरुवार को एक अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 51 पैसे की शानदार बढ़त के साथ 70.11 के स्तर पर खुला है जो 28 अगस्त के बाद सबसे ज्यादा उच्चतम स्तर है| वहीं, कारोबार के शुरुआती आधे घंटे में ही रुपया 70 प्रति डॉलर के स्तर के नीचे आ गया. रुपया फिलहाल 69.98 प्रति डॉलर के स्तर पर है.
डॉलर के मूल्य में गिरावट और रुपया के मूल्य में वृद्धि अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष जेरोम पॉवेल की टिप्पणी कि “केंद्रीय बैंक की बेंचमार्क ब्याज दर तटस्थ स्तर के करीब होने की संभावना है” के बाद आया।

रुपया को मजबूत करने में मजबूत विदेशी फंड प्रवाह ने भी योगदान दिया गया। विदेशी संस्थागत निवेशकों ने इस महीने भारतीय बाजार में अक्टूबर में 38,906 करोड़ रुपये की निकासी की तुलना में 9,080 करोड़ रुपये डाले हैं जिससे घरेलू मुद्रा में मजबूती आई है। भारतीय बाजार में धन की मुद्रास्फीति रुपये के मूल्य में वृद्धि का कारण बनती है क्योंकि देश में प्रवेश करने के बाद विदेशी निवेशकों द्वारा घरेलू मुद्रा की मांग अधिक की जाती है।

कच्चे तेल की कीमतों में कमी के कारण भी रुपये के मूल्य में पुनरुत्थान करने में मदद मिली है। भारत कच्चे तेल की जरूरतों का 81 प्रतिशत आयात करता है और अमेरिका और चीन के बाद तेल का तीसरा सबसे बड़ा आयातक है। चूंकि कच्चे तेल की कीमतों का डॉलर में भुगतान किया जाता है, इसलिए कच्चे तेल के कम दर के दौरान रूपये को डॉलर में कम मात्रा में परिवर्तित करना पड़ता है जिससे अमेरिकी मुद्रा कमजोर होती है। घरेलू इक्विटी बाजार में मार्ट रिकवरी ने भी रुपये को मजबूत करने में योगदान दिया है|

यहां तक कि मनी मार्केट में भी, बुधवार को तेल की कीमतों में निरंतर गिरावट और केंद्रीय बैंक से समर्थन खरीदने के कारण सरकारी बॉन्ड तेजी से बढ़े है। कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट से रुपया को मजबूत करने के साथ-साथ भारत के चालू और राजकोषीय घाटे पर हो रही चिंता भी कम होगी|

इस महीने अब तक रुपये के मूल्य में 5 फीसदी से ज्यादा की बड़त हुई है। बुधवार को घरेलू मुद्रा 17 पैसे बढ़कर 70.62 हो गई थी।
कांग्रेस और विपक्ष बहुत अच्छी तरह से जानते हैं कि रुपया का मूल्य इतने सारे कारकों पर निर्भर करता है लेकिन फिर भी वे मोदी सरकार पर हमला करते हैं और उन्हें मूल्य में गिरावट के लिए दोषी ठहराते हैं।


Source: Business Today

2K Shares
Tags

Related Articles

FOR DAILY ALERTS
 
FOR DAILY ALERTS
 
Close