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जालॊर के राजपूत राजा कान्हड़देव चौहान जिसने खिल्जी की सैन्य को धूल चटाकर सोमनाथ ज्योतिर्लिंग को छीन लिया था। इतिहास भूल गया उन महान हिन्दू राजाओं को जिन्होंने धर्म की रक्षा की।

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अल्लाउद्दीन खिल्जी का नाम तो बच्चा बच्चा जनता है लेकिन क्या जालोर के राजपूत राजा कान्हड़देव चौहान के बारे में कोई जानता है जिसने खिल्जी के सैन्य के हाथों से सॊमनाथ मंदिर के ज्यॊतिर्लिंग को छीन कर उसे बचाया था? हम में से बहुत कम लोग उन हिन्दु राजा और रानियों के बारे में जानते हैं जिन्होंने धर्म के लिए अपनी प्राणॊं की बली चड़ा दी है।

जालोर के शूरवीर राजपूत राजाओं की गाथा

जालोर की मिट्टी में ही वह बात थी की वहां शूरवीर राजा पैदा होते थे। जालोर में एक कहावत प्रसिद्ध थी

” चाहे आसमान चीर जाये, जमीन ऊपर नीचे हो जाये, चाहे कवच और शस्त्र टुकडॊं में बिखर जाये और शरीर लड़ते लड़ते दम तॊड़ जाये, लेकिन जालोर कभी आत्मसमर्पण नहीं करेगा”।

इस वीर भूमी में एक वीर यॊद्धा राजा कान्हड़देव चौहान का जनम हुआ था। उनके जीते जी किसी मुघल में इतनी साहस नहीं हुई कि वह जालॊर पर कब्जा कर सके। अल्लाउद्दीन खिल्जी ने जालोर के आस पास के राजाओं को परास्त कर उन राज्यों को अपने सल्तनत के अधीन कर लिया था। गुजरात पर कब्जा करने की मनशा से उसने अपनी सेना को वहां भेजा था जिसने गुजरात में लूट पाट-रक्त पात मचाकर तहस नहस कर दिया था।

खिल्जी की सेना ने गुजरात के सॊमनाथ मंदिर को धराशाही कर मंदिर की संपत्ती कॊ लूटा ही नहीं बल्की वहां की ज्यॊतिर्लिंग को भी उखाड़ कर अपने साथ दिल्ली ले जा रहा था। उसने सभी राजाओं को निर्देश दिया था कि वे अपने राज्य में उसकी सेना को प्रवेश करने दे। सभी राजाओं ने खिल्जी की आज्ञा मान ली थी। केवल जालोर में मुघल सेना की प्रवेश पर प्रतिबंध था क्यों कि राजा कान्हड़देव खिल्जी पर विश्वास नहीं करते थे और वे जानते थे कि मुघल सेना राज्य में उत्पात मचाती है। गुजरात से दिल्ली जाते समय खिल्जी की सेना ने बिना अनुमति के जालोर के सकरणा में अपना डेरा डाल दिया। खिल्जी की सेना के पास गुजरात के सॊमनाथ मंदिर से लूटी गयी संपत्ती, शिवलिंग और हिन्दु बंधक भी थे।

जैसे ही राजा कान्हड़देव चौहान को इस बात की सूचना मिली कि खिल्जी की सेना ने जालोर के अंदर शिविर डाला है, तुरंत उन्होंने अपनी ताकतवर सेना वहां भेजी। दोनों सेनाओं के बीच भीषण युद्ध हुआ और खिल्जी की सेना राजपूत वीरॊं से हार गयी। राजपूत सेना ने सॊमनाथ लिंग और लूटी गयी संपत्ती को मुघलों से छीन कर इस्लामी आततायियों को धूल चटा दिया।

किंवदंतियों के अनुसार खिल्जी की सेना ने शिवलिंग को खंडित किया था। राजा कान्हड़देव ने उन खंडित टुकडॊं को गंगाजल में धॊकर अलग अलग मंदिरों में प्रतिष्टापित किया था। राजा कान्हड़देव से युद्ध में धूल चाटने के बाद खिल्जी ने अपने सेनापति नहर मलिक और भॊज को जालोर पर आक्रमण करने के लिए भेजा, लेकिन राजपूत सेना ने बड़े पराक्रम से युद्ध लड़ते हुए नहर मलिक और भॊज को परास्त कर उन्हें मौत के घाट उतार दिया।

इसके बाद खिल्जी ने सिवाना किले पर दूसरी बार बड़ी सैन्य भेज कर आक्रमण करवाया। इस युद्ध में खिल्जी की जीत हुई। कमलुद्दीन गर्ग के नेतृत्व वाली सेना ने जालोर किले पर कब्जा कर लिया। लगातार दॊ वर्षों तक चली इस युद्ध में राजा कान्हड़देव और उनके बॆटे बीराम देव ने वीर गती प्राप्त कर ली। किले की राजपूत रानियों ने जॊहर कर अपने सम्मान को मुघलों के हाथों लुटने से बचा लिया।

खिल्जी की सेना ने महादेव के शिवलिंग और लूटी हुई संपत्ती को ढूढंते हुए किले का चप्पा चप्पा छान मारा लेकिन शिवलिंग नहीं मिला। राजा कान्हड़देव और उनके पुत्र ने धर्म को बचाते हुए अपने प्राणॊं की आहुती दे दी लेकिन हमें आज भी खिल्जी-घॊरी-अक्बर-औरंगजेब के बारे में पढ़या जाता है। कितनी दौर्भाग्य की बात है यह।


Citation:myindiamyglory

**Featured image for representation purpose only**

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