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भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार में पाकिस्तान ने की कटौती, क्या इससे भारत को कोई फर्क पड़ेगा ?

धारा 370 को हटाने के फैंसले ने पाकिस्तान को हिला कर रख दिया है। भारत की इस कारवाई पर अपने तेवर ज़ाहिर करते हुए पाकिस्तान ने भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार न करने का फैंसला किया है और साथ ही भारतीय दूत को निष्कासित करने  और नई दिल्ली से अपने दूत को वापस बुलाने का भी फैंसला लिया है।

द्विपक्षीय व्यापार में कटौती से भारत को कोई फर्क नहीं पड़ेगा। लेकिन पाकिस्तान पर इसका व्यापक असर होने की पूरी उम्मीद है क्योंकि पाकिस्तान भारत पर बुनियादी घरेलू सामान के आयात के लिए भी निर्भर करता है।

इस साल, पुलवामा हमले के बाद, दोनों देशों के बीच संबंध और अधिक धूमिल हो गए। और एक निरंतर तनाव का कारण था। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को तोड़ने के लिए भारत ने पाकिस्तान से माल आयात करना लगभग बंद कर दिया था।

फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन के निदेशक अजय सहाय के अनुसार द्विपक्षीय व्यापार में कटौती से पाकिस्तान पर बुरा असर पड़ेगा क्योंकि भारत पाकिस्तान पर व्यपार के लिए निर्भर नहीं है।

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेन ट्रेड (IIFT) के निदेशक राकेश मोहन जोशी का कहना है कि पाकिस्तान के फैसले का उसके खुद के व्यापार पर असर पड़ेगा, क्योंकि भारत के पाकिस्तान से माल पर 200% तक आयात शुल्क बढ़ाने के बाद पाकिस्तान पहले से ही मुश्किल समय में था।

वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2019 में पाकिस्तान से आयात में 92% की कटौती की गई थी जिससे यह लगभग 24 मिलियन डॉलर था जबकि मार्च 2018 में ये 3.4 करोड़ डॉलर था। भारत ताजा फल, सीमेंट, पेट्रोलियम और खनिज उत्पादों का पाकिस्तान से आयात करता है|

वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान पाकिस्तान से आयात में 47% की कमी आई थी, यह 5.3 मिलियन अमेरिकी डॉलर था। पाकिस्तान ने भी भारत से आयात कम कर दिया था, इसलिए भारतीय निर्यात 17 करोड़ अमेरिकी डॉलर था। लेकिन कुछ ही समय में भारतीय निर्यात में उसी वित्तीय वर्ष में 7.4% की वृद्धि देखी गई।

भारत ने 1996 में पाकिस्तान को एमएफएन (सबसे पसंदीदा राष्ट्र, MFN) का दर्जा दिया था, लेकिन पाकिस्तान ने भारत को कभी भी वही दर्जा नहीं दिया था| डब्ल्यूटीओ राष्ट्रों के अनुसार, एक देश को बिना भेदभाव के व्यापार करना चाहिए। व्यक्तिगत प्रतिशोध के बिना लागू किया गया। और वस्तुओं पर कर भी व्यक्तिगत प्रतिशोध के बिना लागू किया जाना चाहिए|

लेकिन पाकिस्तान द्वारा बार-बार पीठ में छुरा मारा गया और पुलवामा हमले के बाद, भारत ने पाकिस्तान को दिया गया एमएफएन(MFN) दर्जा वापस ले लिया था|

श्री अजय सहाय बताते हैं, भारत की प्रमुख वस्तुओं में कार्बनिक रसायन, कपास, प्लास्टिक और डाई का निर्यात किया जाता है। पाकिस्तान में टमाटर का निर्यात बहुत पहले ही रुक गया था।

सहाय ने बताया कि इस तरह के सामान का दक्षिण एशिया और मध्य पूर्व में एक तैयार बाजार है जो भारत को बिना किसी लागत के ऐसे निर्यात को तुरंत हटाने में सक्षम करेगा।

ट्रेड प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मोहित सिंगला ने कहा, “यह एकतरफा कदम और एकतरफा नुकसान है।”

दिल्ली स्थित एक निर्यातक ने कहा कि वर्तमान में दुबई के माध्यम से व्यापार खुला है।

अनादिकाल से भारत सामानों का निर्यातक रहा है और कई देशों के साथ इसका समुद्री संबंध रहा है। हमारे प्रधानमंत्री की विदेश नीतियों के बदौलत भारत ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी पहचान बनाई है।

इस बीच, पाकिस्तान ने इस मामले को ओआईसी-ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन के मंच पर उठाया है। OIC 8 अगस्त को अनुच्छेद 370 पर एक बैठक कर रहा है।

हम सभी जानते हैं कि पिछले OIC मीट में पाकिस्तान को किस तरह अपमान का सामना करना पड़ा था।

लेकिन इस बार इस तथ्य पर ध्यान देना भी महत्वपूर्ण है कि कश्मीर जो कि एक इस्लामिक बहुमत वाला राज्य था, अब एक केंद्र शासित प्रदेश है। चीजें क्या मोड़ लेती हैं हमें इंतजार करना होगा और देखना होगा।

एक ऐसा देश जो आतंकवाद को जन्म देता है, एक ऐसा देश जो हमारे सैनिकों की शहादत का जश्न मनाता है, हमारे प्रिय नेताओं अटल जी और सुषमा स्वराज की मृत्यु का उपहास बनता है, हमारे साथ कोई संबंध रखने के योग्य नहीं है।


Kashish

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