अभिमतराजनीति

कांग्रेस को दुबारा लाने की अति मत करिये, मोदी को अटल मत बनाईये, थोड़ा विश्वास कर के राष्ट्र के पुनर्निर्माण में साथ दीजिये।

365 Shares

संयुक्त अरब अमीरात का एक शहर शारजाह, 80, 90 के दशक में शारजाह के एक रईसजादे और क्रिकेट के दीवाने अब्दुल रहमान बुख़ातिर ने अपनी दीवानगी की खातिर शारजाह में क्रिकेट स्टेडियम ही बनवा दिया था। पैसों की ताक़त के बल पर उन्होंने वहाँ अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट मैच भी आयोजित करवाना शुरू कर दिए लेकिन उनकी सबसे ज़्यादा दिलचस्पी भारत पाकिस्तान के मैचों को लेकर रहती थी। इस मैदान से भारत की कई खट्टी मीठी यादें जुडी हुईं हैं।

आज कई लोगों को पता नहीं होगा इसी शारजाह के मैदान पर एक मैच में पाकिस्तान को मैच की आखरी गेंद पर जीत के लिए 6 रन चाहिए थे भारत की तरफ से चेतन शर्मा आखरी ओवर की आखरी गेंद फेंकने जा रहे थे ज़बरदस्त रोमांच था और इसी आखरी गेंद पर जावेद मियाँदाद ने छक्का जड़ दिया था, इस जीत से पाकिस्तान ने भारत को मनोवैज्ञानिक दबाव में ला दिया था।

इसी मैदान पर आज पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की कप्तानी में खेलते हुए रॉथमेन्स कप के फाइनल में पाकिस्तान ने भारत को महज़ 125 रनों पर ऑउट कर दिया था, पाकिस्तान बहुत आश्वस्त था कि वो ये मैच जीत ही जायेगा लेकिन अति आत्मविश्वास में डूबी पाकिस्तान की पूरी टीम इस मैच में महज़ 75 रनों पर ही ऑल ऑउट हो गई और भारत ने ये मैच 50 रनों से जीत लिया था।

एक सत्य ये भी है शारजाह के मैचों में भारत की साथ पक्षपात भी बहुत होता था, कई फैसले अंपायर भारत के ख़िलाफ़ देते थे। यही हाल पाकिस्तान में होने वाले मैचों में लगभग हर देश की टीम के साथ होता था। बल्कि एक कहावत चल पड़ी थी कि पाकिस्तान की टीम 13खिलाड़ियों के साथ खेलती है, जिसमें दो अंपायर भी शामिल होते हैं।

सन 1991 में ऐसे ही एक मैच में पाकिस्तान के तेज़ गेंदबाज़ आक़िब जावेद ने हैट्रिक ली और मजे की बात ये थी कि तीनों ही विकेट एलबीडबल्यू थे, आज भी यू ट्यूब पर इस मैच की झलकियाँ देखेंगे तो पता चलेगा कि 3 में से 2 निर्णय ग़लत थे। बहरहाल इस मैच के बाद भारत ने शारजाह से अपने रिश्ते तोड़ लिए और ये तय किया कि अब कभी शारजाह में भारत नहीं खेलेगा। चूँकि सारा दारोमदार, रोमांच भारत पाक मैचों के कारण ही था तो शारजाह की चमक फ़ीकी पड़ती चली गई और अब शायद उस स्टेडियम में जानवर घूमते होंगे।

जब किसी चीज़ की अति हो जाती है तब उससे छुटकारा पा लेना ही अंतिम विकल्प रह जाता है लेकिन जानें क्यों ये भारत की राजनीति में लागू नहीं हो पाया। पाकिस्तान की ही तरह कांग्रेस भी हर तरह के छल कपट से भारत की सत्ता हासिल करती रही, इसे जनता का आदेश (?) बताती रही लेकिन पिछले 4.5 वर्षों में कांग्रेस का असली रूप सामने आया है जब ये इसी जनता के आदेश पर चुनी हुई सरकार को यहाँ तक कि देश को भी बदनाम, बर्बाद करने पर आमादा है। पाकिस्तान की टीम भी अंपायरों की मदद से मैच जीतती रहती थी और कांग्रेस भी अपने द्वारा सेट किये गए तमाम जजों, बुद्धिजीवियों, लेखकों, कलाकारों, पत्रकारों के जरिये हर हाल में सत्ता पाना चाहती है और पहले भी पाती रही है।

