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मंदिर वहीं बनायेंगे!!अयोध्या में मस्जिद की अपेक्षा करने वालों को करारा झटका

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सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या के राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद सेे जुड़े एक मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा है कि मामला सविधान पीठ के हवाले नही किया जाएगा|तीन जजों की बेंच में से चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा व जस्टिस अशोक भूषण ने संयुक्त फैसला सुनाते हुए कहा कि ‘पुराना फैसला उस वक्‍त के तथ्‍यों के मुताबिक था|इस्‍माइल फारूकी का फैसला मस्जिद की जमीन के मामले में था|उन्‍‍‍‍‍‍‍होंने कहा कि ‘इस्‍माइल फारूकी के फैसले पर दोबारा विचार की जरूरत नहीं’,”मस्जिद में नमाज पढ़ना इस्‍लाम का अटूट हिस्‍सा नहीं है “|न्यायाधीशीय खंडपीठ ने साफ़ किया है कि मामला केवल ‘भूमि मुद्दे’ के रूप में माना जाएगा|

साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा है कि 29 अक्‍टूबर को राम मंदिर मामले पर सुनवाई शुरू होगी|यह सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिया गया बेहद महत्त्वपूर्ण निर्णय है| अब राम जनभूमि को लेकर बरसो से चला आ रहा संघर्ष बहुत जल्द खत्म होगा और बहुत जल्द ही हम अपने राम लला को उनकी जन्मभूमि लौटा पायेंगे|फैसले को देखते हुए सुब्रमनियन स्वामी ने कहा की ये फैसला बहुत ऐतिहासिक है, मैं फैसले का स्वागत करता हूँ| अब राम  मंदिर मामला बहुत ही जल्द  हल हो जाएगा और वे चाहते है कि दिवाली से पूर्व राम मंदिर बनना शुरू हो जाए|विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने भी फैसले पर ख़ुशी जताई है और वे मामले के फास्ट ट्रैक परीक्षण का स्वागत करते हैं।

राम मंदिर के निर्माण में देरी की साजिश करने वालों के लिए ये एक करारा झटका है, उनकी साज़िश बुरी तरह से विफल हो गयी है|अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण में बाधा डालने के लिए उन लोगों की योजना विवादित भूमि पर कई व्यर्थ के मुद्दों को उठा कर फैसले में देरी करना था । लेकिन अदालत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे केवल राम मंदिर मामले पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।आज अगर मामले को सविधान पीठ के हवाले कर दिया जाता तो राम मंदिर मामला वर्षों तक फिर लटक जाता। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा क्योंकि पैनल ने इस मामले को संवैधानिक खंडपीठ को सौंपने से इंकार कर दिया था।

 

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