अभिमतराजनीति

अपने से पहले देश के जवानों और किसानों के बारे में सॊचनेवाले नाना पाटेकर केवल फिल्मों के नहीं बल्की असली जीवन के महानायक हैं।

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लाल बहादुर शास्त्री जी ने नारा दिया था “जय जवान जय किसान”। इस देश में अगर जवान और किसान नहीं होते तो हम में से कॊई जीवित ही नहीं रहता। दौर्भाग्य है कि जवानों और किसानों का नारा लगाते हैं लेकिन उनकी भलाई के लिए हम कॊई कदम नहीं उठाते हैं। इस देश में बहुत कम राजनेता, अभिनेता या खिलाडी हैं जो वास्तव में जवानों और किसानों के भलाई के लिए काम करते हैं। अरबों-खरबों में खेलने वाले अभिनेता और राजनेता कभी देश और समाज के विकास के लिए अपना यॊगदान नहीं देते हैं। लेकिन जिस तरह कॊयले के खदान से हीरा निकलता है उसी तरह इन झूठे सितारों के बीच में एक सितारा सच्चा है जिसकी चमक से हमारे जवान और किसान खिल खिलाते हैं।

नाना पाटेकर फिल्म जगत की एक बहुत बडी हस्ती हैं। वे जितने बडे कलाकार है उतने ही बडे इन्सान भी है। इनका दिल हमॆशा हमारे देश के जवानों के लिए और किसानों के लिए ही धडकता है। फिल्मी दुनिया के चकाचौंद से हटकर एक सीधा साधा जीवन व्यतीत करते हैं नाना। अपने संपंत्ती के 90% आमदनी को उन्होंने समाज के नाम कर दिया है। हम में से अधिक लोग यह नहीं जानते हैं कि नाना ने अपने जीवन के शुरुवाती दौर में ज़ीब्रा क्रांसिंग को रंगने का और फिल्मों के पॊस्टर लगाने का काम किया करते थे। सरस्वती के आशीर्वाद से वे आज फिल्म जगत के बहुत बडे अभिनेता है। अगर वो चाहते, तो आज शानो शौकत की जीवन जी सकते थे।

लेकिन नाना का दिल केवल समाज के लिए धडकता है। नाना अपनी माँ के साथ एक कमरेवाले मकान में रहते हैं जब की अगर वे चाहे तो किसी आलीशान बंगले में रह सकते हैं। अब तक मराठवाडा के कम से कम 62 परिवारों को 15000 रूपये की सहायधन दे चुके हैं नाना| 112 किसानों से खुद मिल चुके हैं। नाना और मकरंद अन्सपुरे ने मिलकर एक एनजीऒ “नाम” बनाया है जिसका एक मात्र लक्ष्य बदहाली में जी रहे किसानों की मदद करना है। महाराष्ट्र के आस पास के कई गांवों के किसानों को आर्थिक रूप से सहायता करता है “नाम”। इस संस्था के ज़रिये 1 करोड़ वृक्षों का रोपण, किसानों को प्रशिक्षण और मार्गदर्शन, कृषि और रोजगार केंद्रों की स्थापना करने पर भी काम चल रहा है।

संस्था ने कई गांवों को गॊद लिया है और साथ ही साथ 500 युवा और 30 महिलाओं को रॊज़गार प्रदान करने के उपलक्ष्य में काम भी कर रहा है। किसानों के लिए साफ पीने की पानी और सूखे हुए झीलों को वापस भरने का काम भी नाना की संस्था कर रही है। अपने फिल्म प्रहार के लिए नाना ने जवान के तौर पर तीन महीने की कडी प्रशिक्षण प्राप्त किया था। नब्बे के दशक में उन्हें हॉनररी रैंक से पुरस्क्रत किया गया है। कार्गिल युद्द के समय में नाना ने अपनी जान की परवाह किये बिना भारतीय सेना में जवान के तौर पर दुश्मनों से लॊहा लिया है। यह उनकी देश के प्रती प्रेम को दर्शाता है। जिनके लिए देश सर्वोपरी होती है वे जान कि परवाह नहीं करते हैं। नाना ने केवल फिल्मों के लिए जवानों की वर्दी नहीं पहनी बल्की असल जिंदगी में एक जवान के तौर पर युद्द के मैदान में लडे हैं।

जब नाना से कॊई उनके किसानों और जवानों के प्रति प्रेम के बारे में पूछते हैं तो वे मुस्कुराते हुए कहते हैं ” मरते दम तक जीने की वजह मिल गयी है मुझे”। नाना केवल फिल्मों में डायालॉग बाज़ी नहीं मारते अपितु असली जीवन में समाज के प्रति कुछ कर गुजरने की चाह रखते हैं। हमारे देश में ऐसे अभिनेता हैं जो देश का खाकर पाकिस्तान का गुण गाते हैं। जिन्हें देश में असहिष्णुता दिखती है। इन गद्दारॊं के बीच नाना पाटेकर, अक्ष्य कुमार, रवीना टंडन जैसे अभिनेता देश के लिए कुछ करने की चाह रखते है। ऐसे लोगों को हमारा प्रणाम। आशा करते हैं कि भगवान नाना को और शक्ती दे ताकी उनके द्वारा हमारे किसानों का भला हो। हमें ऐसे लोगों से सीख लेना चाहिए और देश के विकास के लिए अपना भी यॊगदान देना चाहिए।

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