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कहां होगा विष्णु के दसवें अवतार का जन्म? क्या कैलाश के नीचे स्थित “शाम्भलः” साम्राज्य में होगा कल्की अवतार का जन्म?

क्या है शांभला साम्राज्य का रहस्य?

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हमारे पुराणॊं के अनुसार चार युग हैं। सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग और कलयुग। इनमें से तीन युग बीत चुके हैं और हम अंतिम युग यानी कलयुग में जी रहे हैं।

सतयुग= 1,728,000 मानव वर्ष: इस युग में सत्य, अहिंसा और खुशहाली थी। सभी एक ही धर्म में जी रहे थे। मानवता सबसे बड़ा धर्म था। कॊई प्राक्रुतिक विपदा नहीं थी, सब जीव जंतु संतॊष से जीवन यापन करते थे।

त्रेतायुग=1,296,000 मानव वर्ष: दूसरा युग। इस युग में कई सम्राट अपने साम्राज्य को जन्म देते हैं और दुनिया पर विजय प्राप्त करते हैं। कृषि, श्रम और खनन जैसे कार्यों में लोग उन्नती प्राप्त करते हैं। इस युग के अंत में प्रभु श्री राम का जन्म हुआ था।

द्वापर युग=864,000 मानव वर्ष: तीसरा युग जहां साम्राज्य शाही मनशा बड़ने लगी और लोग एक दूसरे के दुश्मन बने। अधिकार की लालसा में लोग युद्द करने लगे। समाज में कई तरह की बीमारियां फैलने लगी। इस युग के अंत में भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था।

कलयुग=432,000 मानव वर्ष: चौथा और आखरी युग। धर्म के ऊपर अधर्म हावी होगा। सत्य के ऊपर असत्य तांडव करेगा। हर तरफ़ अशांती, बेचैनी और तरह तरह के रॊग होंगें। लोग आपस में लड़ेंगे। अन्याय और अत्याचार चरम पे होगा। तब धर्म के उत्थान के लिए भगवान विष्णु अपना दसवां अवतार लेंगे और धर्म का उत्थान करेंगे।

पुराणॊं के अनुसार विष्णु का दसवां अवतार कल्की अवतार होगा। ‘कल्कि पुराण’ के अनुसार कलयुग के अंत में बैसाखी के पूर्णिमा के बारह दिन पश्चात कल्की का जन्म शांभला नामक जगह पर होगी। विष्णुजशा और सुमती नामक उच्च कॊटी के ब्राह्मण परिवार में कल्की का जन्म होगा। पुराणॊं में कल्की को हाथ में तलवार लिए घोड़े पे सवार हुए एक क्षत्रिय के रूप में दिखाया गया है। कल्की कलियुग के अंत में अवतरित होंगे और दुनिया को विनाश से बचायेंगे। अब हम कलियुग के पहला पड़ाव पार कर चुके हैं । समाज में अधर्म, अन्याय, असत्य और अत्याचार तांडव कर रहे हैं। आनेवाले समय में धर्म अपने घुटनों पर रेंगता हुआ दिखाई देनेवाला है।

भागवत पुराण के अनुसार कल्की का जन्म शांभला नामक जगह में होनेवाला है। लेकिन किसी को यह नहीं पता कि आखिर यह जगह है कहां? कई लोग कई तरह के अनुमान लगाते हैं लेकिन पुराणॊं के रहस्य को भेदने में वे असफल हो जाते हैं। शांभला एक रहस्य जगह है। संस्कृत में “शाम्भलः” का अर्थ है “शांति की जगह” यानी जिस जगह पर संपूर्ण शांती होती है। हिन्दुओं के ‘कालचक्र तंत्र’, ‘विष्णु पुराण’ और तिब्बत के बौद्ध ग्रंथ ‘ज़ां-ज़ुंग’ में इस रहस्यमयी जगह का उल्लेख है।

किंवदंती के अनुसार, यह एक ऐसी जगह है जहां सिर्फ हृदय से परिशुद्ध व्यक्ति ही जीवित रह सकता है, एक जगह जहां प्यार और ज्ञान का शासन होता है और जहां लोग पीड़ा, इच्छा या बुढ़ापे से मुक्त होते हैं। ठीक यही मान्यता कैलाश परबत के बारे में भी प्रचलित है। शांभला को कई नामों से जाना जाता है। इसे निषिद्ध भूमि, श्वेत सागर भूमि, उज्ज्वल आत्माओं की भूमि, जीवत अग्नीवाली भूमि, देवताओं के रहनेवाली भूमी भी कहा जाता है। पुराण मान्यताओं के अनुसार कैलाश और वैंकुठ में देवता निवास करते हैं। हिमालय के मार्ग से पृथ्वी के लोग स्वरगारॊहण करते थे। तो क्या यही वो रहस्य मयी जगह है जहां देवता निवास करते हैं?

शांभला को भी “स्वर्ग की भूमी” कहा जाता है। क्या यह संभव है कि कैलाश के नीचे ही शांभला साम्राज्य स्थित है जहां आज भी अलौकिक शक्ति और तेजवाली एक सभ्यता बसती है? क्या यह संभव हो सकता है कि इसी जगह पर भगवान के कल्की अवतार का जन्म होगा? मान्यताओं के अनुसार विष्णु क्षीर सागर में वासुकी के ऊपर शयन करते है, जो वैकुंठ में हैं। क्या शांभला ही वह वैंकुठ है? क्या हिमालय के गुफ़ाओं में इस स्वर्ग जैसी नगरी तक पहुंचने का मार्ग है? सामान्य मनुष्य कैलाश के आस पास भी नहीं पहुंच सकता। ऐसे में इस रहस्य नगरी के अंदर जाना असंभव और कल्पना से परह है।

दुनिया के सभी वैज्ञानिक इस खोज में लगे हैं कि आखिर कैलाश पर अब तक कॊई क्यॊं नहीं चड़ पाया। संभवता इसका उत्तर यही है कि कैलाश के अंदर बसे सभ्यता को मानव जाती से बचाये रखने का प्रयत्न ही है कि वहां तक पहुंचना असंभव है। संभवता वहां मानव के जीवांश को संभाल कर रखा गया है। क्या ऐसा हो सकता है कि पृथ्वी पर जब भी प्रलय होगा और सारे जीवात्म नष्ट होंगे तब इन रहस्य मयी भूमिगत जगहों से फिर से मानव जाती का विकास होगा? पुराण में प्रलय का उल्लेख किया गया है जहां सारा विश्व ही भयंकर प्रलय के कारण नष्ट हो जायेगा। संभवता पृथ्वी पर पुनः जीव जंतुओं की श्रृष्टि का कार्य इन रहस्य मयी जगहों पर ही होता हो….

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