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संयुक्त अरब अमीरात के साथ 3500 करोड़ रुपये के मुद्रा स्वैप सौदे के बाद, अब मोदी सरकार ने ईरान के साथ कच्चे तेल के आयात के लिए रुपये में भुगतान के समझौते पर हस्ताक्षर किए

प्रधान मंत्री मोदी के कूटनीति कौशल की तुलना किसी चीज़ से भी नहीं की जा सकती। यह सब से ऊपर है। प्रधान मंत्री मोदी के व्यावहारिक दृष्टिकोण के साथ भारत अब नई ऊंचाइयों तक पहुंच गया है और पूरी दुनिया उसकी क्षमता को स्वीकार करती है
ईरान के साथ तेल के लिए चावल का आदान-प्रदान करने के बाद, भारत ने अब ईरान से कच्चे तेल के आयात के लिए रुपये के संदर्भ में भुगतान के समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।

अमेरिका के ईरान से तेल आयात करने पर प्रतिबंध लगाने और राष्ट्रों को तेल खरीदने की चेतावनी के बावजूद अब भारत और सात अन्य राष्ट्रों को अमेरिका ने छूट दी है|

इससे पहले, भारत यूरोपीय बैंकिंग चैनलों का उपयोग कर यूरो में भुगतान करता था। ये चैनल नवंबर से अवरुद्ध हो गए। अब भारतीय रिफाइनरी राष्ट्रीय ईरानी तेल कंपनी (एनआईओसी) के यूसीओ बैंक खाते में रुपये का भुगतान करेंगे।

इस भुगतान में से आधे फंड का उपयोग ईरान को भारतीय सामानों के निर्यात के भुगतान के निपटारे के लिए किया जाएगा। भारत बारटर ट्रेड सिस्टम के तहत ईरान को अनाज जैसे चावल, गेहूं, सोयाबीन, दवाइयों, चिकित्सा उपकरणों और उपभोक्ता उत्पादों निर्यात करेगा। तेल के बदले में चावल निर्यात करने के लिए पहले से ही भारत एक समझौते पर हस्ताक्षर कर चूका है।

आयात और एस्क्रो भुगतान में कटौती के बाद भारत को यह छूट प्राप्त हुई है। 180 दिनों की छूट के तहत, भारत को अधिकतम 300,000 बैरल कच्चा तेल आयात करने की अनुमति है।

भारत ईरानी तेल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है। मोदी सरकार का यह मास्टर स्ट्रोक भारत को अपनी तेल जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगा और साथ ही रुपए के मूल्य को मजबूत करने में मदद करेगा। इससे भारत और दूसरे देश को डॉलर पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी जिससे डॉलर कमजोर हो जाएगा और प्रत्येक देश की स्थानीय मुद्राओं को मजबूत किया जाएगा।

प्रधान मंत्री मोदी सरकार लगातार देश की तेल जरूरतों को पूरा करने के लिए कदम उठा रही है और इस बात को ध्यान में भी रख रही है कि इसका बोझ देश के लोगों के कंधों पर नहीं डालना चाहिए। प्रधान मंत्री मोदी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमत कम करने के लिए अपने सर्वश्रेष्ठ प्रयास कर रहे हैं और उत्साहजनक योगदान दे रहे हैं।

रुपये के मूल्य को मजबूत करने के लिए वह सभी देशों को स्थानीय मुद्राओं में व्यापार करने का आग्रह कर रहें है। अब तक भारत ने स्थानीय मुद्रा में व्यापार करने के लिए जापान, रूस, संयुक्त अरब अमीरात और ईरान के साथ मुद्रा स्वैप समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह विदेशी मुद्रा भंडार पर डॉलर के प्रभाव को कम करेगा| भारत चीन सहित 23 देशों पर स्थानीय मुद्राओं में सौदा करने के लिए नजर कर रहा है।

यह नरेंद्र मोदी और उनकी कूटनीति की शक्ति के साथ आप का भी योगदान है क्योंकि यह आप ही हैं जिन्होंने प्रधान मंत्री मोदी को अपने नेता के रूप में चुना है। यदि आप भारत को अधिक ऊंचाइयों को छूते देखना चाहते हैं तो प्रधान मंत्री मोदी के लिए मतदान जारी रखें।


स्रोत: Financial Express


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