आध्यात्मिकसंस्कृति

श्री श्री शिवकुमारा स्वामी की अंतिम इच्छा जानने के बाद आपकी आँखें आंसुओं से भर आयेंगी| अंतिम समय में भी वे अपने अनुयाइयों  के बारे में सोच रहे थे 

कुछ महापुरुष अपनी मृत्यु के बाद भी अमर रहते हैं और श्री श्री शिव शिवकुमार स्वामी ऐसे ही एक महापुरूष हैं। श्री श्री शिव शिवकुमार स्वामी जी ऐसे महंत जो आज न होकर भी हम सब के साथ ही है|ये जानकार आपकी आँखें भर आएँगी कि वो अंतिम समय में भी अपने बारे में नहीं सोच रहे थे|

कल स्वामी जी की मृत्यु सुबह 11:44 बजे हुई पर इस समाचार की घोषणा दोपहर में लगभग 1:45 पर की गई। आपको पता है इस घोषणा को करने में इतनी देरी क्यों हुई? या यूँ कहूँ देरी हुई नहीं बल्कि जानभूझ कर की गयी|हाँ जी बिलकुल ऐसा स्वामी जी की आखिरी इच्छा के चलते किया गया|

श्री श्री श्री शिवकुमार जी ने कहा था कि चाहे किसी भी समय उनकी मृत्यु हो जाए, लेकिन उनके स्कूलों के बच्चों द्वारा मिड डे मील खाने के बाद ही इस खबर को दुनिया को बताना चाहिए।

सिद्धगंगा मठ हर दिन लगभग 9000 बच्चों और लगभग 3000 तीर्थयात्रियों को भोजन देता है। और यदि श्री श्री श्री शिवकुमार स्वामी की मृत्यु की घोषणा 11:44 पर की जाती तो उनमें से कोई भी अपने प्रिय स्वामी जी के प्रस्थान के दुःख के कारण भोजन का उपभोग नहीं करता। लेकिन स्वामी जी ऐसा नहीं चाहते थे| स्वामी जी की अंतिम इच्छा भी हजारों के लाभ में थी।

आज शाम स्वामी जी का दाह संस्कार मंगलवार 4:30 बजे तुमकुरु में 600 साल पुराने सिद्धलिंग मठ से किया जाएगा जो बेंगलुरु से लगभग 60 किलोमीटर उत्तर पश्चिम में है।

स्वामीजी पूर्णावत का अवतार थे और भारत के सबसे महान शिव ज्ञानियों में से एक थे। वह आध्यात्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक क्रांति के अग्रणी प्रकाश थे|उन्होंने ने हमेशा लोगों का भला ही सोचा और उनके लिए इतना कुछ किया भी यहाँ तक की आखिरी समय में बीमारी से जूझते हुए भी वे अपने अनुयाइयों  के बारे में सोच रहे थे|

स्वामीजी हमेशा हम सब के बीच रहेंगे|टीम पोस्टकार्ड की ओर से उन्हें शत शत नमन|

 

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