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योगी सरकार द्वारा एक साहसी कदम में, मथुरा में पवित्र गोवर्धन पर्वत के पास 7 अवैध इस्लामी मंदिरों को ध्वस्त कर दिया गया

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उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की अगुवाई में उत्तर प्रदेश सरकार ने अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने और सत्ता में रहने के लिए बहुसंख्यक समुदायों की भावनाओं के साथ खेलकर हमेशा अल्पसंख्यकों का साथ दिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य में सत्ता संभालने के बाद इस्लामिक यादव प्रदेश को उत्तम प्रदेश में बदल दिया|

मुख्यमंत्री योगी ने गौरवशाली हिंदू संस्कृति और इतिहास को पुनर्जीवित करने के लिए कई कदम उठाए हैं जो अखिलेश यादव सरकार के कारण राज्य में कहीं दब सी गयी थी| अयोध्या में “भव्य दिवाली” मनाने और इलाहाबाद को प्रयागराज और फैजाबाद को अयोध्या में बदलने के बाद अब योगी सरकार ने एक और ऐतिहासिक कदम उठाया है।

मथुरा में गोवर्धन पर्वत की महिमा को लौटाने के लिए, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने सात अवैध ‘मजार’ या इस्लामी स्थलों को हटा दिया है जो पवित्र गिरिराजजी के आसपास में स्थित थी।

गोवर्धन पर्वत हिंदुओं के बीच विशेष महत्व रखता है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान कृष्ण ने बारिश के देवता इंद्र के क्रोध से लोगों को बचाने के लिए सिर्फ एक उंगली पर पहाड़ी उठाई थी, जिन्होंने लगातार बारिश से ब्रज के लोगों को गहरी परेशानी में डाला था। पहाड़ी भारत भर में हिंदुओं के बीच लोकप्रिय और आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण है। पहाड़ी की परिक्रमा करने के लिए देश के सभी हिस्सों से हिंदू वहां जाते हैं।

लेकिन इन स्थलों और अन्य स्थलों जो की उस इलाके के पास थे के कारण हिंदुओं को उनकी प्रार्थनाओं में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा था। जिसके बाद उन्होंने पर्यावरण के लिए गैरकानूनी अतिक्रमण और यातायात कुप्रबंधन के खिलाफ “नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल” में शिकायत दर्ज की। क्षेत्र का निरीक्षण करने के बाद प्राधिकरण निकाय ने 2015 में एक आदेश पारित किया जिसमें राज्य सरकार को गोवर्धन पर्वत के चारों ओर सभी अतिक्रमण को हटाने का निर्देश दिया गया।

रिपोर्ट में कहा गया कि पूरे “परिकर्मामार्ग” को नो कंस्ट्रक्शन जोन के रूप में नामित करने के लिए कहा गया है| रिपोर्ट में कहा गया “सीमा रेखा के अनुसार वन भूमि की पहचान के लिए एक अभियान चलाया जाए और सभी अतिक्रमण समय से पहले हटा दिए जाएँ।
रिपोर्ट में ये भी कहा गया कि अवैध निर्माण ने भक्तों द्वारा दर्शन करने के दृष्टिकोण को अवरुद्ध किया है तो इन अवैध निर्माणों को ध्वस्त कर दिया जाए।

ये आदेश ट्रिब्यूनल द्वारा पारित किया गया था ताकि भक्तों को दर्शन और परिकर्मा के दौरान कोई बाधा नहीं हो। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि मौजूदा आश्रमों के पीछे परिक्रमा मार्ग के चारों ओर एक 10 मीटर की चौड़ी सेवा सड़क बनाई जाए और उसके इर्द गिर्द रिंग रोड बनाई जाई| रिपोर्ट में ये भी कहा गया कि आग और चिकित्सा सेवाओं के बिना परिक्रमा मार्ग पर वाहन यातायात को पूरी तरह से बंद किया जाना चाहिए|

लेकिन पहले की सरकारों ने ट्रिब्यूनल के आदेशों पर कोई ध्यान नहीं दिया क्योंकि इससे उनका वोट शेयर प्रभावित होता। अब योगी सरकार ने भक्तों द्वारा सामना की जाने वाली समस्या को ध्यान में रखते हुए आदेशों को लागू किया है।
हालांकि, राष्ट्रीय ग्रीन ट्रिब्यूनल में मामले से जुड़े वकील अमित तिवारी ने कहा कि शुरुआत में, अतिक्रमण की सूची में सात ‘मजार’ या इस्लामी मंदिर शामिल नहीं थे, जिन्हें हाल ही में एक निरीक्षण के दौरान परिक्रमा मार्ग के पास पहचाना गया था।


Source: Mynation

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