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वित्तीय वर्ष में ईंधन की कीमतें सबसे निचले स्तर पे! जानिये कैसे मोदी सरकार ईंधन की कीमत को कम करने में सफल रही

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कुछ दिन पहले विपक्ष ने प्रधान मंत्री मोदी और उनकी सरकार को पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों पर लक्षित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों और उनके मीडिया सहयोगियों ने लगातार दिन-रात पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर प्रधान मंत्री मोदी सरकार को अपमानित किया

लेकिन अब जब पेट्रोल और डीजल की कीमतें कम हो रही हैं और चालू वित्त वर्ष में ये सबसे कम है तो विपक्ष और बिकाऊ मीडिया ने एक भी शब्द नहीं कहा। विपक्ष और उसके एजेंट कहीं खो गए प्रतीत होते हैं।

हाँ यह पूरी तरह से सच है। पिछले 30 दिनों में पेट्रोल की कीमतें 8 प्रतिशत नीचे गिर गईं है। पिछले छह हफ्तों में पेट्रोल की कीमत 10 रुपये प्रति लीटर और डीजल की 8 रुपये तक कम हो गई है। आज, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में गिरावट का लगातार 10 वां दिन है| पेट्रोल की कीमत 71.44 रुपये प्रति लिटर तक कम हो गई है जबकि डीजल प्रति लीटर 65.93 रुपये पर उपलब्ध है।
पिछले 45 दिनों से कीमतों में निरंतर कमी देखी जा रही है। कच्चे तेल की कीमतों के अक्तूबर के महीने में आसमान को छूने के बाद 30 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई है।

हम सभी जानते हैं कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें कच्चे तेल की दरों से काफी प्रभावित हैं। चूंकि कच्चे तेल की दर लगातार घट रही है, इसलिए पेट्रोल और डीजल की कीमतें भी घट रही हैं।अक्तूबर की शुरुआत में कच्चे तेल की कीमत चार साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई, विश्लेषकों ने करीब 100 डॉलर की दरों की भविष्यवाणी की थी। लेकिन नवंबर के अंत तक, बाजार में कीमतें करीब 50 डॉलर तक पहुंच गईं।

भारत में 4 अक्तूबर को ईंधन की कीमतें उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थी जब पेट्रोल 84 रुपये प्रति लीटर और डीजल 75.45 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया था| लेकिन प्रधान मंत्री मोदी सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के बाद अगले ही दिन कीमतों में कमी देखी गयी। अगले ही दिन वित्त मंत्रालय ने उत्पाद शुल्क को कम कर दिया, राज्य सरकारों से बिक्री कर या वैट में कटौती करने के लिए कहा, और राज्य संचालित तेल खुदरा विक्रेताओं को हर लीटर पेट्रोल और डीजल पर 1 रुपये की हानि सहन करने का निर्देश दिया। संचयी रूप से, 5 अक्टूबर से कई राज्यों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 5 रुपये की गिरावट आई। इसके अलावा कच्चे तेल की दरों में गिरावट ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों को और नीचे लाने में मदद की

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भारत के लिए एक बड़ी राहत है क्योंकि भारत कच्चे तेल का 80 फीसदी से ज्यादा आयात करता है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के चलते न केवल पेट्रोल और डीजल की कीमतें कम हो गई हैं, बल्कि रुपये भी डॉलर के मुकाबले में मज़बूत हुआ है|

विपक्ष और उसके एजेंट अब कहां हैं ?? वे चुप क्यों हैं? वे बहुत अच्छी तरह से जानते हैं कि ईंधन की बढ़ती कीमतों और घरेलू मुद्रा में कमजोरी में प्रधान मंत्री मोदी सरकार का कोई हाथ नहीं है। यह सब कच्चे तेल की कीमत सहित विभिन्न कारकों पर निर्भर करता है लेकिन फिर भी उन्होंने अपने झूठे सिद्धांतों का प्रचार करना बंद नहीं किया और लगातार मोदी सरकार पर हमला किया

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