अभिमत

अब वक्त आ गया है कि बॆटियों को बचाने के लिए सरकारें ठॊस कदम उठाए और महिलाओं को सम्मान से जीने का अधिकार दिलाए।

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एक तरफ़ भारत की बॆटियां गॊल्ड कॊस्ट कॉमनवेल्त खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर भारत का नाम रॊशन कर हमारा शीर्ष गर्व से उठा ने कि लिए वजह दे रही है। लेकिन दूसरी तरफ़ देश के कोनें से एक घिनौने अपराध की खबर आती है जिससे सिर शर्म से झुक जाती है। जिस देश में स्त्री को देवी के रूप में पूजा जाता है, उस देश में एक छॊटी सी बच्ची के साथ हैवानियत भी कांप जाये ऐसा राक्षसी कृत्य किया जाता है। दौर्भाग्य यह है कि बलात्कार जैसी घिनौने पाप करनेवालों की पैरवी करनेवाले और उसमें भी सांप्रदायिकता दूंढ़नेवाले हमारे बीच में है।

शर्म आनी चाहिए हमारे समाज, राजनेता और सरकारों को। आज देश में हालात ऐसे हो गये हैं कि घर में बॆटी पैदा होती है तो खुशी से ज्यादा डर लगने लगता है। जिस घर में बॆटियां हैं, उन माँ-बाप की हालत क्या होती है ये वो ही जाने। बलात्कार जैसे आम बात हो चुकी है, अब ऐसे लगने लगा है कि सिस्टम से लेकर समाज तक इन घटनाओं के प्रति संवेदना व्यक्त करना भूल गया है। जब भी ऐसी घटना घटती है तो कुछ लोग सड़कों पर कैंडल जलाते हैं, और कुछ लोग सॊशियल सैट पर आक्रॊश जताते हैं। चार दिन तक मीडिया भी बडी ज़ॊरॊ शॊरॊ से इस पर डिबॆट करती है। पाँचवे दिन फिर सब सुन्न पड़जाते हैं। वर्षों से यही चलता आया है।

सरकारें बदली लेकिन महिलाओं को न्याय नहीं मिला। जब भी महिला पर बलात्कार होता है दॊष उसी को दिया जाता है कि उसके पहनावे सही नहीं, उसके चाल चलन सही नहीं, वो बाहर गयी ही क्यों? पाँच माह की बच्ची से लेकर नब्बे वर्ष की बुज़ुर्ग महिला, यहां तक नाबालिक लडकों पर बलात्कार किया जाता है। विडंबना है कि हमारा कानून लडको के साथ हुए यौन उत्पीडन को बलात्कार मानता ही नहीं और नाही उन्हें कभी न्याय मिलता है।

देश के कानून में बदलाव लाने का वक्त आ गया है। कम से कम बलात्कार जैसे घिनौने पाप में राजनीती नहीं करनी चाहिए। बलात्कारी किसी भी जाती, दल या आयू का हो, उसे कड़ी सी कड़ी सज़ा मिलनी चाहिए। सज़ा ऐसी होनी चाहिए कि व्यक्ती की आत्मा कांप जाये और अपराध को अंजाम देने से पहले वह सौ बार सॊचे। इंटरनॆट के युग में बलात्कार का मामला दिन ब दिन बड़ता जा रहा है। इसकी एक वजह है कि आज कल बच्चे भी इंटरनेट के माद्यम से अश्लील वेबसाईट को आसानी से देख सकते हैं। ऐसे अश्लील वेबसाईट को बंद कर देना चाहिए जिससे समाज में मानसिक स्वास्थ बिगड़ता हो।

मनोविज्ञानिकों के रीसर्च के अनुसार जब व्यक्ती अश्लील वीडियो देखता है और शराब के नशे में रहता है तो वह ज्यादा आक्रामक हो जाता है। अक्सर यह देखा गया है कि बलात्कार करनेवाला व्यक्ती शराब के नशे में होता है। शराब का सेवन और अश्लील साईट को देखने के बाद कॊई भी व्यती अपना दिमाग में संतुलन नहीं रख पाता यह अनुसंधान द्वारा भी साबित किया जा चुका है। अब वक्त है कि सरकारें इस दिश में तुरंत हरकत में आये और आज ही देश में बलात्कार के खिलाफ़ कड़ा कानून बनाये। जल्द से जल्द अश्लील सईट और शराब पर बैन लगाये। उम्मीद तो नहीं है कि कॊई भी सरकार इस विषय में सजग हो कर ज़िम्मेदारी से काम करेगी। लेकिन अगर देर हो गयी तो वो दिन दूर नहीं जब जनता कानून अपने हाथों में ले लेगी और सिस्टम बस देखती रह जायेगी। भारत जैसे लोकतांत्रिक देश के लिए यह अच्छी बात नहीं है।

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