राजनीति

RBI के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने 2019 चुनावों के लिए कांग्रेस से हाथ मिलाया! रोजगार पर उनके द्वारा लिखी गई रिपोर्ट को कांग्रेस के घोषणापत्र में शामिल किया जाएगा

8 Shares

मोदी सरकार की हमेशा आलोचना करने वाले आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघु राम राजन ने अब कांग्रेस सरकार से हाथ मिला लिया है। नवभारत टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार यह सामने आया है कि रघुराम राजन रोजगार सृजन और कृषि के एजेंडों पर आधारित 2019 का चुनाव लड़ने के लिए कांग्रेस का मार्गदर्शन कर रहे हैं

कांग्रेस 2019 के चुनाव के लिए अपने घोषणापत्र में रोजगार कैसे पैदा कर सकती है, इसकी सभी संभावनाओं का चार्ट तैयार करेगी। भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने भारत में रोजगार की स्थिति पर एक विस्तृत रिपोर्ट लिखी है, जिसे 2019 के चुनावों से पहले कांग्रेस के विज़न डॉक्यूमेंट में शामिल किया जाना है।

इसके चलते पूर्व आरबीआई गवर्नर और प्रसिद्ध अर्थशास्त्री के राजनीति में शामिल होने की अटकलों को गति मिली है। पूर्व आरबीआई गवर्नर कांग्रेस पार्टी में शामिल होंगे या नहीं यह तो समय ही बताएगा। लेकिन पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने स्वीकार किया है कि उन्होंने रोजगार के बारे में एक रिपोर्ट दी है जिसे कांग्रेस के घोषणा पत्र में जगह दी जा सकती है।

रघुराम राजन हमेशा से ही कांग्रेस पार्टी के बेहद करीबी रहे हैं, इस तथ्य को नकारा नहीं जा सकता। उन्होंने UPA-II युग के दौरान अगस्त 2012 से सितंबर 2013 तक कांग्रेस पार्टी के मुख्य आर्थिक सलाहकार के रूप में कार्य किया था, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) में गवर्नर बनने से पहले|

पूर्व RBI गवर्नर UPA-II युग के दौरान शुरू की गई 80:20 स्वर्ण आयात योजना के लिए जांच एजेंसियों की जांच के दायरे में है। देश में सोने के आयात पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से यह योजना अगस्त 2013 में शुरू की गई थी। व्यापक आर्थिक संकेतक, विशेष रूप से चालू खाता घाटा (निर्यात पर आयात) व्यापक हो रहा था और रुपया नीचे जा रहा था। इसलिए सरकार ने सोने के आयात पर अंकुश लगाने के लिए 80:20 योजना लाई। लेकिन बाद में, CAG की रिपोर्ट में, इस योजना में बड़ी अनियमितताएं पाई गईं और 13000 करोड़ के PNB धोखाधड़ी मामले के मुख्य आरोपी नीरव मोदी और मेहुल चोकसी जैसे ज्वैलर्स को इस योजना से लाभ पहुंचा|

इसके अलावा, मोदी सरकार द्वारा इस योजना की समीक्षा की गई और इसमें कई विसंगतियां पाई गईं। इसलिए सरकार ने RBI से अनुरोध किया कि वह इस योजना को खारिज करदे जिसे आरबीआई ने नवंबर 2014 में लागू किया। “तदनुसार, समय-समय पर परिपत्र संख्या 25 दिनांक 14 अगस्त 2013 से शुरू होने वाली योजना के बारे में सभी निर्देश तत्काल प्रभाव से वापस ले लिए गए,” RBI ने नोटिस ज़ारी किया।

दूसरी ओर वह हमेशा मोदी सरकार के कड़े आलोचक रहे हैं। उन्होंने कई बार मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों की सार्वजनिक रूप से आलोचना की है। उन्होंने हमेशा पीएम मोदी सरकार द्वारा किए गए जीएसटी और डिमोनेटाइजेशन जैसे बड़े सुधारों की आलोचना की है।

यह इस बात पर प्रकाश डालता है कि उन्होंने मोदी सरकार की उन नीतियों की आलोचना क्यूँ की जिन्हें देश भर में सराहा गया है|

8 Shares
Tags

Related Articles

FOR DAILY ALERTS
 
FOR DAILY ALERTS
 
Close