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अजीत डोवल ने किया इस बात का खुलासा की क्यूँ दूसरा विश्व युद्ध जीतने के तुरंत बाद ही अंग्रेजों ने भारत को छोड़ दिया था!!!

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एक ज़माना हुआ करता था, देश में आतंकवादी खुले आम घूमते थे। अपनी मन मरज़ी से ठाठ से जीवन व्यतीत करते थे। भारत में जहाँ तहाँ हमला करते थे, बम फोड़ते थे, निर्दॊष लोगों को मौत के घाट उतारते थे। इनकी वकालत स्वयं काँग्रेस के महामहिम किया करते थे। इनकी फ़ांसी रुकवाने के लिए आधी रात में न्याय पालिका के दरवाज़े खोले जाते थे। आतंकवादी भारत को अपने बाप का माल समझकर आराम से रहा करते थे।

लेकिन वक्त बदल गया। सत्ता इन के आकाओं के हाथ से चली गई और मोदीजी के हाथ में आ गयी। इनकी उल्टी गिनती शुरू हो गयी। सारे आतंकवादियॊं के होश उड़ गए और अपने बिल में जाकर छुप गये। उनकी नींद तब उड़गयी जब मोदीजी ने राष्ट्रीय सुरक्षा का ज़िमा अजित डोवल के हाथों में सौंप दिया। आज आतंकवादी इनका नाम सुनकर थर-थर काँपते हैं। चूहॊं की तरह बिल में छुपे इन देश के गद्दारों को डोवल ढूँढ़ -ढूँढ़ कर बाहर निकाल रहे हैं और रगड़ रगड़ के धॊ रहें हैं।

भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोवाल तब से चर्चाओं में है जब से भारत ने पीओके में  सर्जिकल स्ट्राइक की है। आम आदमी को डोवाल पर पूरा विश्वास है। इन्हें भारत  के ‘जेम्स बॉन्ड’ के रूप में जाना जाता है|

जहां तक ​​पाकिस्तान को सम्भालने की बात है लोग उम्मीद के साथ डोवल की और देखते है| 2014 के दौरान उनके एक भाषण ने कांग्रेस पार्टी और इतिहास की नेहरूवादी व्याख्याओं का पूर्ण रूप से पर्दाफाश किया था।

 

इस भाषण में उन्होंने बताया कि सुभाष चंद्र बोस और आईएनए की धमकी के कारण अंग्रेजों को भारत छोड़ने के लिए मजबूर किया गया था।

भारत के एनएसए ने इस मुद्दे पर भी प्रकाश डाला कि महात्मा गांधी ने देश के स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका जरुर निभाई है, लेकिन कांग्रेस पार्टी के क्विट इंडिया आंदोलन ने अंग्रेजों पर कोई दबाव नहीं डाला। इसमें कांग्रेस को बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा था|

अत्यधिक बुद्धिमान अधिकारी ने जानकारी साझा करते हुए इस बात का खुलासा भी किया कि 1956 में, ब्रिटिश प्रधान मंत्री क्लेमेंट एटली ने खुद इस बात पे सहमती प्रगट की थी कि सुभाष चंद्र बोस ने ब्रिटिश भारतीय सेना के सैनिकों के बीच राष्ट्रवाद और विद्रोह की भावना को जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। अधिक से अधिक लोगों ने इंडियन नेशनल आर्मी में शामिल होना शुरू किया। इसके अलावा, जिस तरह से भारतीय राष्ट्रीय सेना (आईएनए) ब्रिटिशों के खिलाफ लड़ने के लिए तैयार थी, वह एक संकेत था कि ब्रिटिश अब बहुत देर तक भारत में नही रह सकेंगे।

एनएसए के अनुसार, क्लेमेंट अटली ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जस्टिस फन भूषण चक्रवर्ती के सामने स्वतंत्रता संग्राम में बोस की भूमिका पर प्रकाश डाला था|

बोस द्वारा सशस्त्र संघर्ष की योजना बनाई जिसने भारत को स्वतंत्र करने में मदद की। लेकिन, कांग्रेस ने अपनी गंदी चालें खेलकर ये सुनिश्चित करने की कोशिश की कि आईएनए और उसके नेता सुभाष चंद्र बोस के बलिदानों का कोई श्रेय उन को न मिले।

आईएनए के 60,000 से अधिक सैनिकों ने अपना जीवन स्वतंत्रता संग्राम के दौरान बलिदान किया। लेकिन आजादी के बाद, आईएनए के सैनिकों को भारतीय सेना के साथ एकीकृत करने का अवसर भी नहीं दिया गया। उनमें से कुछ (जो ब्रिटिश शासन के दौरान जेल गए थे) उनको स्वतंत्रता के बाद भी जेल में रखा गया था।

अजीत डोवाल ने कई बार कांग्रेस का पर्दाफाश किया है, लेकिन पार्टी उन्हें आरएसएस या भाजपा एजेंट नहीं कह  सकती है क्योंकि उन्होंने कांग्रेस शासन के तहत कई सालों तक भारत सरकार की सेवा की है।

यह पुराना भाषण इस बात पर प्रकाश डालता है कि इतिहासकारों का कांग्रेस पार्टी द्वारा किस तरह से चुनाव किया गया है  देश के इतिहास को बर्बाद करने के लिए और इसे उन अध्यायों के साथ बदल दिया गया है जो नेहरू की कम्युनिस्ट विचारधारा फैला रहे है। स्कूल के छात्रों की इतिहास पाठ्यपुस्तकों को पढ़ें और स्वयं देखें उनमें से अधिकतर गांधी-नेहरू परिवार की उपलब्धियों पर ध्यान केंद्रित करते हैं|

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