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चीन ने पहली बार अरुणाचल प्रदेश और पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) को भारत का अभिन्न अंग स्वीकार किया

भारत के लिए एक कूटनीतिक जीत में, चीन ने पहली बार स्वीकार किया कि अरुणाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। पहली बार उसने बेल्ट और रोड फोरम के लिए सही मैप का उपयोग किया। हाल ही में चीन ने 25 से 27 अप्रैल तक बीजिंग में दुसरे बेल्ट एंड रोड फोरम की मेजबानी की थी। शिखर सम्मेलन के लिए चीनी अधिकारियों द्वारा उपयोग किए गए नक्शे में भारत के हिस्से के रूप में जम्मू -कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश को भारतीय राज्यों की तौर पे दिखाया गया था, जबकि पहले वे पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) का पाकिस्तान के हिस्से के रूप में प्रतिनिधित्व करते थे और अरुणाचल प्रदेश का दक्षिण तिब्बत के हिस्से के रूप में करते थे। नक्शे को चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने तीन दिवसीय बीआरआई शिखर सम्मेलन के अवसर पर प्रदर्शित किया है

यही नहीं, चीन ने भारत को बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) के हिस्से के रूप में भी दिखाया जबकि भारत ने दूसरी बार इस शिखर सम्मेलन का बहिष्कार किया है। इसमें 37 अन्य देशों द्वारा भाग लिया गया|

चीन का यह कदम एक आश्चर्य के रूप में आया है क्योंकि हाल ही में चीन ने हजारों मानचित्रों को नष्ट कर दिया था जो अरुणाचल प्रदेश को भारत के हिस्से के रूप में दिखाते थे| चीन नियमित रूप से शीर्ष भारतीय नेतृत्व द्वारा अरुणाचल प्रदेश के दौरे का विरोध करता है|
पिछले नवंबर में भी चीन के चाइना ग्लोबल टेलीविज़न नेटवर्क ग्रुप (CGTN) जो की चीन सेंट्रल टेलीविज़न का हिस्सा है, जो बीजिंग में स्थित है, ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) को जम्मू और कश्मीर के मूल नक्शे के हिस्से के रूप में चित्रित किया है, जिसकी लंबे समय से भारत द्वारा मांग रही है। चीन के वाणिज्य दूतावास पर आतंकी हमले की रिपोर्ट करते समय चीन के चैनल द्वारा इसे प्रदर्शित किया गया था।

लेकिन संदेह है कि यह चीनी सरकार द्वारा जानबूझकर किया गया प्रयास भी हो सकता है। विशेषज्ञ इसे चीन की योजनाबद्ध चाल के रूप में देख रहे हैं। चीन-भारतीय मामलों के विशेषज्ञ यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या यह चीन द्वारा भारत को गिराने के लिए जानबूझकर उठाया गया कदम है

हालांकि इस पर अभी तक कोई पुष्टि नहीं हुई है कि वह पूर्व नियोजित कदम था या नहीं| चीन बहुत अच्छी तरह से जानता है कि यह पाकिस्तान के साथ उसके संबंध को प्रभावित कर सकता है। इसमें इस्लामाबाद और पाकिस्तान सेना की प्रतिक्रिया आ सकती है। इसके चीन-पाकिस्तान-आर्थिक-गलियारे (CPEC) पर भी निहितार्थ होंगे। CPEC पर भारत का मजबूत विरोध है क्योंकि यह उसकी संप्रभुता का उल्लंघन करता है। CPEC को BRI के तहत सबसे महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी लिंक माना जाता है।


Kashish

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