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सर्जिकल स्ट्राइक 3.0! भारतीय और म्यांमार की सेनाओं ने मिज़ोरम की सीमाओं पर मौजूदआतंकी शिविरों को नष्ट कर दिया

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जब लाखों भारतीय बालाकोट एयर स्ट्राइक का जश्न मना रहे थे और कुछ भारतीय इसका सबूत मांग रहे थे, भारतीय सेना ने म्यांमार सेना की मदद से भारत-म्यांमार सीमा पर आतंकवादियों पर एक और घातक और सफल सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया।

यह सर्जिकल स्ट्राइक 17 फरवरी से 2 मार्च के बीच हुई थी, लेकिन इसके लिए तैयारी पिछले दो महीनों से हो रही थी। मकसद बड़े पैमाने पर कलादान मल्टी-मोडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट के लिए पैदा हो रहे खतरे को खत्म करना था, जो कोलकाता बंदरगाह को म्यांमार में सिटवे पोर्ट से जोड़ता है। यह परियोजना आतंकवादियों की हिट लिस्ट में थी क्योंकि इससे मिजोरम और कोलकाता के बीच यात्रा की दूरी लगभग एक हजार किलोमीटर कम हो जाएगी।

स्ट्राइक पर बोलते हुए, एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने कहा, “एक सौदा किया गया था कि मिजोरम से सटे कार्रवाई के बाद म्यांमार की सेना भारत को निशाना बनाने वाले अन्य समूहों के विद्रोही शिविरों को खत्म कर देगी। इसका परिणाम एनएससीएन (के) के मुख्यालय, तगा को पूरी तरह से मिटा दिया गया। हमारे द्वारा प्रदान की गई विशिष्ट सूचनाओं के आधार पर म्यांमार सेना ने इन शिविरों को खत्म कर दिया और अब उन पर कब्जा कर रही है ”।

यह मेगा ऑपरेशन (स्ट्राइक) दो चरणों में हुआ था। पहले चरण में, भारतीय और म्यांमार की सेनाओं ने मिज़ोरम की सीमाओं पर मौजूद नव निर्मित आतंकी शिविरों पर हमला किया और उन्हें नष्ट कर दिया। दूसरे चरण में, सेनाओं ने नागा समूह, एनएससीएन (के) पर हमला किया।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट में कहा गया है, “ऑपरेशन के लिए तैनाती में भारतीय सेना, असम राइफल्स और अन्य सेना इकाइयों के विशेष बल शामिल थे। विद्रोही समूहों और उनके शिविरों की गति का सटीक आकलन करने के लिए संचालन के दौरान हेलीकॉप्टर, ड्रोन और अन्य निगरानी उपकरणों का भी उपयोग किया गया था।

इस गुप्त ऑपरेशन को “ऑपरेशन सनराइज” के रूप में नामित किया गया था और असम राइफल्स और भारतीय सेना रेजिमेंट के कई अन्य दल इस संयुक्त ऑपरेशन का हिस्सा थे।


Kashish

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