सैन्य सुरक्षा

चीन और पाकिस्तान के उड़ गये होश!! अत्याधिक विषम परिस्थिति में भी ब्रह्मॊस सुपरसोनिक मिसाइल का हुआ सफल परीक्षण!!

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इस खबर ने चीन और पाकिस्तान का दिल दहलादिया है। भारत ने चरम परिस्थिति में ब्रह्मॊस मिसाइल का सफलता पूर्वक परीक्षण किया है। दुनिया के सभी छॊटे बड़े देश भारत की ऐतिहासिक सफलता को देख दंग रह गये हैं। मॊदी जी की “टार्गेट चीन” नीती का लक्ष्य साफ है। भारत की तरफ आंख उठाने वाली चीनी ड्रागन को हमॆशा हमॆशा के लिए भीगी बिल्ली बनाने की अपनी नीती के उपलक्ष्य के अनुसार, मॊदी जी हर दिन चीन को झटका देने वाली यॊजनायें बना रहें हैं।

इसी यॊजना के तहत विषम परिस्थितियों में ब्रह्मॊस का परीक्षण कर भारत ने विश्व को बताया है कि अब चरम मौसम में भी भारत युद्द लड़ सकता है। ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल का सफलतापूर्वक परीक्षण (16 जुलाई) को “अपने जीवन को बढ़ाने” के उद्देश्य से किया गया था। जीवन विस्तार प्रौद्योगिकियों को स्थापित्य करने के लिए एकीकृत टेस्ट रेंज (आईटीआर) बालासोर से सुबह 10:30 बजे ब्रह्मोस एयरोस्पेस और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा किए गए इस सफल उड़ान परीक्षण की देश भर में जम कर तारीफ हो रही है। एक मिसाइल परीक्षण के लिए जितना विषम मौसम हो सकता है उतने विषम मौसम में ब्रह्मोस का परीक्षण किया गया है। करीब सात मीटर तक ऊचीं हवा के लहरे और तेज़ हवा के बीच भी ऒडिशा से ब्रह्मॊस का सफलता पूर्वक परीक्षण किया गया है!

परीक्षण-उड्डयन का उद्देश्य मिसाइल के जीवन को 10 से 15 साल तक बढ़ाने का था। शब्द के गती से तीन गुना ज्यादा तेज़ी से दौड़ ने वाली ब्रह्मॊस दुनिया की सबसे बेहतरीन मिसाइलों में से एक है। अमरीका-ब्रिटन-जपान और साऊदी से लेकर हर देश ब्रह्मॊस का मुरीद है। वहीं ब्रह्मॊस का नाम सुनकर चीन और पाकिस्तान के हॊश उड़ जाते हैं!

  • ब्राह्मोस मिसाइल सूपरसॊनिक गती से यात्रा कर 290 किमी तक की उड़ान सीमा को आवृत्त करती है।
  • पलक झपकते ही अपने लक्ष्य को भेद सकती है और शत्रु देश के टार्गेट को खाक में मिला सकती है।
  • जल-थल या फिर आकाश, कहीं से भी ब्रह्मॊस को उड़ाया जा सकता है।
  • ब्रह्मॊस के मार्ग में दुनिया का कॊई भी ज्ञात हथियार प्रणाली द्वारा अवरॊध उत्पन्न नहीं किया जा सकता है। यानी बह्मोस अजॆय है!
  • अत्याधिक गतिशील ऊर्जा के कारण मिसाइल की विनाशकारी शक्ति भी अत्याधिक है।
  • ब्रह्मॊस की क्रूज़िंग ऊंचाई 15 किमी तक हो सकती है और टर्मिनल ऊंचाई 10 मीटर जितनी कम हो सकती है।
  • इसमें 200 से 300 किलो वजन वाला एक पारंपरिक हथियार होता है।
  • ब्रह्मोस मिसाइल को भारतीय सेना और नौसेना में पहले ही शामिल किया जा चुका है। जल्द ही ब्रह्मॊस वायुसेना के लड़ाकू जेट सुखोई 30 एमकेआई का हिस्सा होगा।
  • रूस के साथ मिलकर स्वदेशी तकनिक से ब्रह्मॊस को तयार किया जा रहा है।

ब्रह्मॊस के सफल परीक्षण ने निश्चित ही चीन और पाकिस्तान की रातों की नींद और दिन का चैन उड़ा दिया है। अब चीन और पाकिस्तान भारत से युद्द तो क्या, भारत की ऒर आंख उठाकर देखने से भी डरेंगे।

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Source
indiatoday
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