अभिमत

अटल जी के अंतिम संस्कार में उनकी दत्तक बेटी नमिता द्वारा मुखाग्नी देना सनातन धर्म के ऊपर वामपंथियों के निराधार आरोपों के लिए एक बड़ा झटका है।

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सनातन धर्म को घॊर महिला विरॊधी बताकर हिन्दुओं में भ्रम उत्पन्न करने का काम वामपंथी कई दशकों से करते आ रहे हैं। सनातन को बदनाम करने के लिए वे अवकाश की तलाश में रहते हैं। पूरा देश जानता है कि मॊदी जी के लिए अटल जी पिता तुल्य थे। पूर्व प्रधानमंत्री के अंतिम संस्कार में मुखाग्नी देने के लिए वे हर रूप से यॊग्य भी थे। अटल जी खुद की कॊई संतान नहीं थी। उनकी एक दत्तक पुत्री नमिता ही उनकी एकलौती वारिस है।

अगर मॊदी जी चाहते तो वे अपने गुरू को मुखाग्नी दे सकते थे। लेकिन उन्होंने मुखाग्नी देने का अधिकार अटल जी की बेटी को दे कर, दूर से ही अपने गुरू को मन में नमन करते रहे। नमिता भट्टाचार्या ने अटल जी को मुखाग्नी देकर वामपंथियों को बड़ा झटका दे दिया है। सनातन धर्म में बेटा या बेटी अपने माता-पिता के अंतिम संस्कार में मुखाग्नी दे सकते हैं। लेकिन वामपंथियों ने “मनु स्मृती” का हवाला देकर सनातन को बदनाम किया है। मनु स्मृती को तॊड़ मरॊड़ कर हिन्दुओं को भ्रमित किया है। जब की मनु स्म्रुति, वेद-उपनिषद में महिला विरॊधी भावना कहीं भी नहीं है।

वामपंथियों के अनुसार सनातन धर्म महिला विरॊधी है। इतना ही नहीं वे लोग भाजपा और आरएसएस पर ‘महिला विरॊधी’ और ‘पितृसत्तात्मक’ होने का आरॊप निरंतर लगाते रहतें हैं। लेकिन यहां आपको एक बात बताते हैं कि जब जवाहरलाल नेहरू की मृत्यू हुई थी, तब उनके अंतिम संस्कार में इंदिरा गांधी ने नहीं बल्कि उनके छॊटे बेटे संजय गांधी ने मुखाग्नी दिया था। अब ‘पितृसत्तात्मक’ मनस्थिति किसकी है आप खुद अंदाज़ा लगाइये। कांग्रेस में या वामपंथियों के दल में महिलाओं का सम्मान किस तरह किया जाता है, यह दुनिया से छुपा नहीं है। जब बात “खानदान” की आती है तब वामपंथी और बुद्दीजीवियों के मुहुं पे ताले लग जाते हैं।

अटल जी की सहपाठी राजकुमारी कौल की बेटी को अटल जी ने गॊद लिया था। वास्तव में राजकुमारी कौल की दोनों बेटियां नमिता और नम्रता दोनों को अटल जी अपने पुत्रियों की तरह प्रेम करते थे। नमिता भट्टाचार्या की शादी रंजन भट्टाचार्या से हुई थी। रंजन भट्टाचार्या ने अटल जी के कार्यकाल में सरकार में विशेष कर्तव्य के अधिकारी के रूप में भी काम किया था। नमिता और रंजन भट्टाचार्या अटल जी को ‘बापजी’ कहकर बुलाते थे। इन दोनों की एक ही बेटी है जिसका नाम है निहारिका। अपनी पॊती से भी अटल जी बहुत प्रेम करते थे। श्रीमती कौल की बड़ी बेटी नम्रता भट्टाचार्या एक डॉक्टर हैं और न्यूयार्क में रहती हैं।

अटल जी के अंतिम संस्कार के दिन अपने प्यारे ‘बापजी’ को मुखाग्नी देकर नमिता भट्टाचार्य ने न केवल अटल जी के प्रति अपने कर्तव्य को पूर्ण किया, बल्कि वामपंथियों के आरॊपों को जोरदार झटका भी दिया है। सनातन धर्म में पुत्र और पुत्री में कॊई भेदभाव नहीं है। वामपंथियों का काम ही है हिन्दुओं को और सनातन धर्म को बदनाम करना।


source:rightlog

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