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मोदी सरकार का मास्टरस्ट्रोक!आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों को सरकारी नौकरी और शिक्षा में 10% आरक्षण मिलेगा

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प्रधान मंत्री मोदी सरकार द्वारा एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए आज फैसला किया गया है कि| प्रधान मंत्री मोदी सरकार ने आरक्षण कोटा 50 से बढ़ाकर 60% करने के लिए एक संवैधानिक संशोधन लाने का संकल्प लिया है। अतिरिक्त 10% कोटा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) को नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण पाने के लिए लागू होगा।

यह संवैधानिक संशोधन जो मोदी सरकार द्वारा लाया जा रहा है, आरक्षण नीति के संदर्भ में एक गेम चेंजर होगा, विशेष रूप से इस चुनावी वर्ष में, क्योंकि यह जाति और धार्मिक विचारों से परे है।

ऐतिहासिक संशोधन मोदी सरकार की जाति-आधारित तुष्टिकरण की नीति को खत्म करने की दिशा में है और यह सामान्य वर्ग के लिए एक बड़ा फायदा है जो बहुत लंबे समय से आर्थिक शर्तों पर आरक्षण की मांग कर रहा था। यह मोदी सरकार ही है जिसने आखिरकार उनकी परवाह की है और उनकी लंबे समय से लंबित मांग को पूरा करने के लिए एक साहसिक और निर्णायक कदम उठाया है। मोदी सरकार ने वास्तव में सामान्य वर्ग से संबंधित लोगों की भावनाओं का सम्मान किया है।

इसे लागू करने के लिए, सरकार संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 में संशोधन करेगी। ये दोनों संशोधन उच्च जाति के बीच आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग या सामान्य श्रेणी के अंतर्गत आने वाले लोगों को 10 प्रतिशत का आरक्षण देंगे।

सरकार के इस प्रस्ताव ने विपक्ष को भी एक ऐसी स्थिति में डाल दिया है, जहां उनके एक गलत कदम की उन्हें भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। यदि वे मोदी सरकार के संशोधन का समर्थन नहीं करेंगे, तो उन्हें उच्च जाति के वोटों का बड़ा नुकसान होगा और यदि वे समर्थन करेंगे और यह संशोधन एक वास्तविकता बन जाएगा, तो ये मोदी सरकार के लिए एक बहुत बड़ी कामयाबी होगी|
मोदी सरकार ने वास्तव में आर्थिक आधार पर आरक्षण के लिए एक आधार लागू किया है। यह सिर्फ शुरुआत है। मोदी सरकार ने ऐसा तीर निकाला है जो जिस दिशा में भी जाए जीत मोदी सरकार की ही होगी|

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