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मोदी सरकार का मास्टरस्ट्रोक: देश का पैसा लूट कर भागने वालों पर नकेल कसने के लिया किया बिल पारित!!!!

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देश को करोड़ों रुपये का चुना लगाकर फरार होने वाले अपराधियों पर शिकंजा कसने के लिए इस दिशा में अहम कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने भगोड़ा आर्थिक अपराध बिल 2018 को मंजूरी दे दी है|इस बिल को 5 मार्च को शुरू होने वाले बजट सत्र के दूसरे छमाही में संसद के सामने लाए जाने की संभावना है|इसमें कई सख्त प्रावधान शामिल किये गये है|

इस बिल की खासियत ये है कि इस बिल के माध्यम से फर्जीवाड़ा करके विदेश भागनेवालों को कोर्ट के दोषी ठहराए बिना ही उनकी संपत्ति को जब्त कर लिया जाएगा|इस कानून के तहत केवल देश में ही नही बल्कि उनकी विदेशों की संपत्ति को भी वहां सबंधित सरकारों की मदद से जब्त किया जाएगा|इस तरह के आर्थिक अपराधियों के मामले की सुनवाई मनी लांड्रिंग के तहत होगी|

प्रस्तावित विधेयक को यदि मंजूरी मिल जाती है तो आर्थिक अपराधों से निपटने के लिए बने अन्य कानूनों की यह जगह ले लेगा|यह क़ानून सौ करोड़ रुपये से अधिक की बकाया राशि,बैंक क़र्ज़ वापिस न करने वालों और क़र्ज़ वापिस न करनेवाले कर्जदारों के खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट पर लागू होगा|

प्रस्तावित बिल के ख़ास प्रावधान

  • प्रिवेंशन ऑफ मनी लांड्रिंग एक्ट यानी पीएमएलए के तहत एक विशेष अदालत गठित किए जाने का प्रावधान है।
  • विशेष अदालत में वहीं मामले लिए जाएंगे जिनमें से 100 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा की रकम शामिल हैं।
  • अदालत बैंक या वित्तीय संस्थाओं के साथ धोखाधड़ी करने जैसे मामलों में आरोपी को भगौड़ा घोषित करेगा।
  • अपराध करके विदेश भागने वालों को अदालत में दोषी ठहराये बिना भी उनकी संपत्ति जब्त करने का प्रावधान है।
  • जानबूझकर कर्ज नहीं चुकाने वाले कर्जदारों और जिनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है उन पर लागू होगा।

इसके अलावा नेशनल फाइनेंसियल रिपोर्टिंग अथॉरिटी(NFRA) का गठन किया जाएगा। एनएफआरए ऑडिटिंग पेशे के लिए एक स्वतंत्र नियामक के रूप में कार्य करेगी जो कि कंपनी अधिनियम 2013 में लाये गये महत्वपूर्ण परिवर्तनों में से एक है| यह लिस्टेड और बड़ी कंपनियों पर लागू होगा।  इससे ऑडिटर्स और सीए पर शिकंजा कसेगा।एनएफआरए के तहत चार्टर्ड एकाउंटेंट्स और उनकी फर्मों की सेक्शन 132 के तहत जांच होगी। एनएफआरए स्वायत्त नियामक संस्था के तौर पर काम करेगा।

आर्थिक अपराधियों पर शिकंजा कसने के लिए इस बिल की लंबे समय से मांग उठ रही थी| भगोड़ा आर्थिक अपराध बिल की मंजूरी देशहित में बहुत जरूरी थी। इस विधेयक का उद्देश्य जौहरी निरव मोदी और विजय माल्या जैसे देश से भागने या मुकदमे का सामना करने के लिए नहीं लौटने  वाले आर्थिक अपराधियों को हिरासत में लेना है। इससे अपराधियों पर शिकंजा कसने में आसानी होगी।सरकार ने ये साफ करदिया है कि देश में लूट को अंजाम देकर भागने और कानून का मजाक बनाने की इजाजात नहीं दी जा सकती है।

आने वाला वक़्त बहुत अहम है|ऐसे बहुत से अपराधी है जो ये अब अच्छे से समझ चुके है कि मोदी सरकार भ्र्स्टाचारियों और देश को लुटने वालों को किसी कीमत पे नही बक्षेगी इसलिए वै देश से भागने की फिराक में है|ऐसे अपराधियों के लिए ये बिल रामबाण का काम करेगा|

 

 

 

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