संस्कृति

भारत का वह मंदिर जिसने सुनामी को भी पीछे हटा दिया था! तमिलनाडू के थिरुचेंदूर सुब्रह्मण्य मंदिर को सुनामी भी नष्ट नहीं कर पायी!!

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भारत के हर मंदिर के निर्माण के पीछे एक रहस्य छुपा है। इन मंदिर के अंदर छुपे अनसुलझे रहस्य को आज तक कॊई सुलझा नहीं पाया। ऐसा ही एक मंदिर तमिलनाडू में है जिसने सुनामी को भी पीछे हटा दिया था। कॊई माने या ना माने किन्तु यह सत्य है। कुछ घटनाओं का व्याख्या आधुनिक विज्ञान के तर्क से भी परेह है। तमिलनाडु के पूर्वी तट पर स्थित तूतीकोरिन जिले में थिरुचेंदूर सुब्रह्मण्य मंदिर ने सुनामी को भी पीछे हटा दिया था।

आप को याद होगा कि 26 दिसंबर, 2004 को पूरा का पूरा तमिलनाडू सुनामी की चपेट में आया था। तमिलनाडू के तट पर बसे सारे शहर ध्वस्त हो गये थे। लेकिन सुनामी की लहर थिरुचेंदूर सुब्रह्मण्य मंदिर को छू भी नहीं रही थी! समुंदर के विशाल लहरें मंदिर को स्पर्श नहीं पाई थी, जबकि आसपास के इलाके में इसने कहर बरसाया था। ऐसे कैसे संभव हो पाया कि सुमानी के लहर ने मंदिर को स्पर्श तक नहीं किया? एक पत्थर के टैबलेट पर एक पुराना शिलालेख बताता है कि भगवान वरुण ने भगवान कार्तिकेय से वादा किया था कि समुद्र के क्रोध के कारण मंदिर में कोई नुकसान नहीं आएगा। और आश्चर्य की बात यह है कि सुनामी भी इस मंदिर को नष्ट नहीं कर पायी!

वैज्ञानिक कारण

Oceanographers.net नामक एक मंच में एक पोस्ट है जिसमें एक वैज्ञानिक ने दावा किया है कि इस रहस्य को उन्होंने सुलझाया है। साइट पर किए गए शोध के बाद, वैज्ञानिक ने पाया कि साइट की भौगोलिक स्थिति ने लहरों से मंदिर की सुरक्षा में एक प्रमुख भूमिका निभाई थी। मंदिर को उस जगह बनाया गया है जहां ज्वारीय लहरें शहर के अन्य हिस्सों को मारती हैं, वह मंदिर को स्पर्श नहीं करतीं, और चट्टानों की प्राकृतिक ऊंचाई लहरों की श्रृंखला को तोड़ देती है। लेकिन अंत में वैज्ञानिक ने उन लोगों को श्रेय दिया जिन्होंने इस स्थान को सही तरीके से चुना और सावधानीपूर्वक अध्ययन के बाद यहां पर मंदिर बनाया।

लेकिन अब सवाल यह उठता है कि कई वर्ष पूर्व बनाई गयी इस मंदिर को ऐसे एक सुरक्षित जगह पर बनाया किसने और कैसे? हमारे पूर्वजों के पास ऐसी कौन सी तकनीत थी जिससे उन्होंने सुनामी कि लहर को मात देने वाली एक अद्भुत मंदिर बनाई? उनके पास इन चीज़ों का ज्ञान कहां से आता था? मंदिर के निर्माण की कोई विशिष्ट तारीख नहीं है, लेकिन मूल संरचना लगभग 1000 साल पहले बनाई गई थी। 1000 साल या उससे भी पूर्व से ही हमारे पूर्वजों के पास ऐसे तकनीक थी जो आज के आधुनिक विज्ञान युग में नहीं है।


Source: topyaps

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