राजनीति

अलगावादियों पर मोदी सरकार की कारवाई शुरू! मसर्रत आलम, आसिया अंद्राबी और शब्बीर शाह को NIA ने किया गिरफ्तार

केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद और भाजपा के चाणक्य अमित शाह के गृह मंत्री नियुक्त होने के बाद देश की मोदी सरकार से उमीदें ओर भी बड़ गई है| देश को उम्मीद है कि अमित शाह जी अब कश्मीर की समस्या पर भी ध्यान देंगे और देश से जुड़े ऐसे तमाम अहम मुद्दों पर कारवाई करेंगे | और जैसा उम्मीद था ऐसा ही हो रहा है| माननीय ग्रहमंत्री जी ने आतंकवादियों के खिलाफ कारवाई भी शुरू कर दी है| उन्होंने कश्मीर में हिंसा रोकने के लिए सेना पर पथराव करने वाले देशद्रोहियों के खिलाफ कार्रवाई का आदेश दिया है|

साथ ही आतंकवादियों पर कड़ी कारवाई करते हुए आज दिल्ली की एक अदालत ने आतंकवादी गतिविधियों के लिये धन मुहैया कराने के मामले में अलगाववादी मसरत आलम, आसिया अंद्राबी और शब्बीर शाह को पंद्रह दिनों के लिये एनआईए ने हिरासत में ले लिया है। यह मामला 2008 के मुंबई आतंकवादी हमले के सरगना और जमात उद दावा प्रमुख हाफिज सईद से जुड़ा हुआ है। आरोपियों के वकील एम एस खान ने पीटीआई को बताया कि आसिया और शाह अलग-अलग मामलों में पहले से ही हिरासत में हैं, जबकि आलम को ट्रांजिट रिमांड पर जम्मू- कश्मीर से लाया गया था।

एनआईए ने 2018 में सईद, एक अन्य आतंकवादी सरगना सैयद सलाउद्दीन और दस कश्मीरी अलगाववादियों के खिलाफ घाटी में आतंकवादी गतिविधियों के लिये कथित तौर पर धन मुहैया कराने और अलगाववादी गतिविधियों के मामले में आरोपपत्र दायर किया था। आरोपियों के खिलाफ जिन अपराधों के तहत आरोप पत्र दायर किया गया है उनमें  धारा 120 बी (आपराधिक षड्यंत्र) और गैर कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 की धाराएं शामिल हैं।

एनआईए के मुताबिक, मामला 30 मई 2017 को दर्ज हुआ था और पहली गिरफ्तारी पिछले वर्ष 24 जुलाई को हुई थी। इन पर हिजबुल मुदाहिदीन, दुख्तरन-ए-मिल्लत और लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठनों के साथ मिलकर आतंक के लिए धन जुटाने (टेरर फंडिंग) का आरोप है। इसमें शब्बीर शाह सैयद अली शाह गिलानी के नेतृत्व वाले हुर्रियत गुट का सदस्य था। पुलवामा हमले के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने शब्बीर शाह, मीरवाइज उमर फारूक और कुछ अन्य अलगाववादी नेताओं की सुरक्षा हटा ली थी।

आसिया अंद्राबी पर घाटी में हाफिज सईद के इशारे पर पत्थरबाजी करवाने का आरोप है। एनआईए ने पिछले साल दाखिल की गई अपनी चार्जशीट में अंद्राबी या गिलानी का नाम नहीं लिया था। जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने अंद्राबी की जमानत खारिज कर दी थी, जिसके बाद अंद्राबी को पिथले साल दिल्ली लाया गया था।

दरअसल जांच एजेंसी तीनों आरोपियों से पत्थरबाजी और टेरर फंडिंग मामले में और इसके पीछे शामिल लोगों के बारे में जानकारी हासिल करना चाहती है।

अब आतंकवादी मोदी सरकार से बच नहीं सकते है| मोदी सरकार एक एक से उनके किये हुए गुणों का हिसाब लेगी|


Kashish

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