अभिमतराजनीति

एक तरफ निदा के खिलाफ चोटी काटने और पत्थर मारने का फतवा दूसरी तरफ सरकारी प्राइमरी स्कूल का इस्लामीकरण!! क्या भारत को इस्लामिक देश बनाना चाहते है कट्टरपंथी?

भारत में समान नागरिक संहिता कब लागू की जाएगी ?

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कुछ दिन पहले बुधिजीविओं द्वारा इस बात कि शंका जताई जा रही थी कि अगर मोदी सरकार 2019 में फिर से चुन के आती है तो भारत को “हिन्दू पाकिस्तान” बनने से कोई नही रोक सकता| इन बुधिजीविओं को इस बात कि चिंता सता रही थी कि सरकार भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने पे ज़ोर दे रही है और अल्पसंख्यकों के बारे में नही सोच रही है जबकि ऐसा कुछ नही है| मोदी सरकार ने तो हमेशा सब को समान नज़रों से ही देखा है और हर वर्ग के उत्थान के लिए काम कर रही है और फिलहाल देश में हो रही घटनाएं तो किसी और ही संकेत कर रही है| इन घटनायों को देख कर तो ऐसा लगता है कि कुछ कट्टरपंथी तो भारत को इस्लामिक देश बनाने पे तुले हुए है|

हाल ही में उत्तर प्रदेश में बरेली के आला हजरत खानदान की पूर्व बहू निदा खान के खिलाफ एकबार फिर से मुस्लिम रुढ़िवादियों ने फतवा जारी किया है| निदा खान के अलावा आला हजरत खानदान की ही एक अन्य महिला फरहत नकवी के खिलाफ भी फतवा जारी किया गया है| यह फतवा ऑल इंडिया फैजान-ए-मदीना ने जारी किया है| ऑल इंडिया फैजान-ए-मदीना काउंसिल के अध्यक्ष मुईन सिद्दीकी नूरी ने निदा और फरहत की चोटी काटकर लाने और उन्हें पत्थर मारने वाले को 11,786 रुपये का इनाम देने का ऐलान किया है|

इतना ही नहीं निदा और फरहत को फतवे में 3 दिन के अंदर देश छोड़ने का आदेश भी दिया गया है और पिछले कुछ दिन पहले भी निदा पर एक फतवा जारी किया गया था जिसमे उसका “हुक्का–पानी” बंद कर दिया गया था और ये भी कहा गया था अगर वै बीमार भी होती है तब भी उनकी कोई सहायता नही की जायेगी| क्या कसूर है निदा का कि वो हलाला, तीन तलाक और बहुविवाह जैसी कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठा रही है|

इस्लामियत के अनुसार देश के कानून बनाने और चलाने का ये मामला अभी थमा ही नही था कि उत्तरप्रदेश से इस्लामियत के रंग में देश को रंगने का एक और मामला सामने आया है| उत्तरप्रदेश के देवरिया जिले के सलेमपुर कस्बे में सरकारी प्राथमिक विद्यालय नवलपुर का नाम बदलकर इस्लामिया प्राइमरी स्कूल कर दिया गया।यही नही मौजूदा स्कूल नियमों का उलंघन कर के छुट्टी का दिन भी रविवार के बजाए शुक्रवार (जुमे के दिन) रखा गया है| इसके इलावा ये भी पाया गया कि स्कूल के सभी दस्तावेज भी उर्दू भाषा में है| जबकि कानून सरकारी कामकाज सिर्फ हिंदी या अंग्रेजी में किया जा सकता है।

शिक्षा विभाग की टीम शुक्रवार को जब स्कूल में जांच के लिए पहुंची थी तो वहां ताला लगा था। मौके से ही प्रिंसिपल खुर्शीद अहमद को फोन लगाया गया और दस्तावेज समेत बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) कार्यालय में बुलाया गया। पूछताछ में प्रिंसिपल ने बताया कि नवलपुर के स्कूल में पांच शिक्षक और 95% छात्र मुस्लिम हैं। उनकी पोस्टिंग 2008 में हुई थी और तब से ही वहाँ ऐसा चल रहा है| इसके इलावा जांच के दौरान  जिले में ऐसे चार और स्कूल होने की बात भी सामने आई है|

तथाकथित धर्मनिरपेक्ष लोगों का देश को इस्लामीकरण करने का इरादा है| इसलिए ही तो वो कुछ दिन पहले शरियत न्यालय खोलने की भी बात करते है तांकि उन्हें रोकने वाला कोई न हो और वो अपने इस अजेंडे को अंजाम दे सके| सरकार को चाहिए कि जल्द से जल्द भारत में समान नागरिक संहिता लागू की जाए| हिन्दुस्तान एक लोकतांत्रिक देश है| अल्पसंख्यक द्वारा प्रमुख संविधान को खत्म करने और देश के भीतर समानांतर प्रणाली चलाने की कोशिश और देश को इस्लामीकरण के इरादे को जड़ से खत्म करना देश के हित के लिए बेहद जरूरी है|


Source: Aaj Tak

Bhaskar

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