आज मज़बूत विपक्ष की तरफदारी करने वाले कई लोगों को ये भी पता नहीं होगा कि इंदिरा गाँधी और राजीव गाँधी के समय का विपक्ष इससे भी कमज़ोर था बल्कि यूँ कहें कि भाजपा को छोड़कर उनके सामने कोई विपक्ष था ही नहीं क्योंकि बाक़ी लगभग सभी दल कांग्रेसी विचारधारा से मेल खाते थे, साथ देने पर मलाई खाते थे न देने पर सीबीआई का निशाना बनाये जाते थे।

अति होने पर भारत ने फिर कभी शारजाह का रुख नहीं किया लेकिन कांग्रेस की अति को जानें क्यों ये देश सहन करता रहा? देश भर में सबसे ज़्यादा आतंकी हमले कांग्रेस के समय हुए, कश्मीर से रातोंरात हिन्दू खदेड़े गए, अपने ही देश में बहुसंख्यक हिंदुओं के आस्था के केंद्र रामलला को तम्बू में रहना पड़ रहा है, कृष्ण की जन्मस्थली भी हमें नहीं मिल पा रही है, हिन्दू त्यौहारों पर तमाम मीडिया और बुद्धिजीवियों को प्रदूषण, पानी की चिंता हो जाती है लेकिन बकरा ईद, क्रिसमस के पटाखों पर मुँह सिल जाते हैं। हिन्दू बाबाओं, धर्मगुरुओं के कांडों को जमकर उछाला जाता है लेकिन मौलानाओं, पादरियों के कांडों पर किसी के कानों पर जूँ भी नहीं रेंगती है।

अपने ही देश में हिंदुओं को दोयम दर्जे का इसलिए बना दिया गया क्योंकि कांग्रेस जानती है कि जितना हिंदुओं को तोड़ा जाएगा, जितना इसे बाँटा जाएगा उतना ही सत्ता सुख उसको मिलता रहेगा क्योंकि मुसलमान, ईसाई उसके साथ हर हाल में खड़े रहते हैं, यही वजह है कि हिंदुओं को कांग्रेस कुछ भी नहीं समझती है। मजे की बात ये है कि कांग्रेस की शह पर हिंदुओं को बदनाम, बर्बाद करने वाले भी तमाम लोग हिन्दू ही हैं।

आप जब तक खुद को गाली दोगे, अपने ही लोगों पर प्रहार करोगे तो दूसरों को आपको हराने में कोई परेशानी नहीं होगी। एक व्यापार, नौकरी में जमने में ही वर्षों लग जाते हैं फिर ये तो पहले मुगलों से, फिर अंग्रेज़ों से, कांग्रेस से सदियों से लूटे गए, तहस नहस किये गए, छिन्न भिन्न किये राष्ट्र का पुनर्निर्माण करना है, इसमें वक़्त लगेगा, त्याग बलिदान भी देना पड़ेगा।

अगर हमारी ही तरह वो तमाम स्वतंत्रता सेनानी भी स्वार्थी होते तो आज हम स्वतंत्र न होते, देश का सैनिक भी देश की खातिर अपना जीवन त्याग देता है, अगर वो भी स्वार्थी हो जाये तो देश का क्या होगा इसकी केवल कल्पना से ही सिहरन दौड़ जाती है।

कांग्रेस को दुबारा लाने की अति मत करिये, मोदी को अटल मत बनाईये, थोड़ा विश्वास, धैर्य रखिए और थोड़ा त्याग, बलिदान करिये, राष्ट्र के पुनर्निर्माण में साथ दीजिये।

इतनी अति के बाद तो इस कांग्रेस से छुटकारा पाईये..

365 Shares
Tags

Related Articles

FOR DAILY ALERTS
 
FOR DAILY ALERTS
 
Close