देशभक्तिराजनीति

क्या आप जानते हैं जवाहरलाल नेहरू ने उस व्यक्ति को सम्मानित किया था जिसने सुभाष चंद्र बोस की INA का खजाना चुरा लिया था

यदि पाकिस्तान भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान करता है, तो हम समझ सकते हैं कि उसके ऐसा करने की क्या वजह है| लेकिन जब खुद के देश के लोग ही ऐसा विश्वासघात करते हैं तो ये समझ नहीं आता| और जब कोई उच्च पद पे बैठा हुआ इंसान जिसे देश के जांबाजों का सम्मान करना चाहिए वो ही उनका अपमान करता है तो ये देख कर मन आहात होता है

क्या आप जानते हैं कि भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने नेताजी बोस का सबसे बड़ा अपमान किया था? पिछले साल मोदी सरकार ने नेताजी के कई दस्तावेजों की जांच शुरू की तो कई चौंकाने वाली बातें सामने आई। दस्तावेजों से खुलासा हुआ कि नेहरू ने उस व्यक्ति को सम्मानित किया था जिसने नेताजी की भारतीय राष्ट्रीय सेना का खजाना चुराया था।

यह खजाना 700,000 डॉलर का था और इसका उल्लेख लेखक अनुज धर ने अपनी 2012 की पुस्तक “भारत का सबसे बड़ा कवर-अप” में भी किया था।

मुंगा राममूर्ति और एसए अयेर, ये दो व्यक्ति थे जो आईएनए फंडों के गबन में शामिल थे। अफसोस की बात है कि एसए अयेर को नेहरू के प्रमुख पंचवर्षीय योजनाओं का सलाहकार बनाया गया था और राममूर्ति के परिवार ने जापान में तरक्की की जिसके बाद अंततः वे चेन्नई में बस गए।

यहां तक ​​कि यह भी संदेह था कि इन दोनों ने हीरे, आभूषण, सोना और नेताजी बोस के अन्य मूल्यवान सामानों के साथ भी छेड़खानी की है|

नेहरू को नेताजी से इतनी नफरत क्यों थी?

भारतीय राष्ट्रीय सेना (INA) के गठन के तुरंत बाद, अंग्रेजों को अहसास होने लगा था की ये उनके सामने एक कड़ी चुनौती है। भारतीय आईएनए (INA) का बड़े पैमाने पर समर्थन कर रहे थे और इसके कारण, प्रत्येक भारतीय के दिल में नेताजी बोस का नाम उत्कीर्ण हो गया था। इसलिए स्वतंत्रता प्राप्त करने के बाद, यह तय था कि नेताजी ही भारत के पहले प्रधान मंत्री होंगे। अगर नेताजी भारत में होते तो नेहरू के प्रधानमंत्री बनने का लालच कभी नहीं पूरा होता। उनके लालच को पूरा करने का एकमात्र तरीका भारत में नेताजी के अस्तित्व को समाप्त करना था|

नेहरू चाहते थे कि नेताजी अंग्रेजों के हाथों मरें

द्वितीय विश्व युद्ध में बोस ने एक्सिस शक्ति की मदद से आईएनए का गठन किया जो ब्रिटिश और अन्य प्रमुख शक्तियों के खिलाफ थे। जैसे ही जापान ने आत्मसमर्पण किया वह बहुत परेशान हो गये और उन्होंने सभी आशाओं को खो दिया। यदि वह वापस आ गये होते, तो निश्चित रूप से, ब्रिटिश उन्हें सजा देने का इंतजार कर रहे थे जो मृत्यु से कम नहीं थी |

नेताजी के अंगरक्षक उस्मान पटेल ने खुलासा किया था कि नेहरू और महात्मा गांधी नेताजी को अंग्रेजों को सौंपने की योजना बना रहे थे। जवाहरलाल नेहरू, महात्मा गांधी, मोहम्मद अली जिन्ना और मौलाना आज़ाद ने ब्रिटिश जज के साथ एक समझौता किया था कि अगर नेता जी ने भारत में प्रवेश किया तो वे नेताजी को ब्रिटिश को सौंप देंगे|

जिसने गलती की है उसे हमेशा पकड़े जाने का डर रहता है| नेहरू ने सिर्फ नेताजी को ही नहीं बल्कि हर भारतीय को भी धोखा दिया था। यह कहा गया था कि 1945 के विमान दुर्घटना में नेताजी की मृत्यु हो गयी है|

क्या होता अगर नेताजी अपने परिवार के साथ संपर्क में होते? इस डर के कारण, नेहरू लगभग 20 वर्षों तक नेताजी बोस के परिवार पर जासूसी करते आया है। नेहरू की इस सख्ती के कारण नेताजी का सार्वजनिक रूप से सामने आना लगभग असंभव था।

भारत को आजादी दिलाने वाले नेताजी बोस हर भारतीय के दिल में हैं। हर भारतीय उनका सम्मान करता है


Kashish

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