राजनीति

प्रधान मंत्री मोदी द्वारा 3,000 करोड़ रुपये की चीन और पाकिस्तान के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक  ! 3,000 करोड़ रुपये की “शत्रु संपत्ति” बेचने की प्रक्रिया शुरू 

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अगर आपको एक पल लगे कि हाँ ये काम असंभव है, तो अगले ही पल आप प्रधान मंत्री मोदी को आसानी से और पूर्णता के साथ उस कार्य को निष्पादित करते देखेंगे। ऐसी एक घटना में, अब नरेंद्र मोदी सरकार ने 3,000 करोड़ रुपये की “शत्रु संपत्ति” बेचने की प्रक्रिया को शुरू कर दिया है।

सबसे पहले मैं आपको समझाती हूँ कि “शत्रु  संपत्ति” क्या है और यह चीन और पाकिस्तान के लिए सिरदर्द क्यों है!

संसद ने “शत्रु संपत्ति” के 49 वर्षीय पुराने कानून में संशोधन के लिए अप्रैल 2017 में एक बिल पारित किया। शत्रु  संपत्ति अधिनियम, 1968 के अनुसार, ‘शत्रु  संपत्ति’ किसी शत्रु , शत्रु  विषय या शत्रु  फर्म की ओर से आयोजित या प्रबंधित किसी भी संपत्ति को संदर्भित करती है।

यह बिल स्पष्ट रूप से कहता है कि विभाजन के दौरान पाकिस्तान और चीन में प्रवास करने वालों के उत्तराधिकारी के पास भारत में संपत्ति पर अपना अधिकार जताने का कोई हक़ नहीं है। इसका मतलब है कि वे संपत्ति अब भारतीय सरकार की है।

मोदी सरकार ने इस बार 3000 करोड़ रुपये की शत्रु संपत्ति बेचने का आदेश दिया। एक रिपोर्ट में कहा गया है, “स्टॉक एक्सचेंज में 996 भारतीय कंपनियों में विभाजन के समय 20,323 पाकिस्तानी लोगों के 6,50,75,877 शेयर पीछे छोड़ दिए गए थे और उन्हें 1965 और 1971 के युद्धों के बाद जब्त कर लिया गया था और उन्हें शत्रु  के शेयर घोषित किया गया था”

शत्रु  की संपत्ति बेचने की प्रतिक्रिया के तुरंत बाद केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा, “देश की 996 सार्वजनिक सूचीबद्ध कंपनियों में 6.5 करोड़ से अधिक शत्रु शेयर हैं। इन शेयरों का मूल्यांकन मौजूदा कीमतों पर `3,000 करोड़ है”।

पाकिस्तान के पास हारने के लिए कुछ भी नहीं है क्योंकि हम जानते हैं कि आज पाकिस्तान किस बिंदु पर पहुंच गया है जहां वह अपने कर्ज को दूर करने के लिए भैंस बेच रहा है। लेकिन शत्रु संपत्ति विधेयक के कारण का चीन को बड़ा झटका है|

इस साल की शुरुआत में चीनी समाचार पत्र ग्लोबल टाइम्स ने शत्रु  संपत्ति विधेयक पर बात करते हुए चिंतित रूप से कहा था कि “यदि चीन और भारत सैन्य संघर्ष में शामिल हो जाते हैं, तो भारत में व्यवसाय करने वाली चीनी कंपनियों की संपत्ति भारतीय सरकार द्वारा जब्त की जा सकती है” ।

ग्लोबल टाइम्स ने आगे कहा, “यदि शत्रु  संपत्ति अधिनियम चीनी निवेशकों के बीच में फैलता है तो भारत के लिए ये अच्छा नहीं होगा और खुद को एक अच्छा निवेश गंतव्य बनाने के भारत के प्रयासों में बाधा डालेगा। निवेशक आत्मविश्वास के पुनर्निर्माण के लिए, भारत को कानूनी सुधार की आवश्यकता है। जिन लोगों ने चीन की नागरिकता ली है, उनके पीछे छोड़े गए संपत्ति को जब्त करना लोगों द्वारा एक शत्रुतापूर्ण कृत्य के रूप में देखा जा सकता है और भारत के लिए चीन के आउटबाउंड निवेश को नुकसान पहुंचा सकता है।

इस कथन के बाद, आपको चीनी अर्थव्यवस्था को किए जा सकने वाले नुकसान की तीव्रता का आकलन हुआ होगा। मोबाइल फोन से कई अन्य इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स तक, भारतीय बाजार चीनी कंपनियों से भरे हुए हैं और अगर चीन भारत को थोड़ी सी हानि करने की सोचता भी है तो शत्रु संपत्ति विधेयक का उपयोग करके, भारत आसानी से चीनी अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर सकता है।

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