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चीन में इस्लाम का समाजवादिकरण? अगले पांच वर्षों के भीतर इस्लाम को समाजवाद के अनुकूल बनाने के लिए बीजिंग ने कानून पारित किया!!

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संयुक्त राष्ट्र द्वारा झिंजियांग क्षेत्र में मुसलमानों के खिलाफ चीन के ‘पुनः स्कूली शिक्षा’ अभियान को चिह्नित करने के महीनों बाद भी बीजिंग ने अगले पांच वर्षों के भीतर समाजवाद के साथ इस्लाम को ‘सुसंगत’ बनाने के लिए एक कानून पारित किया है। चीन के मुख्य अंग्रेजी अखबार ग्लोबल टाइम्स  ने इस बात की पुष्टी की है। शनिवार (5 जनवरी) को बीजिंग में आयोजित एक सेमिनार में बीजिंग, शंघाई, हुनान, युन्नान और किन्हाई प्रांतों सहित आठ प्रांतों और क्षेत्रों के स्थानीय इस्लामी संगठनों के प्रतिनिधियों ने पांच साल (2018-22) के लिए इस्लाम को समाजवाद में परिवर्तित करने के सांकेतिकरण पर चर्चा की।

चीन ने इतना बड़ा फैसला लिया है लेकिन मजाल है कि चीनी सरकार के खिलाफ कॊई सड़कों पर उतरे और सरकार का विरॊध करें! दुनिया भर के सेक्यूलर और बुद्दिजीवि एक दम सुन्न है। अगर यही बात भारत में हुई होती तो अब तक संसद से लेकर सड़क तक हुड़दंग मच गया होता। इस्लामिक एसोसिएशन की वेबसाइट पर प्रकाशित एक बयान के अनुसार, सभी आठ क्षेत्र के इस्लामी संगठनों के प्रतिनिधि अगले पांच वर्षों के लिए Islamic Sinicization के मूल नीति के बात पर सहमत हुए हैं। चाइना इस्लामिक एसोसिएशन के प्रमुख यांग फैमिंग ने कहा कि प्रासंगिक उपायों को लागू किया जाना चाहिए, जिसमें व्याख्यान आयोजित करना और समाजवादी मूल मूल्यों, कानूनों और पारंपरिक संस्कृति पर प्रशिक्षण प्रदान करना, साथ ही साथ मुसलमानों को सकारात्मक भावना के साथ ज्वलंत कहानियों के माध्यम से मार्गदर्शन करना शामिल है।

Islamic Sinicization की रूपरेखा इस्लाम के पापीकरण के प्राथमिक कार्य और उपायों को भी स्पष्ट करती है। आश्चर्य की बात यह है कि वहां के इस्लामिक संगठनों के प्रतिनिधी इस बात से सहमत है! जब की भारत में तीन तलाख, बहु विवाह, हिजाब जैसे कुप्रथाओं के बारें में बात करना भी पाप है। चीन जैसा देश Islamic Sinicization जैसा कानून पारित भी कर देता है लेकिन यहां पर तीन तलाख पर कानून बनाने पर सदन को ही ठप्प कर दिया जाता है।

चीन में कई जगहों पर इस्लाम पर प्रतिबंद लगाया गया है। चीन के उयिगर मुसलमानों को ‘पुनः स्कूली शिक्षा’ अभियान के नाम पर शिविरों में कैद कर उन्हें कट्टरपंथी इस्लाम त्याग ने के लिए और समाजवाद को अपनाने के लिए मजबूर किया जा रहा है। चीन में जो दम है वह दुनिया के किसी भी देश भी नहीं है यह कटु सत्य है।

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