राजनीति

सरदार पटेल ने भारत को एकजुट किया लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी कि नेहरू ने सरदार पटेल की बेटी का अपमान किया

हमारे इतिहासकारों ने बड़ी ही चलाकी से पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा किये गये कई ब्लंडर्स को सफलतापूर्वक छुपा के कांग्रेस को हमेशा योग्य पार्टी और नेहरू को आधुनिक भारत के एक दूरदर्शी के रूप में चित्रित किया है| ये बहुत दुख की बात है कि इतिहासकारों ने हमेशा तथ्यों को तोड़ मरोड़ के पेश किया है जब कि वास्तविकता इसके एकदम विपरीत है।

ऐसा ही एक किस्सा है नेहरु की घृणा का| यह किस्सा वर्गीज कुरियन के संस्मरणों “आई टू हैड ए ड्रीम ’ का है।

मणिबेन पटेल, सरदार पटेल की बेटी, एक बेहद ईमानदारी और निष्ठा वाली महिला थीं। उन्होंने एक किस्सा सुनाते हुए बताया था कि जब सरदार पटेल गुज़रे, तो वो उनकी एक किताब और थैला उठाकर दिल्ली में जवाहरलाल नेहरू से मिलने गई थी। उन्होंने वे नेहरू को सौंप दिया, यह बताते हुए कि उनके पिता का निर्देश था कि जब उनकी मृत्यु हो जाए तो ये सब सामान नेहरू को ही देना है और किसी को नहीं। बैग में 35 लाख रुपये थे जो कांग्रेस पार्टी के थे और पुस्तक पार्टी के बही खातों की थी। नेहरू ने उन्हें ले लिया और धन्यवाद दिया। मणिबेन ने उम्मीद से इंतजार किया, उम्मीद है कि वह कुछ और कहेंगे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया, इसलिए वह वहां से उठकर चली आई|

उनसे पूछने पर कि उन्हें नेहरू से क्या अपेक्षा की थी उन्होंने बताया “मुझे लगा कि वह मुझसे पूछ सकते हैं कि मैं अब कैसे अपने जीवन को संभालूंगी या कम से कम इतना ही पूछ लेते कि क्या मुझे किसी मदद की जरूरत है लेकिन उन्होंने कभी नहीं पूछा। वह बेहद निराश थी और वहां से चली आई| यह घटना नेहरू-सरदार पटेल के रिश्ते के तनाव को भी दर्शाती है। दुःख की बात है कि न ही नेहरू ने और न ही कांग्रेस के किसी अन्य राष्ट्रीय नेता ने यह कभी पता लगाने की कोशिश की कि उनके पिता के मरने के बाद मणिबेन के साथ क्या हुआ।

सरदार पटेल जी द्वारा देश के लिए किए गए सभी बलिदानों के बाद, यह बहुत दुखद था कि राष्ट्र ने उनकी बेटी के लिए कुछ नहीं किया। उसके बाद के वर्षों में, जब उसकी नज़र कमज़ोर हुई, तो वह अहमदाबाद की सड़कों पर अनियंत्रित होकर चलती थी, अक्सर ठोकर खाकर गिर जाती थी जब तक कि किसी राहगीर से उसको मदद न मिले। जब वह मर रही थी, गुजरात के मुख्यमंत्री चिमनभाई पटेल एक फोटोग्राफर के साथ उनके घर पर गये। उनके बिस्तर के पीछे खड़े हुए और फोटोग्राफर को तस्वीर लेने का निर्देश दिया। अगले दिन सभी अखबारों में यह तस्वीर प्रकाशित हुई।

यदि कोई कांग्रेस नेता दावा करता है कि पार्टी सरदार पटेल का सम्मान करती है, तो वह साफ़ झूठ बोल रहा है। कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता केवल एक ही परिवार, गांधी परिवार का सम्मान करते हैं और इस भ्रष्ट और सत्ता के भूखे परिवार को महिमामंडित करने की प्रक्रिया में, वे किसी भी हद तक चले जाएंगे|


Kashish

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