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भारतीय रुपये को मिलेगी ओर मजबूती! ईरान के साथ पेट्रोल के बदले चावल का आदान-प्रदान करने के बाद, अब मोदी सरकार ने भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच मुद्रा स्वैप समझौते पर हस्ताक्षर किये

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मोदी सरकार के तहत रुपये के मूल्य को मजबूत करने के लिए विभिन्न नीतियों के कार्यान्वयन में तेजी आई है। ईरान के साथ पेट्रोल के लिए चावल का आदान-प्रदान करने के बाद, अब मोदी सरकार ने भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच मुद्रा स्वैप के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।

ये शानदार सौदा विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के संयुक्त अरब अमीरात के दौरे में उनके समकक्ष अब्दुल्ला बिन जायद के साथ सुरक्षा, रक्षा, आतंकवाद के विरुद्ध, व्यापार और ऊर्जा के विभिन्न क्षेत्रों पर एक लंबी चर्चा के बाद हुआ| यह 12 वीं भारत-संयुक्त अरब अमीरात की आयोग बैठक के बाद आयोजित किया गया।

इस समझौते की पुष्टि विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रविेश कुमार ने दी थी, उन्होंने बताया कि “सुषमा स्वराज की यात्रा के दौरान दो दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए गए हैं: मुद्रा स्वैप समझौता और अफ्रीका में विकास सहयोग के लिए समझौता।

मुद्रा स्वैप समझौता कैसे एक मास्टरस्ट्रोक है!

यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि 2017 में भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच द्विपक्षीय व्यापार करीब 52 अरब डॉलर था। ऐसा कहा जाता है कि आने वाले वर्षों में इसमें कई गुना वृद्धि हुई है क्योंकि भारत ने रक्षा से लेकर प्रौद्योगिकी विनिमय जैसे कई सौदे किए हैं। अब मुद्रा स्वैप समझौता भारतीय रुपये के मूल्य को मजबूत करने में मदद करेगा।

एक अधिकारी के अनुसार “स्वैप 200 करोड़ धीरमया रु 3,500 करोड़ ($ 496 मिलियन), जो केंद्रीय बैंक राशि का अनुरोध करता है उसके अनुसार होगा”।

यह बताते हुए कि दो केंद्रीय बैंक मुद्रा स्वैप समझौते के लिए सहमत हुए हैं, आधिकारिक बयान में कहा गया है, “भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच द्विपक्षीय मुद्रा स्वैप समझौते से यू.एस. डॉलर जैसी मुद्राओं पर निर्भरता कम होने की उम्मीद है।”

यह सौदा अमेरिकी डॉलर पर भारत की निर्भरता को काफी हद तक कम करेगा और भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रविेश कुमार ने भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच सौदों के बारे में बताते हुए इस बात की जानकारी भी दी, “व्यापक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाते हुए 12 वीं भारत-संयुक्त अरब अमीरात बैठक विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जयद अल नह्यान की अध्यक्षता में हुई जिस पर ऊर्जा, सुरक्षा, व्यापार, निवेश, अंतरिक्ष, रक्षा और कंसुलर में सहयोग पर व्यापक चर्चा आयोजित की गई।


Kashish

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