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कैसे मर्यादा पुर्शोतम श्री राम की मृत्यु हुई?

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रामायण हिन्दू धरम की सब्सी पवित्र कथा जिसे सुनने से ही आत्मा तृप्त हो जाती है जिसमे भगवान् श्री राम ने रावण को मार के अधर्म का विनाश किया था और धर्म की स्थापना की थी|

दरअसल माता सीता के भूमि देवी में आलोप होने के बाद श्री राम अकेले हो गये थे लेकिन उसके भी कई साल तक राज पाठ सम्भाला प्रंतु उसके बाद उन्होंने सारी जिम्मेवारी अपने बेटों और भाईओं के बेटों को देदी थी|

तब एक दिन एक ऋषि श्री राम से मिलने आये और उन्होंने कहा की वो राम से एकांत में बात करना चाहते है तब श्री राम के साथ वहां लक्ष्मन जी भी  थे|श्री राम ने कहा आप इनके सामने बात कर सकते है लेकिन ऋषि ने कहा नही वे एकांत में बात करना चाहते है और अगर उस समय वहां कोई आया तो उसे मृत्यु मिलेगी|

यह बात सुन कर लक्ष्मण वहां से चलेगये और द्वार पर जाकर पहरा देने लगे तब श्री राम को एकांत में पाकर वो ऋषि अपने असली अवतार में आगया और श्री राम को कहने लगे की आप का समय धरती पर खत्म हो चूका है और महा विष्णु अवतार से मिल जाने का समय आगया है पर मैं आपको मृत्यु नही दे सकता|आप को स्वयं ही अपना शरीर त्यागना होगा|

दूसरी तरफ महा ऋषि दुर्वासा भी जान चुके थे की यमराज श्री राम के प्राण लेने आने वाले है तो जल्द ही वो दरबार पहुंचे और श्री राम से एकांत में मिलने के लिए कहा|लेकिन लक्ष्मण जो बहार खड़े थे उन्होंने उन्हें रोका जिससे वो क्रोधित होगये और कहा की अगर तुमने मुझे अन्दर नही जाने दिया तो मैं तुम्हे श्राप दे दूंगा इस तरह लक्ष्मण फास गये|एक तरफ अन्दर जाने से उनकी मृत्यु हो जाती वहीं दूसरी टफ दुर्वासा उन्हें श्राप दे देते|

ये सब देख कर लक्ष्मण समझ गये की उनका शरीर छोड़ने का समय आगया है तो उन्होंने सरायु नदी में जाकर अपना शरीर त्याग करदिया|तब श्री राम भी जान चुके थे की उनका शरीर त्याग करने का समय आगया है लेकिन हनुमान के रहते वो भी शरीर का त्याग नही कर सकते थे क्यूँ की हनुमान यमराज को श्री राम के प्राण नही लेने देते|

तब श्री राम ने जमीन की एक दरार में अपनी अंगूठी फैंक दी|तब हनुमान वो अंगूठी धुंडने के लिए छोटा रूप लेकर उस दरार में चले गये|जब हनुमान अन्दर पहुंचे तो उन्होंने महसूस किया की वे नाग लोक पहुंच चुके है और वहां उन्हें नागदेव वासुकी मिले और वासुकी ने कहा की आप उस पहाड़ पर अंगूठी धुंद सकते है तब हनुमान उस पहाड़ पर गये|

वहां पर अनेक अंगूठियाँ थी|हनुमान ने एक अंगूठी उठायी और वो श्री राम की अंगूठी थी|फिर उन्होंने एक और अंगूठी उठायी और वो भी श्री राम की थी तब हनुमान ने देखा की वहां सब अंगूठियाँ राम जी की अंगूठियों की तरह लगती थी तब हनुमान अचंबित होगये तब वासुकी ने कहा की ये दुनिया समय चक्र में फसी हुई है ,एक समय चक्र को एक कल्प कहते है और हर कल्प में चार युग होते है|

हर युग में जब एक हनुमान इस अंगूठी को धुंडने के लिए आता है तो ऊपर श्री राम शरीर त्याग देते है तब हनुमान समझ गये की श्री राम का धरती से जाने का समय आगया है तब श्री राम सरायु नदी में गये और अपना शरीर का त्याग करदिया और महा विष्णु अवतार में आगये और हनुमान को वरदान दिया गया की वे कलयुग के अंत तक राम नाम की ख्याति दुनिया में बड़ाते रहेंगे|इस तरह श्री राम भी इस भौतिक दुनिया में हमेशा के लिए न रह सके और वैकुंठ में नारायण अवतार में मिल गये|

 

जय श्री राम

 

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