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राजस्थान चुनाव : जानिये जयपुर की महारानी गायत्री देवी को इंदिरा गाँधी ने आपातकाल के दौरान जेल में क्यूँ कैद किया

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कांग्रेस पार्टी ने हमेशा से ही उन नेताओं को रेंदने की कोशिश की है जिन्होंने उसके खिलाफ आवाज़ उठाई है और जो सत्ता में कांग्रेस के समक्ष मज़बूत रहे है|जवाहर लाल नेहरु, इंदिरा गाँधी, राजीव गाँधी, सोनिया गाँधी से लेकर राहुल गाँधी तक सब ने यही किया है|जब भी कोई नेता इस खानदान के रास्ते के बीच आया इस खानदान ने उस नेता को बेहद प्रताड़ित किया यहाँ तक की मौत के घाट भी उतारा|

ऐसा ही एक किस्सा है गायत्री देवी का| इंदिरा गाँधी की नफरत ने उन्हें इस कदर अँधा कर दिया था कि उन्होंने आपातकाल के दौरान गायत्री देवी को तिहाड़ जेल में डाल दिया|

कौन है गायत्री देवी और क्यों इंदिरा गाँधी ने उन्हें जेल में डाला?

गायत्री देवी जयपुर की महारानी थी| गायत्री देवी का विवाह जयपुर के शासक महाराजा सवाई “जय” मान सिंह द्वितीय के साथ हुआ जिसके बाद वह उनकी तीसरी पत्नी और जयपुर की महारानी बनी|

इंदिरा गाँधी और गायत्री देवी एक-दूसरे को अपनी युवा अवस्था से ही जानते थे| दोनों ने पश्चिम बंगाल के शांतिनिकेतन में रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा स्थापित विद्यालय भवन में साथ साथ पढ़ाई की थी।

गायत्री देवी बहुत सुंदर थी|उन्हें वोग पत्रिका द्वारा भी दुनिया की 10 सबसे खूबसूरत महिलाओं की सूची में भी शामिल किया गया था|गायत्री देवी की सुंदरता और उनकी ठाठ बाठ से इंदिरा गाँधी शुरू से ही बहुत जलती थी|

इंदिरा गाँधी की इस नफरत ने और तूल पकड़ लिया जब राजनीति में भी महारानी गायत्री देवी ने एक मजबूत पकड़ बना ली|1962 में, गायत्री देवी ने जयपुर से लोकसभा चुनाव लड़े और न सिर्फ जीते बल्कि 78 % मत के साथ बहुमत से जीते| गायत्री देवी को 246,516 में से 192,909 वोट प्राप्त हुए।

गायत्री देवी ने ये चुनाव सी राजगोपालाचारी द्वारा स्थापित स्वातंत्र पार्टी की टिकट पर कांग्रेस के खिलाफ  लड़ा था|लोकसभा चुनावों में भारी जीत के बाद, यह स्पष्ट था कि गायत्री देवी राजनीति का एक अहम चेहरा है|इसलिए, 1965 में, प्रधान मंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने गायत्री देवी को पार्टी में शामिल होने का मौका दिया। पर गायत्री देवी, जिन्होंने कांग्रेस विरोधी मंच पर चुनाव लड़ा था,इसके लिए इनकार कर दिया, और स्वातंत्र पार्टी जनसंघ के साथ सहयोग किया|

इंदिरा गाँधी के गले से ये सब नीचे नहीं उतर रहा था|यहाँ तक की विधान सभा में भी वे गायत्री देवी का अपमान करती थी| इंदिरा ने भरी विधान सभा में गायत्री देवी को कुतिया और एक कांच की गुड़िया कह कर उनका अपमान किया।

इंदिरा और गायत्री के रिश्ते का वर्णन करते हुए, स्वतंत्र से एक रिपोर्ट में कहा गया है कि “संसद में उनकी [गायत्री] उपस्थिति से इंदिरा गांधी को बड़ी जलन थी।

इसलिए ही आपातकाल के दौरान इंदिरा गाँधी ने गायत्री देवी, विपक्षी नेताओं, पत्रकारों और अन्य जिन्हें उन्होंने खतरे के रूप में देखा था, उन सब को आंतरिक सुरक्षा (एमआईएसए) अधिनियम के रखरखाव के तहत जेल में कैद कर दिया था।

गायत्री देवी आपातकाल के दौरान चिकित्सा उपचार के लिए मुंबई गयी हुई थी| गायत्री देवी को सूचित किया गया था कि उनका इलाज पूरा होने के बाद उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है। वह जल्द ही राजधानी में लौट आई, और आकर लोकसभा भवन गयी जहां उन्होंने देखा कि विपक्षी बेंच खाली थे|

औरंगजेब रोड पर गायत्री देवी के घर पर आयकर अधिकारियों ने हमला कर दिया था, जिन्होंने उन्हें सूचित किया था कि उन्हें कथित तौर पर अव्यवस्थित सोने और संपत्ति के लिए कॉफ़ोपासा (विदेशी मुद्रा संरक्षण और तस्करी अधिनियम की रोकथाम) के तहत गिरफ्तारी का सामना करना पड़ रहा है।

गायत्री देवी ने जेल में अपने सेल को श्रीलाथा स्वामीनाथन, एक एनजीओ कार्यकर्ता के साथ साझा किया, जिसे दिल्ली के सीमावर्ती इलाकों में काम करने वाले फार्महाउस श्रमिकों के आयोजन के लिए कैद किया गया था|

जेल में रहते हुए, राजमाता ने तिहाड़ जेल में बच्चों को स्लेट्स और पाठ्यपुस्तकों की व्यवस्था करवाके उन्हें शिक्षा दी| उन्होंने बच्चों के लिए बैडमिंटन कोर्ट की स्थापना में भी मदद की।

पर जेल के समय में राजमाता का स्वास्थ्य बहुत बिगड़ गया। तिहाड़ पहुंचने के कुछ हफ्तों बाद, उनके मुंह में छाले हो गये। जेल अधिकारियों ने इलाज के लिए दंत चिकित्सा नियुक्ति की अनुमति देने के लिए तीन सप्ताह लगा दिए।राजमाता का स्वास्थ्य और बिगड़ता गया जिसके चलते आखिरकार, उन्हें इंदिरा गांधी द्वारा निर्धारित कई स्थितियों पर पेरोल पर रिहा कर दिया गया, जिनका उन्हें 1977 के चुनाव तक पालन करना था।

उनकी रिहाई के बाद, वह राजनीति से सेवानिवृत्त हो गयी और फिर कभी राजनीति में वापस नहीं आई।1999 में, कूच बिहार तृणमूल कांग्रेस ने लोकसभा चुनावों के लिए महारानी को नामित किया, लेकिन उन्होंने नामांकन स्वीकार नहीं किया।फेफड़ों के संक्रमण के साथ लड़ाई के बाद, अंत 29 जुलाई 2009 को गायत्री देवी की मृत्यु हो गयी|

इंदिरा गाँधी और उन के परिवार ने हमेशा राजनीतिक पद का दुरूपयोग कर देश को लूटा और लोगों को प्रताड़ित किया है| राजस्थान की महारानी को अपमानित कर के इंदिरा गाँधी ने राजस्थान के अहम को ठेस पहुंचाई है| इसलिए कभी भी कांग्रेस को सत्ता में लाने की गलती न करे|राजस्थान वासियों कांग्रेस के लिए कभी भी वोट न करियेगा |

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