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“कसम खुदा की खाते है, मंदिर वहीं बनायेंगे” धार्मिक शिक्षा देने वाली मुस्लिम महिलाओं ने राम मंदिर को लेकर खाई कसम

अयोध्या में मंदिर बनाने की लहर तेजी से बड़ रही है।भगवान राम के अनुयायियों को केंद्र सरकार से जल्द ही इस मामले पर कोई कार्रवाई करने की आशा है। वे चाहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट जल्द ही अयोध्या सुनवाई सुने अन्यथा वे केंद्र सरकार से निर्माण के संबंध में एक अध्यादेश लाने की उम्मीद कर रहे हैं। कुछ अनुयायी केंद्र सरकार को चेतावनी भी दे रहे हैं कि “यदि सरकार जल्द ही कार्रवाई नहीं करेगी तो उसे इसका परिणाम भुगतना होगा”।

विश्व हिंदू परिषद (VHP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने उत्तर प्रदेश के अयोध्या में धर्म सभा का आयोजन किया है, जिसमें 2 लाख से अधिक समर्थक और शिवसेना के उद्धव ठाकरे परिवार सहित शामिल हुए हैं।

इस सब के बीच ये देखा जा रहा है कि पूरे भारत में लोग अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए अपना समर्थन दे रहे हैं। हाल ही में मेरठ में मुस्लिम महिलाओं ने अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण का समर्थन करने का वचन दिया है।

राजस्थान पत्रिका की एक रिपोर्ट के मुताबिक मुस्लिम नेशनल फोरम के बैनर के तहत आयोजित एक धार्मिक बैठक के अवसर पर कई मुस्लिम महिलाओं ने शपथ ली और कहा कि राम मंदिर को अयोध्या की विवादित साइट पर बनाया जाना चाहिए और उन्होंने इसके साथ मंदिर बनाने में उनके समर्थन के आश्वासन के लिए नारा भी लगाया “कसम खुदा की खाते है, मंदिर वहीं बनायेंगे”

बैठक सह-संयोजक शाहिन परवेज ने की थी। बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि हमारे हिंदू भाइयों और बहनों की खुशी के लिए राम मंदिर के निर्माण का समर्थन करना हमारा कर्तव्य है।

महिलाओं के समूह ने यह भी कहा कि बाबरी मस्जिद की उस जगह पर कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि बाबर ने मुसलमानों को गुलाम बना दिया था और मुसलमानों का बाबरी मस्जिद के साथ कुछ लेना देना नहीं है, जिसे मंदिर को ध्वस्त करने के बाद बनाया गया है|

बैठक को संबोधित करते हुए राष्ट्र एकता मिशन की कार्यकारी सदस्य सुबुही खान ने कहा कि राम मंदिर हमारी संस्कृति का प्रतीक है और यह हमारी संत परंपरा का हिस्सा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि हमारी वफादारी हमारी संस्कृति के साथ है, न कि विदेशी आक्रमणकारियों के साथ। उन्होंने विवादित स्थल पर अयोध्या में एक मंदिर की मांग की, मस्जिद नहीं, और उन्होंने कहा वह अपने समर्थकों के साथ मंदिर के निर्माण के रास्ते में आने वाली बाधाओं का सामना करने के लिए तैयार हैं।

यह पहली बार नहीं है कि मुस्लिम समुदाय मंदिर के निर्माण के लिए सामने से समर्थन में आये है। इससे पहले, शिया वाक्फ बोर्ड ने राम मंदिर के निर्माण के पक्ष में समर्थन दिखाया था। बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि वह विवादित भूमि के मुद्दे में अपने एक तिहाई हिस्से को छोड़ने के लिए तैयार है, जिसे मुस्लिम याचिकाकर्ताओं ने उन्हें दिया था तांकि वहां राम मंदिर का निर्माण हो सके। मार्च महीने में अयोध्या विवाद से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करने और मंदिर के निर्माण के लिए अनुकूल समाधान पर पहुंचने के लिए फोरम भी आयोजित किया गया था।

जो ताकतें राम मंदिर के निर्माण के खिलाफ है और निर्माण में देरी के लिए रणनीति का सहारा ले रही है वे अपने बुरे इरादों में सफल नहीं हो पाएंगी और यह बात सुनिश्चित है कि भगवान राम जल्द ही अपने जन्मस्थान पर विराजमान हो पायेंगे|
“मंदिर वहीं बनेगा जहां राम लला का जन्म हुआ था”


Source :Patrika

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