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मॊदी सरकार की नॊट बंदी ने असम पर किया गहरा असर!! 7 लाख से अधिक चाय बगान के श्रमिकों ने पहली बार बैंक के दरवाज़े पर रखा कदम

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क्या आप सॊच सकते हैं कि सत्तर साल के आज़ादी के बाद भी इस देश में ऐसे कई लोग हैं जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी में बैंक का दरवाज़ा तक नहीं देखा। बिजली, गैस, टीवी, पानी का नल, सड़क नहीं देखा। सत्तर वर्ष में कितनी सरकारें आई और गयी लेकिन गरीब और पिछड़ा वर्ग पिछड़ा ही रह गया। विशेष रूप से उत्तर पूर्व के राज्य तो सौतेले व्यवहार से त्रस्त थे। लेकिन उनके जीवन में एक आशा की किरण बनकर आये भारत के प्रधानंत्री नरेंद्र मॊदी।

नॊट बंदी का हुआ असम के चाय बागानों में काम करने वाले श्रमिकों पर असर

विरॊधी चाहे जितना मर्जी चिल्लाये, छाटी कूट लें, लेकिन मॊदी जी की नॊट बंदी की सफलता की कहानी दूर दराज़ असम से आई है। असम सरकार चाय बागान के श्रमिकों के सात लाख से अधिक बैंक खातों में 2,500 रुपये जमा करेगी। नॊट बंदी के बाद सरकार ने जो वादा किया था उसे पूरा करने जा रही है सॊनोवाल की सरकार। 2017-18 के बजट में 5000 रूपये की प्रोत्साहन धन राशी की घोषणा की थी। उस मूल्य से आधा धन अब चाय बागानों में काम करने वाले श्रमिकों को दिया गया है।

श्रमिकों को ब्रिटिश प्रणाली से वेतन दिया जाता था।

अंग्रेज़ चले गये लेकिन गुलामी नहीं गयी। असम के चाय बागानों में काम करने वाले श्रमिकों को अंग्रेज़ों के प्रणाली से वेतन दिया जाता था। व्यक्तिगत उद्यान या कंपनियों के स्वामित्व की पसंद के आधार पर नकदी में साप्ताहिक या पखवाड़े के आधार पर वेतन का भुगतान किया जाता था। सरकार ने घॊषणा की थी कि नॊट बंदी के तुरंत बाद जो भी अपना खाता बैंक में खुलवायेगा, 5000 रूपये का प्रॊत्साहन धन सीधे उसके अकाऊंट में डाल दिया जायेगा। इस घॊषणा के बाद करीब सात लाख से भी अधिक लोगों ने अपना बैंक खाता खुलवाया है!

राज्य सरकार ने अपने वादे को निभाया है और पहले चरण में ‘चाह बागचा धन पुरस्कार मेला’ के माध्यम से असम के 26 जिलों में फैले 752 संपत्तियों में चाय बागान श्रमिकों के 7,21,485 बैंक खातों में से प्रत्येक के अकांऊट में 2500 रुपये स्थानांतरित कर दिया गया है। सरकार के 182 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं । दूसरे चरण में सभी अकाऊंट में बची हुई धन राशी को 15 जनवरी, 2019 तक डाल दिया जायेगा। इसको कहते हैं साफ़ नीयत सही विकास। कांग्रेस सिर्फ़ वादे करती है निभाती नहीं। नॊट बंदी को विफ़ल बताने वाले ज़रा मुड़ कर असम की ऒर देखने का कष्ट करें और जाने कि नॊट बंदी ने कितनों के जीवन को संवारा है।

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