राजनीति

राम की भूमी में राम के लिए ही जगह नहीं किन्तु नेहरू परिवार के लोगों की समाधी के लिए ज़मीन हैं! कैसा न्याय है?

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भारत में राजनीती परिदृश्य की बात की जाए तो नेहरू-गाँधी परिवार का हमेशा से ही वर्चस्व रहा है. हजारो योजनाओं, शहरों, अस्पतालों, स्टेडियम के नाम इस परिवार के लोगों के नाम पे रखा गया हैं. पूरे देश में हजारों एकड़ जमीन नेहरू परिवार के नाम पे है. वहीं दूसरी ओर हिन्दुओं के भगवान् श्री राम की जन्मभूमि के लिए कई दशकों से मुक़दमे चल रहे हैं.

कुछ सेक्युलर और लिबरल प्रजाति के लोग कहते हैं कि अयोध्या में राम मंदिर की जगह अस्पताल या स्कूल खोल देना चाहिए, ये तमाम लोग देश के कुख्यात वामपंथी और सेक्युलर है, जो मंदिर की जगह स्कूल और अस्पताल चाहते है, लेकिन यह लोग कभी भी इन नेताओ की समाधियों की जगह स्कूल या अस्पताल बनाने के लिए नहीं कहते.

आपको यह जानकर हैरानी होगी कि इसी दिल्ली के बिलकुल बीचों बीच, बहुत ही ज्यादा महँगी जमीनों पर 5 विशाल समाधियां बनी हुई है, जिसमे मोहनदास गाँधी की समाधी है जो की 44 एकड़ में बनी हुई है, भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की समाधी है जो की 53 एकड़ के विशाल इलाके में बनी हुई है, इंदिरा गाँधी की समाधी है जो की 45 एकड़ में बनी हुई है और राजीव गाँधी की समाधी है जो की 15 एकड़ में बनी हुई है. संजय गांधी जो की कभी प्रधान मंत्री नहीं बने उनकी समाधी भी दिल्ली में है

यह लोग मात्र प्रधानमंत्री या राजनीतिक नेता रहे हैं, लेकिन इन लोगों कि याद में इतनी बड़ी जमीन पे एक तरह से कब्ज़ा किया हुआ है. ये लोग इस देश के राजा नहीं थे, और न ही ये जमीने इनकी थी, पर कांग्रेस कि पूर्ववर्ती सरकारों ने दिल्ली के बीचों बीच इतनी भूमि पर सिर्फ इन 5 लोगों की समाधी बनवाई. और एक तरह का अवैध कब्ज़ा किया हुआ है.

दिल्ली वैसे ही महंगी है, और अगर इस इलाके कि जमीन की कीमत की बात करे तो दिल्ली में प्रति एकड़ जमीन की कीमत 1500 करोड़ रुपए है, यह बहुत ज्यादा महंगी जमीन हुई और अगर हम इनको जोड़-घटाएं तो पता लगेगा कि मरने के बाद भी इन लोगों ने दिल्ली पर कब्ज़ा जमाया है. यह महंगी जमीन भी दिल्ली के उस इलाके में आती हैं जहां जनसँख्या घनत्व काफी है और जमीन की वैसे भी कमी है. दिल्ली वैसे भी भारत का दूसरा सबसे ज्यादा जनसंख्या वाला शहर है.

अब सवाल यह उठता है कि जिन लोगों को अयोध्या में मंदिर की जगह अस्पताल चाहिए, वो लोग इन लोगों की समाधियों की जगह अस्पताल और स्कूल क्यों नहीं बनाते? राम मन्दिर की जगह पर अस्पताल बनाने की राय देने वालो पहले इन समाधियों की सिर्फ एक एकड़ में अस्पताल, स्कूल बनाओ, फिर आगे की बात करना.

और आपकी जानकारी के लिए बता दें की इन सभी समाधियों में विशेष घास उगाई जाती है, उसका रखरखाव किया जाता है, और इन समाधियों के रख रखाव पर ही हर साल 16 करोड़ रुपए की लागत आती है. जनता के टैक्स का 16 करोड़ उड़ा दिया जाता है. इसके अलावा वहां मेंटेनेंस और सिक्योरिटी का खर्चा जोड़ दिया जाए तो यह भी कई करोड़ सालाना होगा. इतना सारा जनता का टैक्स का पैसा उड़ाया जा रहा है. ना जाने कब यह लूट बंद होगी?


Manish Sharma

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