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पुरुषों के बगल में खड़ा रहना ही महिला सशक्तीकरण नहीं है; राष्ट्र सेविका समिति से सीखिए क्या है महिला सशक्तीकरण

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कुछ लोग पैदाइशी पप्पू होते हैं उनकी बुद्दी घुटनों के नीचे हॊती है और हमेशा अपने संस्कार के अनुरूप ही ऒछी बात करते रहते हैं। जो खुद महिलाओं का बलात्कार करते हैं वे ही महिला सुरक्षा के बारे में ज्ञान बांटते रहते हैं। एक व्यक्ति के इर्द-गिर्द खड़ा रह कर उसका बुढ़ापे का ‘सहारा’ बनने को ही कुछ लॊग महिला सशक्तीकरण कहते हैं! इसी से अंदाज़ा लगाया जा सकता है की उनकी बुद्दीमत्ता कितनी है और उनके संस्कार कैसे हैं।

दुनिया का सबसे बड़ा और श्रेष्ठ संगठन है आरएसएस। आरएसएस के देश प्रेम की मिसाल दुनिया भर में मशहूर है। महिलाओं का सम्मान और सशक्तीकरण के लिए आरएसएस जितना काम करता है उतना तो देश का महिला अयॊग भी नहीं करता होगा। महिला सशक्तीकरण का अर्थ यह नहीं है की आप संगठन के प्रमुख के इर्द गिर्द बाहों में बाहें डालकर खड़े रह कर फॊटॊ खिंचवाए। यह आरएसएस की संस्कृती नहीं है। हाँ ये बात सच है कि यह कांग्रेस के  ‘पितामह’ और चच्चा जी की संस्कृती थी जिसकी आरएसएस को आवश्यकता नहीं है और ना ही देश की महिलाओं को है।

राष्ट्र सेविका समिति, भारत के सारे देश प्रेमी स्त्रियों का संगठन है जो राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के ही दर्शन के अनुरूप कार्य करती है। हालांकि यह राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की महिला शाखा नहीं है लेकिन यह संगठन हू ब हू आरएसएस जैसे ही सामाज सेवा करती है । इसकी स्थापना 1936 में विजयादशमी के दिन वर्धा में हुई थी। श्रीमती लक्ष्मीबाई केळकर (मौसीजी) इसकी प्रथम प्रमुख संचालिका थीं। विद्यमान प्रमुख संचालिका शांता कुमारी (उपाख्य ‘शान्तक्का’) हैं और प्रमुख कार्यवाहिका सीता अन्नदनम हैं।

लक्ष्मीबाई केळकर जी राष्ट्र सेविका समिति को प्रारंभ करने से पहले डॉ के.बी. हेडगेवार जी से मिलीं और उनसे आग्रह किया कि वे महिलाओं को संघ में स्थान दें। हेगडवार जी ने उन्हें एक अलग संगठन बनाने का निर्देश दिया जो कि संघ के ध्येय -उद्देश्य के अनुसार ही काम करता हो। उन्होंने मौसीजी को आश्वस्थ किया की वे समिति को पूर्ण रूप से सहाकार देंगे। महिलाओं को सशक्त बनाने के उद्देश्य से ही समिति का गठन हुआ जिसे हेगडेवार जी का संपूर्ण सहकार भी मिला।

समिति अपने सदस्यों को तीन आदर्शों को सिखाती है:

मात्रुत्व (सार्वभौमिक मातृत्व)
कृत्रुवा (दक्षता और सामाजिक सक्रियतावाद)
नेत्रुत्व (नेतृत्व)

राष्ट्रसेविका समिति का ध्येयसूत्र है – ‘स्त्री राष्ट्र की आधारशीला है’। संगठन का मानना ​​है कि ‘सभी महिलाओं में अपने समुदाय में सकारात्मक बदलाव लाने की पूर्ण क्षमता है’।

समिति की कार्यप्रणाली है:

  • दैनंदिन तथा साप्ताहिक शाखाएँ लगाना। वहां पर सेविकाओं को शारीरिक शिक्षा, बौद्धिक विकास, मनोबल बढाने के लिये विविध उपक्रम शुरू करना।
  • प्रति वर्ष बालिका, युवती, गृहिणी सेविकाओं के लिये भारतीय तथा विभाग बैठकों का आयोजन।
  • वन विहार और शिविरों का आयोजन – शिशु, बालिका और गृहिणी सेविकाओं के लिए।
  • अखिल भारतीय तथा प्रांत, विभाग स्तरों पर प्रसंगोत्पात संम्मेलन लेना।
  • अपनत्व की भावना से आरोग्य शिबिर, छात्रावास, उद्योग मंदिर, बालमंदिर संस्कार वर्ग सहित विभिन्न सेवाकार्य करना।
  • विश्व विभाग में हिंदुत्व का प्रसार तथा हिंदु बांधवों का संगठन करना।

आरएसएस और सेविका समिति का उद्देश्य और लक्ष्य एक ही है। सेविका समिति की महिलाएं, पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिला कर चलती है। इसका अर्थ यह नहीं है की वे पुरुषों के बगल में खड़ी रहकर खुद को धन्य महसूस करवाने के लिए उत्सुक है। दोनों ही संगठन देश निर्माण के लिए काम करते है न की खुद के प्रचार प्रासर के लिए। खुद को ‘महात्मा’ बनाने का काम इस संगठन का उद्देश्य नहीं है बल्कि ‘देश को महान’ बनाना ही उनका एक मात्र लक्ष्य है। बलात्कारी पुरुषों को यह बात समझ में नहीं आयेंगी।

पिछले 82 वर्षों से सेविका समिती राष्ट्र और उत्तम समाज के निर्माण में काम कर रही है। पप्पू से भी दुगनी उमर का यह संगठन निजी स्वार्थ और लाभ के लिए काम नहीं करता। 60 की कांग्रेस की कार्यकाल में खुद इंदिरा गांधी और सॊनिया गांधी ने देश पर राज किया है। तब उनको महिला सशक्तीकरण का ध्यान नहीं आया था। अपने आकाओं के पैर के तलवे चाटना ही कांग्रेस का महिला सशक्तीकरण है। महिला सशक्तीकरण का इतना ही खयाल है तो पप्पू कांग्रेस अध्यक्ष क्यॊं बनें? अपनी बहन प्रियांका को अध्यक्ष क्यॊं नहीं बनवाया? या फिर उसे प्रधानमंत्री उम्मीदवार क्यॊं घॊषित नहीं किया?

खुद के पैर कीचड़ में और चले आये आरएसएस को महिला सशक्तीकरण का पाठ पढ़ाने। बकवास करना और आरएसएस पर तरह तरह के आरॊप लगाना मंदबुद्दी और गद्दारॊं का जन्म सिद्द अधिकार है। आरएसएस क्या है और महिला सशक्तीकरण का मतलब क्या है इसे देश को समझाने की जरूरत नहीं। भला हो आरएसएस का जिनके कारण देश की महिलाएं सुरक्षित हैं वरना गद्दारॊं का बस चलता तो देश में एक बार फिर मुगल शासन लागू कर देते।

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