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अमेरिका जिसने भारत को एक समय में मदद में लिए मना कर दिया था आज उसे ही भारत के सामने झुकना पड़ा| जानिये क्यूँ?

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1999 में भारत के इतिहास में भारत और पाकिस्तान के बीच एक युद्ध हुआ था जिसको हम कारगिल के युद्ध  के नाम से जानते है| युद्ध तो भारत पाकिस्तान से जीत गया था,बहुत से देशों ने इसमें भारत का साथ दिया था लेकिन अमेरिका ने तब कुछ ऐसा किया था जिसे भारत नही भूल पाया था और जिसका आज भारत ने उसे जवाब दे दिया है|

दरअसल उस वक़्त भारत के पास जीपीएस टेक्नोलोजी नही थी और जब भारत ने अमेरिका से मदद मांगी तांकि वो अमेरिका की जीपीएस टेक्नोलोजी का उपयोग करके पाकिस्तान के सैनिकों का पता लगा सके जिससे जल्द से जल्द लड़ाई ख़तम हो और भारत के कम से कम सैनिक मारे जाएँ लेकिन उस वक़्त अमेरिका ने इसके लिए साफ़ साफ़ मना कर दिया|

यही नही जब भारत ने रूस से क्रायोजेनिक इंजन खरीदना चाहा तब भी अमेरिका ने इस डर से की कहीं भारत अपना परमाणु मिसाइल न बनाले इस सौदे को होने से ही रोक दिया था|ये वही इंजन है जिसकी वजह से रूस और अमेरिका अंतरिक्ष में जा पाए थे और लम्बी लम्बी दूरी जैसे कि चाँद तक तय कर पाए थे|

ये सब होने के बाद भी भारत ने हार नही मानी|भारत के इसरो में फंडिंग न होने के बावजूद भी भारत के वैज्ञानिकों ने हार नही मानी|भारत के वैज्ञानिकों और इसरो ने ऐसा विकास करके दिखाया है जो स्पेस रिसर्च में बहुत अद्भुत है और भारत की इस प्रगति को देख सारे देश अचम्बे में आ जाते है की भारत ने ऐसी उपलब्धि कैसे हासिल कर ली|

आज भारत चौथा ऐसा देश है जिसने मंगल की और स्पेसशिप भेजा है और भारत पहला ऐसा देश है जो पहले ही प्रयास में मंगल तक पहुंच पाया है|यहीं नही इसरो से अपनी आधुनिकता से पहला ऐसा अंतरिक्ष बनाया है जो की 12 रुपये प्रति लागत से दूरी को तय कर सकता है|ये तो बेहद सस्ती है यहाँ तक की ओला और उबेर जैसे व्हानों की सवारी से भी सस्ता है|

इसके इलावा इसरो ने और भी बहुत धूम मचाई है.यहाँ तक की इसरो की कामयाबियों के चलते एक वक़्त ऐसा आया जब नासा ने इसरो को नासा का साथ देने के लिए धन्यवाद दिया और ये भी कहा की इसरो के सहयोग के बिना ये मुमकिन नही हो पाता|

अमेरिका ने भी भारत का लोहा माना और उसके बाद हुआ निसार का आविष्कार जिसकी वजह से अमेरिका को भारत के आगे सर झुकाना पड़ा|निसार यानी नासा-इसरो सिंथेटिक एपर्चर राडार या निसार मिशन| निसार उपग्रह, उन्नत रडार इमेजिंग का उपयोग करके पृथ्वी के अभूतपूर्व विस्तृत दृश्य प्रदान करता है। यह पर्यावरण की गड़बड़ी, बर्फ-शीट के पतन और भूकंप, सूनामी, ज्वालामुखी और भूस्खलन जैसे प्राकृतिक खतरों सहित ग्रह की कुछ सबसे जटिल प्रक्रियाओं के बारे में उनके होने से पहले जानकारी देता है|ये दुनिया की सबसे महंगी सैटेलाइट है जिसको 2021 तक लांच कर दिया जाएगा|

जिस तकनीक को अमेरिका ने भारत को रूस से खरीदने नही दिया था,जिसके सौदे को उसने रोक दिया था आज भारत ने खुद ही उस को विकसित कर लिया है|आज भारत ने खुद ही क्रायोजेनिक इंजन का निर्माण कर लिया है जो की दुनिया का सबसे सस्ता रोकेट इंजन है|

भारत की इन उपलब्धियों को देखकर अमेरिका का सर शर्म से झुक गया इसलिए ही वो अब भारत के पास निसार प्रोजेक्ट का प्रस्ताव लेकर आया है और आज भारत के सहयोग से इस योजना को पूरा करेगा|

जय भारत ||

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